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Noida News: अस्तौली में 8.25 एकड़ में विकसित होगी लैंडफिल साइट
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- बायोगैस, ग्रीनकोल बनने के बाद बचे हुए कूड़े के निस्तारण के लिए बनाई जाएगी साइट
- ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण निजी कंपनी की मदद से करेगा संचालित
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। करीब छह माह में लखनावली साइट को बंद कर अस्तौली में बने प्लांट में कूड़े का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाएगा। यहां बायोगैस और ग्रीनकोल बनने के बाद बचे हुए अनुपयोगी कचरे को निस्तारित करने के लिए लैंडफिल साइट बनाई जाएगी। पूर्व में बनी लैंडफिल साइट के पुर्नरूद्धार का काम भी निजी कंपनी को करना होगा।
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक करीब 8.25 एकड़ में लैंडफिल साइट तैयार होनी है। यहां पहले भी लैंडफिल साइट बनी थी जो उपयोग में नहीं आने की वजह से पर्यावरणीय नियमों को पूरा नहीं करती है। ऐसे में नई कंपनी को इस साइट को हैंडओवर कर इसको रीट्रोफिट कराना जरूरी होगा। इस साइट में करीब 1.40 लाख घनमीटर निष्क्रिय कचरा डंप किया जा सकेगा। आकलन है कि रोजाना करीब 160 टन निष्क्रिय कूड़ा प्लांट से निकलेगा। ऐसे में इस लैंडफिल साइट से करीब 30 साल की जरूरत प्राधिकरण की पूरी होगी। साइट के भरने के बाद इसे पर्यावरण अनापत्ति में शामिल निर्देशों के मुताबिक इसे बंद कर ग्रीन एरिया में बदला जाएगा।
अधिकारियों को अगले महीने तक एजेंसी का चयन इस लैंडफिल साइट के लिए कर लिए जाने की उम्मीद है। इसके लिए इच्छुक कंपनियों को तीन जून को एक प्रजेंटेशन के लिए भी बुलाया गया है। जिससे इच्छुक और अनुभवी कंपनियों के बीच चयन की प्रक्रिया को शुरू कराया जा सके।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। करीब छह माह में लखनावली साइट को बंद कर अस्तौली में बने प्लांट में कूड़े का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाएगा। यहां बायोगैस और ग्रीनकोल बनने के बाद बचे हुए अनुपयोगी कचरे को निस्तारित करने के लिए लैंडफिल साइट बनाई जाएगी। पूर्व में बनी लैंडफिल साइट के पुर्नरूद्धार का काम भी निजी कंपनी को करना होगा।
प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक करीब 8.25 एकड़ में लैंडफिल साइट तैयार होनी है। यहां पहले भी लैंडफिल साइट बनी थी जो उपयोग में नहीं आने की वजह से पर्यावरणीय नियमों को पूरा नहीं करती है। ऐसे में नई कंपनी को इस साइट को हैंडओवर कर इसको रीट्रोफिट कराना जरूरी होगा। इस साइट में करीब 1.40 लाख घनमीटर निष्क्रिय कचरा डंप किया जा सकेगा। आकलन है कि रोजाना करीब 160 टन निष्क्रिय कूड़ा प्लांट से निकलेगा। ऐसे में इस लैंडफिल साइट से करीब 30 साल की जरूरत प्राधिकरण की पूरी होगी। साइट के भरने के बाद इसे पर्यावरण अनापत्ति में शामिल निर्देशों के मुताबिक इसे बंद कर ग्रीन एरिया में बदला जाएगा।
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अधिकारियों को अगले महीने तक एजेंसी का चयन इस लैंडफिल साइट के लिए कर लिए जाने की उम्मीद है। इसके लिए इच्छुक कंपनियों को तीन जून को एक प्रजेंटेशन के लिए भी बुलाया गया है। जिससे इच्छुक और अनुभवी कंपनियों के बीच चयन की प्रक्रिया को शुरू कराया जा सके।