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Delhi Zoo में रौनक: आएंगे 109 नई प्रजातियां और 2943 जानवर, 30 साल बाद माउस डियर की एंट्री; 3.78 करोड़ खर्च

Tue, 04 Aug 2026 05:37 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 04 Aug 2026 05:37 PM IST
सार

Delhi Zoo News: दिल्ली के चिड़ियाघर में जल्द ही 109 नई प्रजातियों और 2,943 जानवरों को शामिल करने की तैयारी है। यह योजना केंद्र सरकार की 3.78 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा है। इसके लागू होने के बाद चिड़ियाघर में कुल 201 प्रजातियों के वन्यजीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होंगे।

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Preparations underway to add 109 new species and 2943 animals to the Delhi Zoo
दिल्ली चिड़ियाघर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) जल्द ही एक नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। पिछले कुछ साल में घटती वन्यजीव प्रजातियों और जानवरों की संख्या की भरपाई के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने 109 नई प्रजातियों और 2,943 जानवरों को शामिल करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। 

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201 प्रजातियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र
इसके लागू होने के बाद चिड़ियाघर में कुल 201 प्रजातियों के वन्यजीव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। केंद्र सरकार की 3.78 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण परियोजना के तहत तैयार इस योजना में चीता, न्यू वर्ल्ड मंकी, माउस डियर और रंग-बिरंगी तितलियों जैसी कई दुर्लभ प्रजातियों को शामिल किया जाएगा। इनमें माउस डियर की वापसी विशेष आकर्षण होगी, क्योंकि यह लगभग 30 वर्षों बाद दिल्ली चिड़ियाघर में फिर दिखाई देगा।

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चिड़ियाघर प्रबंधन के अनुसार, अधिकांश जानवरों को देश के विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ आदान-प्रदान (एक्सचेंज) कार्यक्रम के माध्यम से लाया जाएगा। इसके लिए संभावित साझेदार चिड़ियाघरों की सूची भी तैयार कर ली गई है। योजना में स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, कीट-पतंगे और अन्य वन्यजीव शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी अभी चिड़ियाघर में नहीं है या बेहद सीमित है। 

तीन साल में चिड़ियाघर में वन्यजीवों 
दरअसल, बीते तीन साल में चिड़ियाघर में वन्यजीवों की प्रजातियां 99 से घटकर 92 रह गई हैं, जबकि कुल जानवरों की संख्या भी घटकर 1,255 तक पहुंच गई है। कई लोकप्रिय प्रजातियां अब यहां नहीं हैं। वर्ष 2019 में आखिरी चिंपांजी की मौत के बाद यह प्रजाति पूरी तरह समाप्त हो गई, जबकि 2014 से जिराफ और 2013 से जेबरा भी चिड़ियाघर का हिस्सा नहीं हैं। अफ्रीकी हाथियों की अनुपस्थिति भी लंबे समय से महसूस की जा रही है।

कई जानवरों की मौत ने भी चिड़ियाघर प्रबंधन पर सवाल किए खड़े
हाल के महीनों में कई जानवरों की मौत ने भी चिड़ियाघर प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। पिछले महीने एक सिवेट और चिंकारा हिरण की मौत हुई, जबकि इस वर्ष एक नीलगाय, सियार और लुप्तप्राय संगाई हिरण ने भी दम तोड़ दिया। दिसंबर 2025 में बाड़े से भागे एक सियार की पकड़ने के दौरान मौत और उसके शव के निपटान को लेकर भी विवाद सामने आया था। वहीं, सफेद बाघिन 'दुर्गा' को पटना चिड़ियाघर भेजने की तैयारी के दौरान फ्रैक्चर होने की घटना भी चर्चा में रही।
 
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नई प्रजातियों के आने से बढ़ेगी जैव-विविधता
इन चुनौतियों के बीच चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि नई प्रजातियों के आने से न केवल जैव-विविधता बढ़ेगी, बल्कि संरक्षण, प्रजनन और पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। इसी दिशा में कृत्रिम इनक्यूबेशन तकनीक का उपयोग करते हुए चिड़ियाघर ने हाल ही में सात साल बाद पहली बार रैट स्नेक (धामन सांप) का सफल प्रजनन भी कराया है। नई योजना के साकार होने के बाद चिड़ियाघर एक बार फिर दुर्लभ वन्यजीवों का बड़ा केंद्र बनने के साथ-साथ पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए पहले से अधिक आकर्षक और समृद्ध अनुभव प्रदान करेगा।
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