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Noida News: आंखों के सूखने से हो रही कंजंक्टिवाइटिस, तेजी से फैल रहा संक्रमण
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- आंखों में लापरवाही बरतने से कार्निया क्षतिग्रस्त हो सकता
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चिलचिलाती गर्मी और इसके बाद हुई बारिश से पनपी उमस से कंजक्टिवाइटिस (आईफ्लू) व आंखों में एलर्जी का प्रकोप शुरू हो गया है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में प्रतिदिन 10 से अधिक मरीज आंखों की बीमारियों का इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ भी इलाज के साथ आंखों की उचित देखभाल का परामर्श मरीजों को दे रहे हैं।
नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णा कुलदीप गुप्ता ने कहा कि बरसात के मौसम में बुखार, खांसी, जुकाम, चिकनपॉक्स व स्कैबीज जैसी बीमारियों के साथ कंजक्टिवाइटिस का संक्रमण बढ़ जाता है। वायरस और बैक्टिरिया से होने वाले कंजक्टिवाइटिस में आंखें लाल हो जाती हैं। आंखों में तेज दर्द होता है। गंदी उंगलियां आंखों से लगाने, धूल-धुएं का प्रतिकूल असर, बरसात व गंदे पानी में नहाने से यह बीमारी ज्यादा होती है। वायरस मक्खियों व हवा के माध्यम से आंखों तक पहुंचता है। संक्रमण इतना तीव्र होता है कि पीड़ित की आंखों में देखने से ही दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है। इसे सामान्य बीमारी समझना भूल है। लापरवाही बरतने से कार्निया के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि गर्मी-बरसात के इस मौसम में आंखों में एलर्जी, आंखें सूखी होना जैसे रोग भी ज्यादा होते हैं। इससे पीड़ित होने पर दवा के साथ सावधानी बरतनी जरूरी होती है। आंख के बार-बार छूने से बीमारी बढ़ जाती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चिलचिलाती गर्मी और इसके बाद हुई बारिश से पनपी उमस से कंजक्टिवाइटिस (आईफ्लू) व आंखों में एलर्जी का प्रकोप शुरू हो गया है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में प्रतिदिन 10 से अधिक मरीज आंखों की बीमारियों का इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ भी इलाज के साथ आंखों की उचित देखभाल का परामर्श मरीजों को दे रहे हैं।
नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णा कुलदीप गुप्ता ने कहा कि बरसात के मौसम में बुखार, खांसी, जुकाम, चिकनपॉक्स व स्कैबीज जैसी बीमारियों के साथ कंजक्टिवाइटिस का संक्रमण बढ़ जाता है। वायरस और बैक्टिरिया से होने वाले कंजक्टिवाइटिस में आंखें लाल हो जाती हैं। आंखों में तेज दर्द होता है। गंदी उंगलियां आंखों से लगाने, धूल-धुएं का प्रतिकूल असर, बरसात व गंदे पानी में नहाने से यह बीमारी ज्यादा होती है। वायरस मक्खियों व हवा के माध्यम से आंखों तक पहुंचता है। संक्रमण इतना तीव्र होता है कि पीड़ित की आंखों में देखने से ही दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है। इसे सामान्य बीमारी समझना भूल है। लापरवाही बरतने से कार्निया के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है। डॉ. गुप्ता ने कहा कि गर्मी-बरसात के इस मौसम में आंखों में एलर्जी, आंखें सूखी होना जैसे रोग भी ज्यादा होते हैं। इससे पीड़ित होने पर दवा के साथ सावधानी बरतनी जरूरी होती है। आंख के बार-बार छूने से बीमारी बढ़ जाती है।
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