{"_id":"6a58e5bc8eae8c9d36088514","slug":"dfgsdf-grnoida-news-c-1-noi1095-4507862-2026-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: पैसा दोगुना का लालच पड़ा भारी, दो लोगों से 76 लाख की ठगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: पैसा दोगुना का लालच पड़ा भारी, दो लोगों से 76 लाख की ठगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- रिटायर्ड कर्मचारी और निजी कंपनी के अधिकारी बने शिकार, साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर जालसाजों ने निवेश पर दोगुना मुनाफा दिलाने का झांसा देकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के दो लोगों से 76 लाख रुपये की ठगी कर ली। एक मामले में पीडि़त को खुद को निवेश कंपनी का अधिकारी बताकर जालसाजों ने भरोसे में रखा। जबकि दूसरे मामले में व्हाट्स एप ग्रुप के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा दिया। दोनों मामलों में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सेक्टर-89 निवासी 60 वर्षीय एक कंपनी से सेवानिवृत्त अधिकारी ने पुलिस से शिकायत की है कि वर्ष 2023 में उन्होंने इंटरनेट पर निवेश के विकल्प तलाशते समय एक माइनिंग कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने खुद को इंदौर स्थित कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए सुरक्षित निवेश और दोगुना लाभ मिलने का दावा किया। विश्वास दिलाने के लिए नोटरीकृत एग्रीमेंट और पोस्ट डेटेड चेक भी उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों के भरोसे उन्होंने अक्टूबर 2024 तक अलग-अलग किस्तों में करीब 46 लाख रुपये निवेश कर दिए। शुरुआत में मासिक रिटर्न मिलता रहा, लेकिन फरवरी 2025 के बाद भुगतान बंद हो गया। इसके बाद कंपनी संचालक से संपर्क करने का हर प्रयास विफल रहा और मूलधन भी वापस नहीं मिला।
दूसरे मामले में ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी 43 वर्षीय एक शख्स ने निजी कंपनी कर्मचारी को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। बातचीत के बाद उन्हें दो अलग-अलग निवेश संबंधी ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में शेयर बाजार से कम समय में दोगुना लाभ कमाने के दावे किए गए। शुरुआती भरोसा बनने के बाद पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में करीब 30 लाख रुपये निवेश कर दिए। जब उन्होंने निवेश की रकम निकालने का प्रयास किया तो बहाने बनाए गए और कुछ समय बाद सभी नंबर बंद हो गए। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ।
विज्ञापन
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि दोनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जिन खातों में रकम भेजी गई है, उनकी जानकारी संबंधित बैंकों से भी मांगी गई है।
दस्तावेज दिखाकर जीता भरोसा :
पहले मामले में साइबर ठगों ने खुद को वास्तविक निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित का विश्वास जीता। उन्होंने निवेश के बदले नोटरीकृत स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट और पोस्ट डेटेड चेक भी सौंपे, जिससे पीड़ित को कंपनी पर संदेह नहीं हुआ। कई महीनों तक नियमित रिटर्न देकर भरोसा मजबूत किया गया। जब निवेश की राशि बढ़ गई तो भुगतान रोक दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब फर्जी दस्तावेज और कानूनी कागजात का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
बरतें सावधानी
- केवल सेबी से पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें।
- गूगल, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर मिले निवेश प्रस्तावों पर तुरंत भरोसा न करें।
- दोगुना या अत्यधिक मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं से सतर्क रहें।
- किसी भी खाते में रकम भेजने से पहले कंपनी की वैधता और पंजीकरण की जांच करें।
- निवेश संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि करें।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर जालसाजों ने निवेश पर दोगुना मुनाफा दिलाने का झांसा देकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के दो लोगों से 76 लाख रुपये की ठगी कर ली। एक मामले में पीडि़त को खुद को निवेश कंपनी का अधिकारी बताकर जालसाजों ने भरोसे में रखा। जबकि दूसरे मामले में व्हाट्स एप ग्रुप के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा दिया। दोनों मामलों में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सेक्टर-89 निवासी 60 वर्षीय एक कंपनी से सेवानिवृत्त अधिकारी ने पुलिस से शिकायत की है कि वर्ष 2023 में उन्होंने इंटरनेट पर निवेश के विकल्प तलाशते समय एक माइनिंग कंपनी के बारे में जानकारी जुटाई थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने खुद को इंदौर स्थित कार्यालय का कर्मचारी बताते हुए सुरक्षित निवेश और दोगुना लाभ मिलने का दावा किया। विश्वास दिलाने के लिए नोटरीकृत एग्रीमेंट और पोस्ट डेटेड चेक भी उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों के भरोसे उन्होंने अक्टूबर 2024 तक अलग-अलग किस्तों में करीब 46 लाख रुपये निवेश कर दिए। शुरुआत में मासिक रिटर्न मिलता रहा, लेकिन फरवरी 2025 के बाद भुगतान बंद हो गया। इसके बाद कंपनी संचालक से संपर्क करने का हर प्रयास विफल रहा और मूलधन भी वापस नहीं मिला।
विज्ञापन
दूसरे मामले में ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी 43 वर्षीय एक शख्स ने निजी कंपनी कर्मचारी को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। बातचीत के बाद उन्हें दो अलग-अलग निवेश संबंधी ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में शेयर बाजार से कम समय में दोगुना लाभ कमाने के दावे किए गए। शुरुआती भरोसा बनने के बाद पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में करीब 30 लाख रुपये निवेश कर दिए। जब उन्होंने निवेश की रकम निकालने का प्रयास किया तो बहाने बनाए गए और कुछ समय बाद सभी नंबर बंद हो गए। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ।
विज्ञापन
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि दोनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जिन खातों में रकम भेजी गई है, उनकी जानकारी संबंधित बैंकों से भी मांगी गई है।
दस्तावेज दिखाकर जीता भरोसा :
पहले मामले में साइबर ठगों ने खुद को वास्तविक निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित का विश्वास जीता। उन्होंने निवेश के बदले नोटरीकृत स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट और पोस्ट डेटेड चेक भी सौंपे, जिससे पीड़ित को कंपनी पर संदेह नहीं हुआ। कई महीनों तक नियमित रिटर्न देकर भरोसा मजबूत किया गया। जब निवेश की राशि बढ़ गई तो भुगतान रोक दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब फर्जी दस्तावेज और कानूनी कागजात का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
बरतें सावधानी
- केवल सेबी से पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें।
- गूगल, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर मिले निवेश प्रस्तावों पर तुरंत भरोसा न करें।
- दोगुना या अत्यधिक मुनाफे का दावा करने वाली योजनाओं से सतर्क रहें।
- किसी भी खाते में रकम भेजने से पहले कंपनी की वैधता और पंजीकरण की जांच करें।
- निवेश संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि करें।