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Noida News: सहमति संबंध से शादी तक की राह संवार रहा तेरे-मेरे रिश्ते
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सेक्टर-62 स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर में काउंसलिंग कर जोड़ियों को समझाया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कई वर्षों तक एक ही छत के नीचे साथ रहने के बावजूद कई रिश्ते आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं, जहां भरोसा और भविष्य को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। जिले में सहमति संबंध के मामले बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ कई सवाल भी उपज रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि साथ रहने का फैसला करने के बावजूद जोड़े अपने रिश्ते को शादी का नाम देने से पीछे क्यों हट रहे हैं।
रिश्तों की ऐसी ही उलझन सेक्टर-62 स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर में तेरे-मेरे रिश्ते अभियान के जरिए सुलझाने की कोशिश की जा रही है। पिछले चार महीनों में ऐसे 52 मामले सेंटर में पहुंचे हैं। महिला कल्याण विभाग ने इन मामलों को केवल विवाद नहीं, बल्कि भावनात्मक उलझन के तौर पर लिया और काउंसलिंग के जरिए उन्हें रास्ता दिखाने की पहल शुरू की।
केस-1 : प्यार में बढ़ा कंट्रोल तो घुटन में बदला रिश्ता
24 वर्षीय युवती चार साल तक लिव-इन में रही। शहर नौकरी के लिए आई युवती को सहकर्मी से प्यार हो गया। शुरू में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते में दरार आने लगी। युवती का आरोप था कि साथी उसे नौकरी करने से रोकता था और विरोध करने पर प्रताड़ित करने लगा। वह शादी के लिए भी दबाव डाल रहा था, जबकि युवती रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। परेशान होकर युवती वन स्टॉप सेंटर पहुंची, जहां दोनों पक्षों को बुलाया गया। उन्हें रिश्ते में पर्सनल स्पेस और सम्मान की अहमियत समझाई गई। काउंसलिंग के बाद दोनों ने कुछ सीमाओं के साथ दोबारा साथ रहने का फैसला किया।
केस-2 : शक ने तोड़ा भरोसा, समझ ने जोड़ा रिश्ता
मार्च में एक युवती ने साथी पर बेवजह शक करने की शिकायत की। उसने बताया कि कार्यस्थल पर पहुंचकर उसका पार्टनर उसे चेक करता है, जिससे वह परेशान है और ऐसे माहौल में शादी करने को तैयार नहीं है। वहीं, युवक का कहना था कि उसे डर रहता है कि उसकी पार्टनर कहीं उसे छोड़ न दे। इस केस में दोनों की एक हफ्ते तक काउंसलिंग हुई, जिसमें भरोसा, संवाद और रिश्ते की बुनियाद पर चर्चा की गई। धीरे-धीरे दोनों ने एक-दूसरे के नजरिए को समझा और आखिरकार शादी करने का फैसला लिया।
कोट
जिम्मेदारी और भरोसे की कमी के चलते रिश्ते टूटने लगते हैं। तेरे-मेरे रिश्ते अभियान का उद्देश्य जोड़ियों को सही दिशा देना है, ताकि वे रिश्तों को समझें और जरूरत पड़ने पर शादी जैसे मजबूत बंधन के लिए प्रेरित हों। -मनोज कुमार, डीपीओ, गौतमबुद्ध नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कई वर्षों तक एक ही छत के नीचे साथ रहने के बावजूद कई रिश्ते आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं, जहां भरोसा और भविष्य को लेकर असमंजस गहराता जा रहा है। जिले में सहमति संबंध के मामले बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ कई सवाल भी उपज रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि साथ रहने का फैसला करने के बावजूद जोड़े अपने रिश्ते को शादी का नाम देने से पीछे क्यों हट रहे हैं।
रिश्तों की ऐसी ही उलझन सेक्टर-62 स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर में तेरे-मेरे रिश्ते अभियान के जरिए सुलझाने की कोशिश की जा रही है। पिछले चार महीनों में ऐसे 52 मामले सेंटर में पहुंचे हैं। महिला कल्याण विभाग ने इन मामलों को केवल विवाद नहीं, बल्कि भावनात्मक उलझन के तौर पर लिया और काउंसलिंग के जरिए उन्हें रास्ता दिखाने की पहल शुरू की।
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केस-1 : प्यार में बढ़ा कंट्रोल तो घुटन में बदला रिश्ता
24 वर्षीय युवती चार साल तक लिव-इन में रही। शहर नौकरी के लिए आई युवती को सहकर्मी से प्यार हो गया। शुरू में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते में दरार आने लगी। युवती का आरोप था कि साथी उसे नौकरी करने से रोकता था और विरोध करने पर प्रताड़ित करने लगा। वह शादी के लिए भी दबाव डाल रहा था, जबकि युवती रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। परेशान होकर युवती वन स्टॉप सेंटर पहुंची, जहां दोनों पक्षों को बुलाया गया। उन्हें रिश्ते में पर्सनल स्पेस और सम्मान की अहमियत समझाई गई। काउंसलिंग के बाद दोनों ने कुछ सीमाओं के साथ दोबारा साथ रहने का फैसला किया।
केस-2 : शक ने तोड़ा भरोसा, समझ ने जोड़ा रिश्ता
मार्च में एक युवती ने साथी पर बेवजह शक करने की शिकायत की। उसने बताया कि कार्यस्थल पर पहुंचकर उसका पार्टनर उसे चेक करता है, जिससे वह परेशान है और ऐसे माहौल में शादी करने को तैयार नहीं है। वहीं, युवक का कहना था कि उसे डर रहता है कि उसकी पार्टनर कहीं उसे छोड़ न दे। इस केस में दोनों की एक हफ्ते तक काउंसलिंग हुई, जिसमें भरोसा, संवाद और रिश्ते की बुनियाद पर चर्चा की गई। धीरे-धीरे दोनों ने एक-दूसरे के नजरिए को समझा और आखिरकार शादी करने का फैसला लिया।
कोट
जिम्मेदारी और भरोसे की कमी के चलते रिश्ते टूटने लगते हैं। तेरे-मेरे रिश्ते अभियान का उद्देश्य जोड़ियों को सही दिशा देना है, ताकि वे रिश्तों को समझें और जरूरत पड़ने पर शादी जैसे मजबूत बंधन के लिए प्रेरित हों। -मनोज कुमार, डीपीओ, गौतमबुद्ध नगर

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