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युवराज की मौत: डूबती जिंगदी और लापरवाह सिस्टम, अफसरों पर नकेल कसने में असफल; घटना स्थल पर न पहुंचा कोई अधिकारी
योगेश तिवारी, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 20 Jan 2026 11:10 AM IST
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सार
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ बेलगाम अफसरों और इंजीनियरों पर नकेल कसने में असफल रहे। सफाई चौपट हो गई। ध्वस्त पेयजल व्यवस्था भी नहीं संभली। गंभीर आरोप सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद सेक्टर-150 के निवासियों ने लगाए हैं।
कार समेत डूब गया सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नोएडा सेक्टर-150 तालाब हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ से हटाए गए डॉ. लोकेश एम का कार्यकाल व्यक्तिगत स्तर पर शांतिप्रिय और विकास परख रहा लेकिन वह अफसरों व बड़े इंजीनियरों की लापरवाही पर लगाम लगाने में असफल रहे। वे कामकाज की मनगढ़ंत रिपोर्ट देते रहे।
आम जन की शिकायतों, समस्याओं और खतरों की आशंकाओं पर गौर नहीं किया। ऐसे ही गंभीर आरोप सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद सेक्टर-150 के निवासियों ने लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले उसी जगह पर ट्रक बेकाबू होकर नाले के अंदर घुस गया था। इसके बाद भी प्राधिकरण ने कोई इंतजाम नहीं किया।
नोएडा मेट्रो के कैलेंडर विवाद में वायरल हुई थी फोटो
डॉ लोकेश एम नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के साथ नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी भी थे। नए वर्ष 2026 पर नोएडा मेट्रो में छपवाए गए कैलेंडर पर एमडी लोकेश एम की फोटो सितार बजाते हुए व ईडी महेंद्र प्रसाद की फोटो कॉरीडोर में खड़े हुए छपवाई गई थीं। केंद्र या राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि की जगह अधिकारियों की फोटो छपने पर सवाल उठे थे।
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आम जन की शिकायतों, समस्याओं और खतरों की आशंकाओं पर गौर नहीं किया। ऐसे ही गंभीर आरोप सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद सेक्टर-150 के निवासियों ने लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले उसी जगह पर ट्रक बेकाबू होकर नाले के अंदर घुस गया था। इसके बाद भी प्राधिकरण ने कोई इंतजाम नहीं किया।
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नोएडा मेट्रो के कैलेंडर विवाद में वायरल हुई थी फोटो
डॉ लोकेश एम नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के साथ नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी भी थे। नए वर्ष 2026 पर नोएडा मेट्रो में छपवाए गए कैलेंडर पर एमडी लोकेश एम की फोटो सितार बजाते हुए व ईडी महेंद्र प्रसाद की फोटो कॉरीडोर में खड़े हुए छपवाई गई थीं। केंद्र या राज्य सरकार के किसी प्रतिनिधि की जगह अधिकारियों की फोटो छपने पर सवाल उठे थे।
बगैर मंजूरी के कैलेंडर छपवाए जाने की बात कहकर लोकेश एम ने इस पर कार्रवाई करते हुए कार्यकारी निदेशक के पद से ओएसडी महेंद्र प्रसाद को हटाया था। फिर शासन ने आईएएस महेंद्र प्रसाद को हटाकर कुछ दिन पहले ही प्रतीक्षारत किया था। अब वहीं कार्रवाई शासन स्तर से लोकेश एम पर हुई है। प्राधिकरण व मेट्रो से हटाने के साथ शासन ने कोई नई तैनाती भी नहीं दी है।
घटना स्थल पर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
प्राधिकरण के इंजीनियरिंग विभाग में दो महाप्रबंधक सिविल और ट्रैफिक सेल के प्रभारी हैं। स्पोर्ट्स सिटी के प्रभारी एक पीसीएस और एक आईएएस हैं। हादसे के बाद इनमें से कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने अब तक नहीं गया। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने भी नहीं गए। सीईओ ने जांच के निर्देश दिए तो एसीईओ स्तर से जांच के लिए एक महाप्रबंधक को बोल दिया गया। हादसे के बाद इन महाप्रबंधक का नंबर दो दिन बंद रहा। सोमवार को फोन करने वालों को आउट ऑफ स्टेशन होने का जवाब मैसेज से दिया।
प्राधिकरण के इंजीनियरिंग विभाग में दो महाप्रबंधक सिविल और ट्रैफिक सेल के प्रभारी हैं। स्पोर्ट्स सिटी के प्रभारी एक पीसीएस और एक आईएएस हैं। हादसे के बाद इनमें से कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने अब तक नहीं गया। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने भी नहीं गए। सीईओ ने जांच के निर्देश दिए तो एसीईओ स्तर से जांच के लिए एक महाप्रबंधक को बोल दिया गया। हादसे के बाद इन महाप्रबंधक का नंबर दो दिन बंद रहा। सोमवार को फोन करने वालों को आउट ऑफ स्टेशन होने का जवाब मैसेज से दिया।
2 साल 6 महीने रहा कार्यकाल, कई परियोजनाएं भी दीं
आईएएस डॉ लोकेश एम का बतौर नोएडा सीईओ कार्यकाल 2 साल 6 महीने का रहा। कानपुर कमिश्नर के पद से 19 जुलाई 2023 को उनको प्राधिकरण का सीईओ सरकार ने बनाया था। लोकेश एम ने मजूदरों के लिए निशुल्क भोजन सेक्टर-49 चौराहे पर शुरू करवाया। 4.5 किलोमीटर के भंगेल एलिवेटेड रोड का निर्माण पूरा करवाया। सेक्टर-94 में वेस्ट टू वंडर पार्क का निर्माण करवाया। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-025 में राष्ट्रपति के हाथों नोएडा को सम्मान मिला। वाटर एटीएम समेत कई काम और सीईओ ने करवाए। प्राधिकरण का बजट भी संभाल कर खर्च किया।
आईएएस डॉ लोकेश एम का बतौर नोएडा सीईओ कार्यकाल 2 साल 6 महीने का रहा। कानपुर कमिश्नर के पद से 19 जुलाई 2023 को उनको प्राधिकरण का सीईओ सरकार ने बनाया था। लोकेश एम ने मजूदरों के लिए निशुल्क भोजन सेक्टर-49 चौराहे पर शुरू करवाया। 4.5 किलोमीटर के भंगेल एलिवेटेड रोड का निर्माण पूरा करवाया। सेक्टर-94 में वेस्ट टू वंडर पार्क का निर्माण करवाया। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-025 में राष्ट्रपति के हाथों नोएडा को सम्मान मिला। वाटर एटीएम समेत कई काम और सीईओ ने करवाए। प्राधिकरण का बजट भी संभाल कर खर्च किया।
चौपट हुई सफाई व्यवस्था
जुलाई 2023 में डॉ. लोकेश एम को नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी मिली थी। तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने अपने कार्यकाल में शहर की सफाई के लिए सख्ती से काम किया था। जन स्वास्थ्य विभाग से उस सख्ती के साथ लोकेश एम काम नहीं करवा पाए। यह बात शहर के निवासी लगातार उठा रहे हैं। पानी की आपूर्ति और सीवर व्यवस्था भी नहीं संभली। दोनों विभागों के अधिकारी लगातार सब कुछ ठीक होने की रिपोर्ट सीईओ को देते रहे। सीईओ ने निरीक्षण पर निकल कर हकीकत देखी और निर्देश भी दिए। लेकिन फिर उनका क्रियान्वयन वैसे नहीं हुआ। इससे कई बार सीईओ भी असहज दिखते थे।
जुलाई 2023 में डॉ. लोकेश एम को नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी मिली थी। तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने अपने कार्यकाल में शहर की सफाई के लिए सख्ती से काम किया था। जन स्वास्थ्य विभाग से उस सख्ती के साथ लोकेश एम काम नहीं करवा पाए। यह बात शहर के निवासी लगातार उठा रहे हैं। पानी की आपूर्ति और सीवर व्यवस्था भी नहीं संभली। दोनों विभागों के अधिकारी लगातार सब कुछ ठीक होने की रिपोर्ट सीईओ को देते रहे। सीईओ ने निरीक्षण पर निकल कर हकीकत देखी और निर्देश भी दिए। लेकिन फिर उनका क्रियान्वयन वैसे नहीं हुआ। इससे कई बार सीईओ भी असहज दिखते थे।
अवैध निर्माण की तोड़फोड़ भी नहीं हुई
शहर में अवैध निर्माण व अतिक्रमण भी बड़ा मुद्दा है लेकिन प्रशासनिक नेतृत्व की प्राधिकरण में दूसरी कड़ी न मजबूत होने से सीईओ इस पर सख्ती नहीं दिखा पाए। सलारपुर खादर जैसी जगहों पर दर्जनों अवैध इमारतें बनकर खड़ी हो गईं। हनुमान मूर्ति के पास बरौला में अवैध इमारतों में शोरूम खुल गए। न तो अवैध निर्माण रुका और इन इमारतों पर तोड़फोड़ भी नहीं हुई। कार्रवाई का जिम्मा रखने वाले अधिकारी कभी लेखपाल तो कभी जूनियर इंजीनियर को हटवाकर सीईओ को जिम्मेदार बताते रहे।
शहर में अवैध निर्माण व अतिक्रमण भी बड़ा मुद्दा है लेकिन प्रशासनिक नेतृत्व की प्राधिकरण में दूसरी कड़ी न मजबूत होने से सीईओ इस पर सख्ती नहीं दिखा पाए। सलारपुर खादर जैसी जगहों पर दर्जनों अवैध इमारतें बनकर खड़ी हो गईं। हनुमान मूर्ति के पास बरौला में अवैध इमारतों में शोरूम खुल गए। न तो अवैध निर्माण रुका और इन इमारतों पर तोड़फोड़ भी नहीं हुई। कार्रवाई का जिम्मा रखने वाले अधिकारी कभी लेखपाल तो कभी जूनियर इंजीनियर को हटवाकर सीईओ को जिम्मेदार बताते रहे।