{"_id":"6a870563aa152f20150d3d73","slug":"restricting-childrens-use-of-social-media-is-a-policy-decision-the-government-will-decide-delhi-high-court-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-151468-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना नीतिगत फैसला, सरकार तय करेगी : दिल्ली हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना नीतिगत फैसला, सरकार तय करेगी : दिल्ली हाईकोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध या पाबंदी लगाना नीतिगत मामला है, जिसे सरकार को तय करना चाहिए। अदालत ने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (सीएसएएम) पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर ये बातें कहीं। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी। याचिकाकर्ताओं के सुझावों को ध्यान में रखते हुए और सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा करने के बाद उचित फैसला लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट कहा, ये सब नीति के दायरे में हैं। वे इस पर विचार करेंगे आपके (याचिकाकर्ताओं के) विचार सरकार द्वारा ध्यान में रखे जाएंगे। यह नीति का क्षेत्र है, अदालत का काम नहीं कि वह निर्देश दे कि यह बैन करो या वह बैन करो। उन्हें देखने दें और फिर आदेश पारित करें। अदालत ने सरकार को कोई समयसीमा भी तय नहीं की।
विज्ञापन
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध या पाबंदी लगाना नीतिगत मामला है, जिसे सरकार को तय करना चाहिए। अदालत ने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने और चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (सीएसएएम) पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर ये बातें कहीं। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी। याचिकाकर्ताओं के सुझावों को ध्यान में रखते हुए और सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा करने के बाद उचित फैसला लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट कहा, ये सब नीति के दायरे में हैं। वे इस पर विचार करेंगे आपके (याचिकाकर्ताओं के) विचार सरकार द्वारा ध्यान में रखे जाएंगे। यह नीति का क्षेत्र है, अदालत का काम नहीं कि वह निर्देश दे कि यह बैन करो या वह बैन करो। उन्हें देखने दें और फिर आदेश पारित करें। अदालत ने सरकार को कोई समयसीमा भी तय नहीं की।