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Noida News: युद्ध और टैरिफ की मार पर एफटीए का मरहम नाकाफी
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युद्ध और टैरिफ की मार पर एफटीए का मरहम नाकाफी
- ईरान व अमेरिका युद्ध और अमेरिका के 100 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव ने उड़ा दी निर्यातकों की नींद
- अमेरिका के खरीदारों के साथ हैं नोएडा और ग्रेटर नोएडा के ज्यादातर उद्योगों का 60 प्रतिशत कारोबार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईरान-अमेरिका युद्ध और अमेरिकी सीनेट में भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव ने जिले के निर्यातकों की नींद उड़ा दी है। उद्यमियों का कहना है कि समझौता होने के बाद राहत मिली थी और उद्योग पुराने ढर्रे पर आ रहे थे, लेकिन फिर से तनाव के बाद उद्योगों में उत्पादन कम हो गया है। युद्ध और टैरिफ की मार से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भी नहीं बचा सकेंगे। उद्योगों को बड़ा नुकसान होगा।
हाल ही में भारत सरकार ने यूनाइटेड किंगडम के साथ ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता हुआ है। वहीं कुछ दिन पहले न्यूजीलैंड के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता किया गया था। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निर्यातकों के लिए यह काफी नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका व ईरान युद्ध की मार से उद्योग व निर्यातक उभर नहीं पा रहे हैं। पहले करीब दो माह तक युद्ध चला था। तब 60 से 80 प्रतिशत तक उत्पादन ठप हो गया था। मध्यम पूर्व के देशों की तरफ से आना-जाना बंद हो गया। माल का निर्यातक पूरी तरह प्रभावित रहा। दोनों देशों के बीच समझौता होने से कारोबार फिर से पटरी पर लौट रहा था, लेकिन अब फिर से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट फिर से बंद हो गया है। 20 से 30 प्रतिशत काम बंद करना पड़ा है। अमेरिकी खरीदारों के ऑर्डर पूरा करने का काम रोकना पड़ गया है।
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एफटीए का नहीं मिल रहा फायदा
एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों का कहना है कि सरकार विभिन्न देशों के साथ एफटीए या सीईटीए कर रही है, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जापान व अन्य देशों से करोड़ों रुपये के निवेश का दावा किया जाता है, लेकिन वो कंपनियां अपने वहां देश से ही माल आयात करती हैं। यहां माल तैयार कर ले जाती हैं। इसका लाभ भी एमएसएमई सेक्टरों को नहीं मिला रहा है।
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100 प्रतिशत टैरिफ से लगेगा तगड़ा झटका
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। तभी निर्यातकों को काफी परेशानी हुई। कारोबार 50 प्रतिशत तक कम हो गया। अमेरिका के खरीदारों ने ऑर्डर रोक दिए। अब अमेरिकी सीनेट में 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह पास हुआ तो अमेरिकी खरीदारों के साथ यहां के निर्यातकों को भी नुकसान होगा।
विभिन्न देशों के साथ हो रहे एफटीए का लाभ निर्यातकों को काफी मिल रहा है। निर्यात बढ़ा है, लेकिन अन्य परेशानी कारोबार को नुकसान पहुंचा रही है। युद्ध फिर से शुरू होने के बाद काम रोकना पड़ा है।
तरुण चेतवानी, सचिव, द टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया
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सरकार एफटीए कर रही है, लेकिन उनका लाभ एमएसएमई सेक्टर को नहीं मिल रहा है। युद्ध की मार से किसी तरह उद्योग बाहर निकल रहे थे, लेकिन फिर हालात बिगड़ने लगे है। 60 प्रतिशत कारोबार अमेरिका में हैं।
शुभम किरोड़ीमल अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ एक्सपोटर्स
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- ईरान व अमेरिका युद्ध और अमेरिका के 100 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव ने उड़ा दी निर्यातकों की नींद
- अमेरिका के खरीदारों के साथ हैं नोएडा और ग्रेटर नोएडा के ज्यादातर उद्योगों का 60 प्रतिशत कारोबार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईरान-अमेरिका युद्ध और अमेरिकी सीनेट में भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव ने जिले के निर्यातकों की नींद उड़ा दी है। उद्यमियों का कहना है कि समझौता होने के बाद राहत मिली थी और उद्योग पुराने ढर्रे पर आ रहे थे, लेकिन फिर से तनाव के बाद उद्योगों में उत्पादन कम हो गया है। युद्ध और टैरिफ की मार से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भी नहीं बचा सकेंगे। उद्योगों को बड़ा नुकसान होगा।
हाल ही में भारत सरकार ने यूनाइटेड किंगडम के साथ ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता हुआ है। वहीं कुछ दिन पहले न्यूजीलैंड के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता किया गया था। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निर्यातकों के लिए यह काफी नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका व ईरान युद्ध की मार से उद्योग व निर्यातक उभर नहीं पा रहे हैं। पहले करीब दो माह तक युद्ध चला था। तब 60 से 80 प्रतिशत तक उत्पादन ठप हो गया था। मध्यम पूर्व के देशों की तरफ से आना-जाना बंद हो गया। माल का निर्यातक पूरी तरह प्रभावित रहा। दोनों देशों के बीच समझौता होने से कारोबार फिर से पटरी पर लौट रहा था, लेकिन अब फिर से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट फिर से बंद हो गया है। 20 से 30 प्रतिशत काम बंद करना पड़ा है। अमेरिकी खरीदारों के ऑर्डर पूरा करने का काम रोकना पड़ गया है।
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एफटीए का नहीं मिल रहा फायदा
एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों का कहना है कि सरकार विभिन्न देशों के साथ एफटीए या सीईटीए कर रही है, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जापान व अन्य देशों से करोड़ों रुपये के निवेश का दावा किया जाता है, लेकिन वो कंपनियां अपने वहां देश से ही माल आयात करती हैं। यहां माल तैयार कर ले जाती हैं। इसका लाभ भी एमएसएमई सेक्टरों को नहीं मिला रहा है।
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100 प्रतिशत टैरिफ से लगेगा तगड़ा झटका
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। तभी निर्यातकों को काफी परेशानी हुई। कारोबार 50 प्रतिशत तक कम हो गया। अमेरिका के खरीदारों ने ऑर्डर रोक दिए। अब अमेरिकी सीनेट में 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह पास हुआ तो अमेरिकी खरीदारों के साथ यहां के निर्यातकों को भी नुकसान होगा।
विभिन्न देशों के साथ हो रहे एफटीए का लाभ निर्यातकों को काफी मिल रहा है। निर्यात बढ़ा है, लेकिन अन्य परेशानी कारोबार को नुकसान पहुंचा रही है। युद्ध फिर से शुरू होने के बाद काम रोकना पड़ा है।
तरुण चेतवानी, सचिव, द टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया
सरकार एफटीए कर रही है, लेकिन उनका लाभ एमएसएमई सेक्टर को नहीं मिल रहा है। युद्ध की मार से किसी तरह उद्योग बाहर निकल रहे थे, लेकिन फिर हालात बिगड़ने लगे है। 60 प्रतिशत कारोबार अमेरिका में हैं।
शुभम किरोड़ीमल अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ एक्सपोटर्स