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Noida News: मनमानी के आरोपों से घिरे द अरण्या सोसाइटी के आरपी निलंबित
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नील कमल अग्रवाल
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बगैर मंजूरी ट्रांसफर चार्ज बढ़ाने, 17 फ्लैटों का आवंटन निरस्त करने का है आरोप
आईबीबीआई की अनुशासन समिति ने दो साल के लिए किया निलंबित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मनमानी के आरोपों से घिरे उन्नति फॉर्च्यून बिल्डर समूह की सेक्टर-119 स्थित द अरण्या सोसाइटी के समाधान पेशेवर (आरपी) संजय गुप्ता को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) ने दो साल के लिए निलंबित कर दिया है। मार्च 2019 में परियोजना के मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का फैसला आने के बाद उन्हें अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया गया था। फिर आरपी की जिम्मेदारी मिली थी।
परियोजना के फ्लैट खरीदारों ने उनके फैसलों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए शिकायतें की थीं जिस पर बोर्ड की अनुशासन समिति ने पड़ताल के बाद यह कार्रवाई की। अब परियोजना में नए आईआरपी या आरपी की नियुक्ति होगी। सोसाइटी निवासी फ्लैट खरीदारों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
बोर्ड की तरफ से की गई सुनवाई में परियोजना में आरपी संजय गुप्ता के कई फैसले सवालों से घिरे नजर आए। खासकर ट्रांसफर चार्ज बढ़ाया जाना और 17 फ्लैटों का आवंटन निरस्त करने का फैसला प्रमुख है। ये तथ्य सामने आए कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की बिना किसी पूर्व अनुमति के घर खरीदारों पर ट्रांसफर चार्ज की दरें बढ़ाई गईं। इससे खरीदारों से कुल 3.55 करोड़ रुपये की धनराशि अतिरिक्त वसूली गई।
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आरोप है कि जब घर खरीदारों ने आवाज उठाई तो उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। फ्लैट आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई बकाया न जमा करने पर की गई थी। आईबीबीआई के अनुसार, किसी भी फ्लैट को रद्द करने जैसा बड़ा और व्यावसायिक निर्णय पूरी पारदर्शिता और सीओसी की उचित वोटिंग व मंजूरी के बाद ही लिया जाना चाहिए था लेकिन इसमें पारदर्शिता का अभाव दिखा। इसी तरह ऋणदाताओं के दावों और बकाये के सत्यापन की विफलता भी सामने आई है। एक ऋणदाता को बिल्डर समूह की दूसरी कंपनी से 3 करोड़ रुपये धनराशि दे दी गई थी। लेकिन जब कर्ज देने वाली संस्था ने अपने पूरे बकाए का दावा किया तब उसमें से दी गई धनराशि नहीं घटाई गई। इससे वोटिंग शेयर प्रभावित हुआ।
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दूसरे के प्लॉट पर बिल्डर लाया था परियोजना
द अरण्या सोसाइटी के 2,594 वर्ग मीटर का यह प्लॉट नोएडा प्राधिकरण से आईवीआरसीएल इंफ्रा एंड प्रोजेक्ट के नाम पर आवंटित हुआ था। बगैर प्लॉट अपने नाम करवाए महज करार के आधार पर उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप ने यहां परियोजना लॉन्च की थी। इस पर दो बार 8 अक्टूबर 2007 व 7 मार्च 2013 में 1155 फ्लैटों व 70 नक्शा पास करवाया गया। इनमें विला भी शामिल थे। अब मौके पर 1100 से ज्यादा फ्लैटों में परिवार रह रहे हैं। कार्रवाई के साथ ही मंगलवार को बोर्ड की तरफ से नोएडा प्राधिकरण से भी परियोजना से जुड़ी कुछ जानकारियां टीम भेजकर ली गई थीं।
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126.50 करोड़ का फंड डायवर्जन आया था सामने
16 अप्रैल 2025 को ईडी ने उन्नति फॉर्च्यून समूह से जुड़े कई ठिकानों पर छापा मारा था। जांच में द अरण्या सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों के 2011 से 2019 के बीच 126.50 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन सामने आया था। प्रमोटर अनिल मिठास को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। सितंबर 2025 में ही ईडी ने फंड डायवर्जन पर कार्रवाई करते हुए बिल्डर समूह की 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं।
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आरपी सोसाइटी में समय पर रिज्यॉल्यूशन नहीं दे रहे थे। फ्लैट के ट्रांसफर चार्ज के मामले में पारदर्शिता नहीं थी। -दीपक दीक्षित
आरपी ने अवैध रूप से कई फ्लैट के ट्रांसफर चार्ज लिए थे। बिना सीओसी अप्रूवल के अधिक फीस ली जा रही थी। -राजकुमार
जिनके फ्लैट नहीं बने थे उनके फ्लैट सस्ते दामों में खरीदकर ठेकेदार के साथ मिलकर महंगे दामों में बेचे गए हैं। -नील कमल अग्रवाल
एक साल में रिज्यॉल्यूशन करवाना था लेकिन छह साल में नहीं कर पाए। इनकी फीस भी बहुत अधिक थी। -सुमित शर्मा
आरपी ने फ्लैट खरीदारों का वोटिंग परसेंटेज कम कर दिया था। फॉरेंसिक ऑडिट आजतक नहीं हुआ है। -रमीज जावेद
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अन्य सोसाइटियों से उठ रही आवाज
कई बिल्डर कंपनियां दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इनकी परियोजनाएं खासकर सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों के हित सुरक्षित करने को आईआरपी व आरपी की नियुक्ति है। समाधान पेशेवर परियोजना में बिल्डर कंपनी का संचालन अपने नियंत्रण में लेता है। इसके साथ ही ऋणदाताओं के बकाये की गणना, परियोजना के कामों को आगे बढ़ाना व रीदारों के हित सुरक्षित रखना मुख्य जिम्मेदारी होती है। कई सोसाइटियों में खरीदार आईआरपी व आरपी के फैसलों को मनमाना बताकर आवाज उठा रहे हैं। आईबीबीआई ने यहां पहली बार इस तरह की कार्रवाई की है।
आईबीबीआई की अनुशासन समिति ने दो साल के लिए किया निलंबित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मनमानी के आरोपों से घिरे उन्नति फॉर्च्यून बिल्डर समूह की सेक्टर-119 स्थित द अरण्या सोसाइटी के समाधान पेशेवर (आरपी) संजय गुप्ता को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) ने दो साल के लिए निलंबित कर दिया है। मार्च 2019 में परियोजना के मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का फैसला आने के बाद उन्हें अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया गया था। फिर आरपी की जिम्मेदारी मिली थी।
परियोजना के फ्लैट खरीदारों ने उनके फैसलों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए शिकायतें की थीं जिस पर बोर्ड की अनुशासन समिति ने पड़ताल के बाद यह कार्रवाई की। अब परियोजना में नए आईआरपी या आरपी की नियुक्ति होगी। सोसाइटी निवासी फ्लैट खरीदारों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
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बोर्ड की तरफ से की गई सुनवाई में परियोजना में आरपी संजय गुप्ता के कई फैसले सवालों से घिरे नजर आए। खासकर ट्रांसफर चार्ज बढ़ाया जाना और 17 फ्लैटों का आवंटन निरस्त करने का फैसला प्रमुख है। ये तथ्य सामने आए कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की बिना किसी पूर्व अनुमति के घर खरीदारों पर ट्रांसफर चार्ज की दरें बढ़ाई गईं। इससे खरीदारों से कुल 3.55 करोड़ रुपये की धनराशि अतिरिक्त वसूली गई।
आरोप है कि जब घर खरीदारों ने आवाज उठाई तो उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। फ्लैट आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई बकाया न जमा करने पर की गई थी। आईबीबीआई के अनुसार, किसी भी फ्लैट को रद्द करने जैसा बड़ा और व्यावसायिक निर्णय पूरी पारदर्शिता और सीओसी की उचित वोटिंग व मंजूरी के बाद ही लिया जाना चाहिए था लेकिन इसमें पारदर्शिता का अभाव दिखा। इसी तरह ऋणदाताओं के दावों और बकाये के सत्यापन की विफलता भी सामने आई है। एक ऋणदाता को बिल्डर समूह की दूसरी कंपनी से 3 करोड़ रुपये धनराशि दे दी गई थी। लेकिन जब कर्ज देने वाली संस्था ने अपने पूरे बकाए का दावा किया तब उसमें से दी गई धनराशि नहीं घटाई गई। इससे वोटिंग शेयर प्रभावित हुआ।
दूसरे के प्लॉट पर बिल्डर लाया था परियोजना
द अरण्या सोसाइटी के 2,594 वर्ग मीटर का यह प्लॉट नोएडा प्राधिकरण से आईवीआरसीएल इंफ्रा एंड प्रोजेक्ट के नाम पर आवंटित हुआ था। बगैर प्लॉट अपने नाम करवाए महज करार के आधार पर उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप ने यहां परियोजना लॉन्च की थी। इस पर दो बार 8 अक्टूबर 2007 व 7 मार्च 2013 में 1155 फ्लैटों व 70 नक्शा पास करवाया गया। इनमें विला भी शामिल थे। अब मौके पर 1100 से ज्यादा फ्लैटों में परिवार रह रहे हैं। कार्रवाई के साथ ही मंगलवार को बोर्ड की तरफ से नोएडा प्राधिकरण से भी परियोजना से जुड़ी कुछ जानकारियां टीम भेजकर ली गई थीं।
126.50 करोड़ का फंड डायवर्जन आया था सामने
16 अप्रैल 2025 को ईडी ने उन्नति फॉर्च्यून समूह से जुड़े कई ठिकानों पर छापा मारा था। जांच में द अरण्या सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों के 2011 से 2019 के बीच 126.50 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन सामने आया था। प्रमोटर अनिल मिठास को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। सितंबर 2025 में ही ईडी ने फंड डायवर्जन पर कार्रवाई करते हुए बिल्डर समूह की 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं।
आरपी सोसाइटी में समय पर रिज्यॉल्यूशन नहीं दे रहे थे। फ्लैट के ट्रांसफर चार्ज के मामले में पारदर्शिता नहीं थी। -दीपक दीक्षित
आरपी ने अवैध रूप से कई फ्लैट के ट्रांसफर चार्ज लिए थे। बिना सीओसी अप्रूवल के अधिक फीस ली जा रही थी। -राजकुमार
जिनके फ्लैट नहीं बने थे उनके फ्लैट सस्ते दामों में खरीदकर ठेकेदार के साथ मिलकर महंगे दामों में बेचे गए हैं। -नील कमल अग्रवाल
एक साल में रिज्यॉल्यूशन करवाना था लेकिन छह साल में नहीं कर पाए। इनकी फीस भी बहुत अधिक थी। -सुमित शर्मा
आरपी ने फ्लैट खरीदारों का वोटिंग परसेंटेज कम कर दिया था। फॉरेंसिक ऑडिट आजतक नहीं हुआ है। -रमीज जावेद
अन्य सोसाइटियों से उठ रही आवाज
कई बिल्डर कंपनियां दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इनकी परियोजनाएं खासकर सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों के हित सुरक्षित करने को आईआरपी व आरपी की नियुक्ति है। समाधान पेशेवर परियोजना में बिल्डर कंपनी का संचालन अपने नियंत्रण में लेता है। इसके साथ ही ऋणदाताओं के बकाये की गणना, परियोजना के कामों को आगे बढ़ाना व रीदारों के हित सुरक्षित रखना मुख्य जिम्मेदारी होती है। कई सोसाइटियों में खरीदार आईआरपी व आरपी के फैसलों को मनमाना बताकर आवाज उठा रहे हैं। आईबीबीआई ने यहां पहली बार इस तरह की कार्रवाई की है।

नील कमल अग्रवाल

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