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Noida News: धूल फांक रहा एमसीएच विंग, ओटी की जगह सामान्य कमरे में प्रसव
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फोटो है
सेक्टर-110 स्थित भंगेल सीएचसी में बनाया गया 50 बेड का एमसीएच विंग
सिजेरियन की स्थिति में गर्भवती को जिला अस्पताल किया जा रहा रेफर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-110 स्थित भंगेल सीएचसी में बने 50 बेड के मदर एंड चाइल्ड (एमसीएच) विंग के बेड धूल फांक रहे हैं। विंग शुरू हुए एक साल होने वाला है, लेकिन अब तक प्रसव और इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाईं हैं। अब भी यहां सिर्फ सामान्य प्रसव को ही प्राथमिकता दी जा रही है। सिजेरियन की स्थिति में गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
विंग में 8-10 बेड भूतल पर डाले गए हैं और बाकी ऊपरी तलों पर धूल फांक रहे हैं। यही नहीं, ऊपरी तल पर जाने के लिए सीढ़ियों में ताले लगे हैं। लिफ्ट भी चालू नहीं है। विंग में अबतक एसएनसीयू की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। जरूरत पड़ने पर नवजात को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
मॉड्यूलर ओटी की जगह सामान्य ओटी में प्रसव
एमसीएच विंग और भंगेल सीएचसी में मॉड्यूलर ओटी बनना था, लेकिन दोनों जगह कार्य अधूरे हैं। ऐसे में दोनों जगहों पर सामान्य कमरे में ओटी का छोटा सेटअप बनाया गया है। बहुत इमरजेंसी होने पर यहां सिजेरियन होते हैं अन्यथा गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। दोनों जगहों पर नवजात के लिए एसएनसीयू की सुविधा भी नहीं है।
एमसीएच विंग के चिकित्सा अधीक्षक व एसीएमओ डॉ. आरके सिरोहा ने बताया कि विंग शुरू है, लेकिन अब तक इसके लिए बजट जारी नहीं हुआ है। विंग के कई कार्य अधूरे हैं। अब तक प्रसव का यह रिकॉर्ड सीएचसी में ही जुड़ रहा है। संभावना है कि सीएचसी और एमसीएच विंग के बेड को जोड़कर एक ही यूनिट बना दी जाए।
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कोट
सीएचसी में भी मॉड्यूलर ओटी का काम चल रहा है। फिलहाल एक कमरे में ही ओटी का सेटअप बनाया गया है। बहुत इमरजेंसी में यहां सिजेरियन होते हैं, अन्यथा गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। -डॉ. यतेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, भंगेल सीएचसी
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सेक्टर-110 स्थित भंगेल सीएचसी में बनाया गया 50 बेड का एमसीएच विंग
सिजेरियन की स्थिति में गर्भवती को जिला अस्पताल किया जा रहा रेफर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-110 स्थित भंगेल सीएचसी में बने 50 बेड के मदर एंड चाइल्ड (एमसीएच) विंग के बेड धूल फांक रहे हैं। विंग शुरू हुए एक साल होने वाला है, लेकिन अब तक प्रसव और इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाईं हैं। अब भी यहां सिर्फ सामान्य प्रसव को ही प्राथमिकता दी जा रही है। सिजेरियन की स्थिति में गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
विंग में 8-10 बेड भूतल पर डाले गए हैं और बाकी ऊपरी तलों पर धूल फांक रहे हैं। यही नहीं, ऊपरी तल पर जाने के लिए सीढ़ियों में ताले लगे हैं। लिफ्ट भी चालू नहीं है। विंग में अबतक एसएनसीयू की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। जरूरत पड़ने पर नवजात को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
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मॉड्यूलर ओटी की जगह सामान्य ओटी में प्रसव
एमसीएच विंग और भंगेल सीएचसी में मॉड्यूलर ओटी बनना था, लेकिन दोनों जगह कार्य अधूरे हैं। ऐसे में दोनों जगहों पर सामान्य कमरे में ओटी का छोटा सेटअप बनाया गया है। बहुत इमरजेंसी होने पर यहां सिजेरियन होते हैं अन्यथा गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। दोनों जगहों पर नवजात के लिए एसएनसीयू की सुविधा भी नहीं है।
एमसीएच विंग के चिकित्सा अधीक्षक व एसीएमओ डॉ. आरके सिरोहा ने बताया कि विंग शुरू है, लेकिन अब तक इसके लिए बजट जारी नहीं हुआ है। विंग के कई कार्य अधूरे हैं। अब तक प्रसव का यह रिकॉर्ड सीएचसी में ही जुड़ रहा है। संभावना है कि सीएचसी और एमसीएच विंग के बेड को जोड़कर एक ही यूनिट बना दी जाए।
कोट
सीएचसी में भी मॉड्यूलर ओटी का काम चल रहा है। फिलहाल एक कमरे में ही ओटी का सेटअप बनाया गया है। बहुत इमरजेंसी में यहां सिजेरियन होते हैं, अन्यथा गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। -डॉ. यतेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, भंगेल सीएचसी

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