शुभांशु शुक्ला बोले: अंतरिक्ष तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं; छात्राओं से साझा किए रोमांचक अनुभव
जीबीयू में मिशन शक्तिसैट के स्पेसवॉक कार्यक्रम में 108 देशों की छात्राओं ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से संवाद किया। इसका लक्ष्य बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान का व्यावहारिक अनुभव देना है।
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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) शनिवार को मिशन शक्तिसैट के तहत आयोजित स्पेसवॉक कार्यक्रम में छात्राओं को अंतरिक्ष की दुनिया को करीब से समझने का मौका मिला। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से 108 देशों की छात्राओं ने संवाद किया। उन्होंने अंतरिक्ष से पृथ्वी के लिए गए वीडियो और तस्वीरें प्रदर्शित की। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष तक पहुंचने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आत्मविश्वास, अनुशासन, टीमवर्क, समस्या-समाधान की क्षमता और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ने का जज्बा जरूरी है।
उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान अब केवल वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा अपनी कल्पनाशक्ति, नवाचार और तकनीकी क्षमता के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के साथ 108 देशों की छात्राओं की भागीदारी मिशन के वैश्विक स्वरूप को दर्शाती है।
अंतरिक्ष शिक्षा के माध्यम से बेटियों को सशक्त बनाना लक्ष्य
स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. श्रीमथी केसन ने कहा कि मिशन शक्तिसैट का उद्देश्य दुनिया की बेटियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे केवल अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में जानकारी हासिल न करें, बल्कि सैटेलाइट निर्माण, पेलोड डेवलपमेंट, सिस्टम इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष मिशन की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों की छात्राओं को एक मंच पर लाकर विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को अवसर देना मिशन शक्तिसैट की बड़ी उपलब्धि है।
सेशेल्स की प्रथम महिला ने बढ़ाया हौसला
सेशेल्स की प्रथम महिला श्रीमती वेरोनिक हर्मिनी ने युवा प्रतिभागियों से संवाद करते हुए अंतरिक्ष विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इन स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने विद्यार्थियों को भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष क्षेत्र, उपलब्ध अवसरों और देश में तैयार हो रहे नए स्पेस इकोसिस्टम की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।