{"_id":"6a921ad4fe032bb3c8088065","slug":"saket-court-s-verdict-relative-will-vacate-the-house-after-10-years-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"साकेत कोर्ट का फैसला: आखिरकार 10 साल बाद रिश्तेदार खाली करेगा मकान, 50 हजार रुपये प्रतिमाह भी देने होंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साकेत कोर्ट का फैसला: आखिरकार 10 साल बाद रिश्तेदार खाली करेगा मकान, 50 हजार रुपये प्रतिमाह भी देने होंगे
Sat, 29 Aug 2026 05:03 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sat, 29 Aug 2026 05:03 AM IST
सार
अदालत ने 50 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उपयोग और कब्जे का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अगस्त 2027 से यह राशि 10 प्रतिशत बढ़कर 55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगी। मुकदमे का खर्च भी प्रतिवादी को देना होगा।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रिश्तेदारी में छह महीने के लिए मुफ्त में अपने मकान में रहने की अनुमति देना एक महिला को भारी पड़ गया। व्यक्ति ने मकान खाली नहीं किया और मामला 10 साल तक अदालत में चलता रहा। अब साकेत कोर्ट ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को लाजपत नगर स्थित मकान खाली कर करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
साथ ही, उसे मुकदमा दायर होने की तारीख से मकान खाली करने तक 50 हजार रुपये प्रतिमाह देने होंगे। मामला बचन अरोड़ा और उनके रिश्तेदार सूरज प्रकाश के बीच लाजपत नगर स्थित मकान को लेकर था। बचन के अनुसार, उन्होंने 2007 में रिश्तेदारी के कारण सूरज प्रकाश ने छह महीने के लिए मकान में मुफ्त रहने की अनुमति मांगी थी। समय पूरा होने के बाद उसने आर्थिक तंगी बताकर और समय मांगा।
विज्ञापन
आरोप है कि वह लगातार मकान खाली करने में टालमटोल करता रहा। वहीं, सूरज प्रकाश ने खुद को संपत्ति का मालिक बताया। उसने दावा किया कि वह 2005 से मकान में रह रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेज और गवाही पर विचार के बाद प्रतिवादी के दावों में कई विरोधाभास पाए और महिला के पक्ष को अधिक भरोसेमंद माना।
विज्ञापन
कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी को 2007 में महिला ने मुफ्त लाइसेंसधारी के रूप में रहने की अनुमति दी थी। अदालत ने 50 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उपयोग और कब्जे का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अगस्त 2027 से यह राशि 10 प्रतिशत बढ़कर 55 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगी। मुकदमे का खर्च भी प्रतिवादी को देना होगा।