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Noida Airport: देश का पहला ईको फ्रेंडली एयरपोर्ट, परिसर में 133 हेक्टेयर में विकसित किया हरित क्षेत्र

रोहित शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Fri, 27 Mar 2026 02:44 PM IST
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सार

एयरपोर्ट को कुल 5428 हेक्टेयर में विकसित किए जाने की परियोजना है, जो चार चरण में पूरी होगी। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहित किया गया था, जिसमें इसे शुरू किया जा रहा है।

country's first eco-friendly Noida airport features a green zone established across 133 hectares
नोएडा एयरपोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार

नोएडा एयरपोर्ट देश का पहला पूरी तरह से ईको फ्रेंडली होगा। एयरपोर्ट परिसर के अंदर 133 हेक्टेयर भूमि में हरित क्षेत्र बनाया गया है। जिससे एयरपोर्ट में आने वाले देशी और विदेशी नागरिकों को स्वच्छ वातावरण का पूरा अनुभव होगा।

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एयरपोर्ट को कुल 5428 हेक्टेयर में विकसित किए जाने की परियोजना है, जो चार चरण में पूरी होगी। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहित किया गया था, जिसमें इसे शुरू किया जा रहा है। एयरपोर्ट को आगामी 100 वर्षों की भविष्यवादी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एनसीआर में बढ़ते वाहनों की संख्या और लगातार विकसित हो रही इंडस्ट्री के कारण इस क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ रहा है।
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प्राधिकरण ने 600 पेड़ कराए थे शिफ्ट
एयरपोर्ट का निर्माण शुरू होने के वक्त निर्माण स्थल पर 550-600 पेड़ थे। प्राधिकरण ने प्राकृति का ध्यान रखते हुए इन पेड़ों को कटवाने के बजाय इन्हें दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कराया था। परिसर के अंदर विकसित किए गए हरित क्षेत्र में सभी पेड़ शिफ्ट किए गए थे।

एयरपोर्ट परिसर में बने हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में अंडर ग्राउंड वाटर लेवल तेजी से गिरता जा रहा है। अंडर ग्राउंड वाटर लेवल को रिचार्ज करने के लिए एयरपोर्ट परिसर के अंदर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही यहां प्राकृतिक तालाब भी विकसित हैं। जिससे बारिश के पानी को संचयित किया जा सके और इसका इस्तेमाल हो सके।

रिन्यूएबल एनर्जी का भी होगा इस्तेमाल
उद्घाटन के बाद एयरपोर्ट को संचालित करने के लिए बिजली की जरूरत है। इससे होने वाले कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लिए पहले दिन से परिसर में रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा। एयरपोर्ट के लिए बिजली की जरूरत को सौर्य और पवन ऊर्जा से तैयार की जाएगी। परिसर में सोलर पैनल लगे हुए हैं। वहीं एयरपोर्ट के जरिए पवन चक्कियां भी स्थापित की गई हैं। जिनके जरिए बिजली बनाई जा रही है। 50 प्रतिशत जरूरत रिन्यूएबल एनर्जी से पूरी की जाएगी।

एयरपोर्ट में भविष्य की सारी जरूरतों का रखा गया है ध्यान
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में भविष्य की सारी जरूरतों का ध्यान रखा गया है। निर्माण के दौरान ही इसे प्रकृति से जोड़ने पर पूरा ध्यान दिया गया है। -शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ, यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण व नोडल अधिकारी (एयरपोर्ट)

2027 तक 93 मेगावाट बिजली से जगमगाएगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निर्बाध बिजली देने के अलावा उसकी चमक बढ़ाने और बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए विद्युत निगम से लेकर परिवहन निगम ने कमर कस ली है। जहां साल 2027 तक एयरपोर्ट से उड़ाने बढ़ने पर 6 से बढ़ाकर 93 मेगावाट तक की बिजली आपूर्ति होगी, वहीं नोएडा-ग्रेनो व ग्रेनो वेस्ट के निवासियों को एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम डबल डेकर बसों को एयरपोर्ट की कनेक्ट करने वाले रूटों चलाने पर मंथन कर रहा है।

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता संजय कुमार जैन ने बताया कि जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निर्बाध बिजली देने की पूरी प्लानिंग कर ली गई है। पिछले कुछ महीने से इस पर काम चल रहा है। अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) विवेक कुमार पटेल ने बताया कि वर्तमान में फिलहाल 6 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। एयरपोर्ट का उद्घाटन होते ही दबाव बढ़ेगा, जिसके बाद अगले कुछ महीने के भीतर 20 मेगावाट (एमवीए) तक बिजली की आपूर्ति बढ़ा दी जाएगी। साथ ही साल 2027 के शुरू होते ही एयरपोर्ट में उड़ाने भी बढ़ चुकी होंगी ऐसे में उन्हें 93 मेगावाट तक की बिजली आपूर्ति करने का प्लान तैयार किया गया है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-32 में विद्युत निगम का 220 केवी का बिजली उपकेंद्र है। इस उपकेंद्र से 33 केवी के डबल सर्किट की लाइन जा रही है। इसी तरह यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-18 में भी 220 केवी का बिजली उपकेंद्र है। इस बिजली उपकेंद्र से भी 33 केवी की डबल सर्किट लाइन जा रही है। इस तरह एक बिजली उपकेंद्र से बिजली सप्लाई के दो-दो विकल्प दिए गए हैं। एक लाइन में कोई दिक्कत आती है तो दूसरी लाइन से आपूर्ति तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही निर्बाध आपूर्ति के लिए क्यूआरटी टीम का भी गठन किया गया।

नोएडा-ग्रेनो और ग्रेनो वेस्ट से होकर एयरपोर्ट जाएंगी डबल डेकर बसें
परिवहन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार सिंह के अनुसार, जिले में जल्द संचालित होने वाली डबल डेकर बसों को फिलहाल नोएडा ग्रेनो और ग्रेनो वेस्ट समेत अन्य इलाकों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर था, लेकिन अब एयरपोर्ट में बढ़ने वाले दबाव और नोएडा की जनता को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए शुरू होने वाली डबल डेकर एसी बसों एयरपोर्ट से जोड़ा जाएगा। इसके लिए रूट का निर्धारण करने के लिए मंथन जारी है। इसके अलावा नॉन एसी बसें भी अपने रूट के अलावा एयरपोर्ट को भी टच करते हुए गुजरेंगी, ताकि आगरा, लखनऊ, मथुरा समेत अन्य इलाकों से आने वाले लोगों को भी सीधी कनेक्टिविटी मिल सके।

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