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Delhi NCR News: सावन 30 से, चार सोमवार पर रहेगा विशेष धार्मिक महत्व
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संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। भगवान शिव की आराधना का पवित्र सावन मास इस साल 30 जुलाई से शुरू होगा। इस बार चार सोमवार पड़ेंगे, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रहेगा। पहले सोमवार से लेकर अंतिम सोमवार तक शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जलाभिषेक के आयोजन होंगे। सावन का पहला सोमवार 4 अगस्त को है, जिसे भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद दूसरा सोमवार 11 अगस्त को होगा। इस दिन प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ेगा और इसी दिन नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा।
शिव पूजा के बारे में धार्मिक विद्वान बलबीर शर्मा ने बताया कि सावन मास में भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे महीने व्रत रखकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
इस बार 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और पौधारोपण का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे लेकिन भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु विशेष रूप से सोमवार के दिन उपवास रखकर शिव परिवार की पूजा करेंगे और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।
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हथीन। भगवान शिव की आराधना का पवित्र सावन मास इस साल 30 जुलाई से शुरू होगा। इस बार चार सोमवार पड़ेंगे, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रहेगा। पहले सोमवार से लेकर अंतिम सोमवार तक शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जलाभिषेक के आयोजन होंगे। सावन का पहला सोमवार 4 अगस्त को है, जिसे भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद दूसरा सोमवार 11 अगस्त को होगा। इस दिन प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ेगा और इसी दिन नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा।
शिव पूजा के बारे में धार्मिक विद्वान बलबीर शर्मा ने बताया कि सावन मास में भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे महीने व्रत रखकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
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इस बार 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और पौधारोपण का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे लेकिन भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु विशेष रूप से सोमवार के दिन उपवास रखकर शिव परिवार की पूजा करेंगे और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।
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