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Noida News: भूमि उपयोग परिवर्तन मामले में डीडी रिसॉर्ट्स को झटका
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अदालत से
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- जिला अदालत ने स्टे याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता पर लगाया 5500 रुपये का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-43 में भूमि उपयोग परिवर्तन के मामले में डीडी रिसॉर्ट्स को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की ओर से किए गए भूमि उपयोग परिवर्तन के खिलाफ दायर स्टे याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता पर 5500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
डीडी रिसॉर्ट्स ने जिला अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एचएसवीपी ने सेक्टर-43 स्थित पार्किंग के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग संस्थागत और अस्पताल के लिए बदल दिया है। कंपनी का कहना था कि उसने अपने वाणिज्यिक परिसर ग्लोबल फोयर का निर्माण इस उम्मीद में किया था कि आसपास की जमीन पार्किंग के लिए उपलब्ध रहेगी। याचिका में एचएसवीपी अधिनियम-1977 की धारा 79 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। निचली अदालत पहले ही स्टे की मांग खारिज कर चुकी थी, जिसके बाद कंपनी ने जिला अदालत में चुनौती दी थी। एचएसवीपी और भारत हेल्थवेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अदालत में कहा गया कि डीडी रिसॉर्ट्स का भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। प्राधिकरण को जनहित और योजना आवश्यकताओं के अनुसार भूमि उपयोग बदलने का अधिकार है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डीडी रिसॉर्ट्स की याचिका खारिज कर दी। जिला सत्र एवं न्यायाधीश नरेंद्र सुरा की अदालत ने कहा कि भूमि उपयोग परिवर्तन में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
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- जिला अदालत ने स्टे याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता पर लगाया 5500 रुपये का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-43 में भूमि उपयोग परिवर्तन के मामले में डीडी रिसॉर्ट्स को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की ओर से किए गए भूमि उपयोग परिवर्तन के खिलाफ दायर स्टे याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता पर 5500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
डीडी रिसॉर्ट्स ने जिला अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एचएसवीपी ने सेक्टर-43 स्थित पार्किंग के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग संस्थागत और अस्पताल के लिए बदल दिया है। कंपनी का कहना था कि उसने अपने वाणिज्यिक परिसर ग्लोबल फोयर का निर्माण इस उम्मीद में किया था कि आसपास की जमीन पार्किंग के लिए उपलब्ध रहेगी। याचिका में एचएसवीपी अधिनियम-1977 की धारा 79 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। निचली अदालत पहले ही स्टे की मांग खारिज कर चुकी थी, जिसके बाद कंपनी ने जिला अदालत में चुनौती दी थी। एचएसवीपी और भारत हेल्थवेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अदालत में कहा गया कि डीडी रिसॉर्ट्स का भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। प्राधिकरण को जनहित और योजना आवश्यकताओं के अनुसार भूमि उपयोग बदलने का अधिकार है।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डीडी रिसॉर्ट्स की याचिका खारिज कर दी। जिला सत्र एवं न्यायाधीश नरेंद्र सुरा की अदालत ने कहा कि भूमि उपयोग परिवर्तन में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
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