TERI-CPCB Report: दिल्ली-एनसीआर की जल गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, अधिकांश इलाकों में 8 से 20 मीटर तक गिरा भूजल
आंकड़ों के मुताबिक, यमुना नदी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा गंभीर रूप से प्रदूषित है, जबकि एनसीआर के कई इलाकों में भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड और ई-कॉली बैक्टीरिया का स्तर मानक से कई गुना अधिक पाया गया है।
विस्तार
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की जल गुणवत्ता को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। आंकड़ों के मुताबिक, यमुना नदी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा गंभीर रूप से प्रदूषित है, जबकि एनसीआर के कई इलाकों में भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड और ई-कॉली बैक्टीरिया का स्तर मानक से कई गुना अधिक पाया गया है।
टेरी की अर्बन वाटर सस्टेनेबिलिटी इन दिल्ली-एनसीआर 2025 और सीपीसीबी की स्टेटस ऑफ वाटर क्वालिटी इन इंडिया 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की कुल जल मांग 1,300 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) है, जबकि आपूर्ति औसतन 950 एमजीडी ही हो रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे गुरुग्राम, फरीदाबाद व गाजियाबाद जैसे शहरों में जलस्तर हर साल औसतन 1.1 से 1.5 मीटर गिर रहा है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के दीर्घकालिक आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश हिस्सों में भूजल स्तर औसतन 8 से 12 मीटर गिरा है, जबकि गुरुग्राम, फरीदाबाद, द्वारका और गाजियाबाद के कुछ इलाकों में यह गिरावट 15 से 20 मीटर तक रही है। यमुना के पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) औसतन 20 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो स्वच्छ जल के मानक 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से छह गुना अधिक है।
सीपीसीबी के मॉनिटरिंग स्टेशन वजीराबाद से ओखला के बीच नदी का पानी क्लास-ई श्रेणी में है जो केवल औद्योगिक कूलिंग और नौवहन के लिए उपयुक्त माना जाता है। भूजल गुणवत्ता की जांच में एनसीआर के 42% नमूनों में नाइट्रेट का स्तर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से अधिक था, जबकि दक्षिण दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद के कई इलाकों में फ्लोराइड की मात्रा 2 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर पाई गई, जो लंबे समय तक सेवन करने पर हड्डियों व दांतों को नुकसान पहुंचाती है।
खेती, रियल एस्टेट में अति-दोहन
हरियाणा और यूपी के एनसीआर हिस्सों में खेती और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े पैमाने पर बोरवेल इस्तेमाल हो रहे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की ग्राउंडवाटर ईयर बुक 2024 और टेरी की अर्बन वॉटर सस्टेनेबिलिटी इन दिल्ली एनसीआर रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में कुल वार्षिक उपलब्ध भूजल संसाधन लगभग 2.9 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है, जबकि वास्तविक वार्षिक निकासी 3.4 बीसीएम से अधिक हो चुकी है। इसका मतलब है कि क्षेत्र में 118% का ओवर एक्सप्लॉइटेशन हो रहा है।
- दिल्ली के कई हिस्सों जैसे दक्षिण दिल्ली, द्वारका और नरेला में यह अनुपात 150% से भी ऊपर है, जबकि गुरुग्राम और फरीदाबाद में यह 170% तक पहुंच गया है। सीजीडब्ल्यूबी के आंकड़ों के मुताबिक एनसीआर के शहरी क्षेत्रों में घरेलू जलापूर्ति की लगभग 55% जरूरत भूजल से पूरी होती है, जबकि औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयां भी बड़े पैमाने पर निजी बोरवेल पर निर्भर हैं।
- इस अत्यधिक दोहन के चलते गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में जलस्तर हर साल औसतन 1.1 से 1.5 मीटर गिर रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो अगले दशक में एनसीआर के कई इलाकों में भूजल गंभीर संकट (क्रिटिकल जोन) की श्रेणी में आ जाएगा।
सुझाए गए समाधान
- वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना व निगरानी प्रणाली लागू करना
- सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए जीरो लिक्विड डिसचार्ज नीति लागू करना
- यमुना के 22 नालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना
- भूजल पुनर्भरण के लिए कृत्रिम झीलों और रिचार्ज वेल का निर्माण
स्वास्थ्य व पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जल गुणवत्ता में लगातार गिरावट से दिल्ली-एनसीआर में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों, किडनी रोग और फ्लोरोसिस के मामले बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं।
किश्तवाड़ में चार जगह बादल फटे, 52 की मौत, 120 लोग घायल, 200 लापता
उत्तराखंड के धराली में प्रकृति के प्रकोप से लोग अभी उबरे भी नहीं थे कि अब जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भयानक तबाही मच गई है। किश्तवाड़ के चिशोती कस्बे में बृहस्पतिवार को चार जगह बादल फटने से कम से कम 52 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकतर मचैल माता के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु हैं। सीआईएसएफ के दो जवान भी बलिदान हुए हैं। 120 से ज्यादा घायल हैं। कई लोग मलबे में दबे हैं, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है। करीब 200 लोग लापता हैं। यह तबाही धराली हादसे के नौ दिन बाद हुई है।
सेना, वायुसेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। अब तक 167 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 38 की हालत गंभीर है। मौसम खराब होने से बचाव कार्य में बाधा आ रही है। र
update----
दिल्ली-एनसीआर में जल गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, खिसक रहा भूजल
अमर उजाला नेटवर्क
नई दिल्ली। द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की जल गुणवत्ता को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। आंकड़ों के मुताबिक, यमुना नदी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा गंभीर रूप से प्रदूषित है, जबकि एनसीआर के कई इलाकों में भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड और ई-कॉली बैक्टीरिया का स्तर मानक से कई गुना अधिक पाया गया है।
टेरी की अर्बन वाटर सस्टेनेबिलिटी इन दिल्ली-एनसीआर 2025 और सीपीसीबी की स्टेटस ऑफ वाटर क्वालिटी इन इंडिया 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की कुल जल मांग 1,300 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) है, जबकि आपूर्ति औसतन 950 एमजीडी ही हो रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए भूजल पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे गुरुग्राम, फरीदाबाद व गाजियाबाद जैसे शहरों में जलस्तर हर साल औसतन 1.1 से 1.5 मीटर गिर रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के दीर्घकालिक आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश हिस्सों में भूजल स्तर औसतन 8 से 12 मीटर गिरा है, जबकि गुरुग्राम, फरीदाबाद, द्वारका और गाजियाबाद के कुछ इलाकों में यह गिरावट 15 से 20 मीटर तक रही है। यमुना के पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) औसतन 20 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो स्वच्छ जल के मानक 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से छह गुना अधिक है। सीपीसीबी के मॉनिटरिंग स्टेशन वजीराबाद से ओखला के बीच नदी का पानी क्लास-ई श्रेणी में है जो केवल औद्योगिक कूलिंग और नौवहन के लिए उपयुक्त माना जाता है। भूजल गुणवत्ता की जांच में एनसीआर के 42% नमूनों में नाइट्रेट का स्तर 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा से अधिक था, जबकि दक्षिण दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद के कई इलाकों में फ्लोराइड की मात्रा 2 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर पाई गई, जो लंबे समय तक सेवन करने पर हड्डियों व दांतों को नुकसान पहुंचाती है।
खेती, रियल एस्टेट में अति-दोहन
हरियाणा और यूपी के एनसीआर हिस्सों में खेती और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े पैमाने पर बोरवेल इस्तेमाल हो रहे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की ग्राउंडवाटर ईयर बुक 2024 और टेरी की अर्बन वॉटर सस्टेनेबिलिटी इन दिल्ली एनसीआर रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में कुल वार्षिक उपलब्ध भूजल संसाधन लगभग 2.9 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है, जबकि वास्तविक वार्षिक निकासी 3.4 बीसीएम से अधिक हो चुकी है। इसका मतलब है कि क्षेत्र में 118% का ओवर एक्सप्लॉइटेशन हो रहा है।
nदिल्ली के कई हिस्सों जैसे दक्षिण दिल्ली, द्वारका और नरेला में यह अनुपात 150% से भी ऊपर है, जबकि गुरुग्राम और फरीदाबाद में यह 170% तक पहुंच गया है। सीजीडब्ल्यूबी के आंकड़ों के मुताबिक एनसीआर के शहरी क्षेत्रों में घरेलू जलापूर्ति की लगभग 55% जरूरत भूजल से पूरी होती है, जबकि औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयां भी बड़े पैमाने पर निजी बोरवेल पर निर्भर हैं।
nइस अत्यधिक दोहन के चलते गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में जलस्तर हर साल औसतन 1.1 से 1.5 मीटर गिर रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो अगले दशक में एनसीआर के कई इलाकों में भूजल गंभीर संकट (क्रिटिकल जोन) की श्रेणी में आ जाएगा।
सुझाए गए समाधान
वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना व निगरानी प्रणाली लागू करना।
सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए जीरो लिक्विड डिसचार्ज नीति लागू करना।
यमुना के 22 नालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना।
भूजल पुनर्भरण के लिए कृत्रिम झीलों और रिचार्ज वेल का निर्माण।
स्वास्थ्य व पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जल गुणवत्ता में लगातार गिरावट से दिल्ली-एनसीआर में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों, किडनी रोग और फ्लोरोसिस के मामले बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं।
---------------0000000
धमाका हुआ और हर तरफ मच गया कोहराम
चिशोती गांव में बादल फटने से मची तबाही के प्रत्यक्ष गवाह 15 वर्षीय अनिल मेहरा ने सुनाया हादसे का मंजर
राजेश चंदर
किश्तवाड़। किश्तवाड़ के चिशोती गांव में तबाही के मंजर के प्रत्यक्ष गवाह 15 वर्षीय अनिल मेहरा ने आंखों देखा जो हाल बताया, वह रूह कंपा देने वाला है। अनिल जम्मू आईडीपीएस में नवीं के छात्र हैं। वे अपने माता-पिता और बहन के साथ मचैल माता का दर्शन करने गए थे। उनका परिवार दर्शन के बाद जैसे ही नीचे लौटा यह हादसा हो गया।
अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में अनिल बताते हैं, हम लोग दर्शन करके बहुत खुश थे। मैं अपने परिवार से काफी आगे चल रहा था। पापा बोधराज मेहरा चिशोती गांव की पार्किंग से कार निकालने लगे। मां और बहन भी उनसे कुछ ही पीछे आ रहे थे।
इसी बीच बहुत तेज धमाका हुआ। लगा जैसे पहाड़ का ही कोई हिस्सा टूट गया हो। हम लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही भारी पत्थरों को बहाता पानी का रेला आ गया। पार्किंग की कई गाड़ियां देखते-देखते मलबे में दब गईं। मेरी बहन गाड़ी के नीचे आ गई। मां पर भारी मलबा आ गिरा और वह उसके नीचे दब गईं। पापा और वहां मौजूद कुछ लोगों की मदद से मां शालू मेहरा को निकाला गया। बहन को भी कई लोगों ने मिलकर निकाला। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मां की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जम्मू के अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।
बकौल अनिल, यह सारी घटना पलक झपकते हो गई। जिस जगह पर उत्सव जैसा माहौल था,वह जगह मलबे के पहाड़ में तब्दील हो गई। हर तरफ चीख-पुकार और बचाओ -बचाओ की आवाज सुनाई पड़ रही थी। मेरे पापा भी लोगों को बचाने में लगे थे। बमुश्किल दो-तीन मिनट में वहां का सारा नजारा ही बदल गया। मैं समझ नहीं पा रहा था कि आखिर यह क्या और कैसे हो गया। लोग कह रहे थे बादल फट गया है। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बादल फट सकता है। मलबे में दब कर कई लोग दम तोड़ चुके थे। भगवान का शुक्र है कि मम्मा और दीदी बच गई हैं। अनिल बताते हैं, हम लोग अगर दर्शन करके नीचे न लौट आए होते तो हममें से शायद कोई नहीं बच पाता। ऐसा भयावह दृश्य हमने कभी नहीं देखा था।
-----000000
भूस्खलन या ग्लेशियर के मलबे से भी हादसा संभव
जम्मू (प्रवेश कुमारी)। आखिर वैज्ञानिकों की आशंका सच साबित हुई। वे लगातार जम्मू-कश्मीर में भी उत्तराखंड जैसी तबाही की आशंका जता रहे थे। बेशक इसे बादल फटने का नतीजा बताया जा रहा है, पर कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार चिशोती नाले में टूटकर गिरा ग्लेशियर का मलबा या भूस्खलन हादसे की वजह हो सकते हैं।
n वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के पूर्व ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. डीपी डोभाल के अनुसार, अभी तक जो तस्वीर सामने आई है, उससे नाले में लैंडस्लाइड होने की आशंका है। हो सकता है कि इसकी वजह से नाला चोक हो गया हो और लगातार बारिश से उसमें फ्लैश फ्लड आ गया।
n एक आशंका यह भी है कि ग्लेशियर से मलबा टूटकर नाले में गिरा हो। लगातार बारिश से ग्लेशियर पिघलते हैं। ऐसे में तेज ढलान पर वेग इतना होता है कि वह सब कुछ बहा ले जाता है। यह भी हादसे की वजह हो सकती है। डोभाल के अनुसार अभी ये सब प्रारंभिक आकलन हैं। जांच के बाद ही असल वजह सामने आ सकेगी।
n जम्मू विश्वविद्यालय के सुदूर संवेदन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया के अनुसार बड़ी तबाही इसलिए हुई, क्योंकि चिशोती में बसावट नाले के एकदम करीब थी। पानी अपने साथ सबको बहा ले गया।
-------00000000
पहाड़ों पर इतने ज्यादा क्यों फटते हैं बादल
क्या किया जा सकता है
उत्तरकाशी, हिमाचल प्रदेश और अब जम्मू-कश्मीर...विशेषज्ञों के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं में एक दशक के भीतर तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक, अब उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों में डेढ़ गुना से ज्यादा बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। ज्यादातर घटनाएं मानसून की बारिश के दौरान ही होती हैं। जानते हैं, बादल कैसे, कब और क्यों फटते हैं...
बादल का फटना
बादल का फटना या क्लाउडबर्स्ट यानी बहुत कम समय में सीमित दायरे में अचानक बहुत भारी बारिश होना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगर किसी क्षेत्र में 20-30 वर्ग किमी दायरे में एक घंटे में 100 मिलीमीटर बारिश होती है, तो उसे बादल का फटना कहा जाता है। इससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं होती हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन में प्रकाशित शोध बताता है कि ऊपरी गंगा बेसिन में अत्यधिक वर्षा के कारण अचानक बाढ़, भूस्खलन और जन-धन की हानि सामान्य होती जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में मानसून के महीनों जुलाई-अगस्त के दौरान ऐसी घटनाएं सर्वाधिक होती हैं। आंकड़ों के अनुसार 66.6 प्रतिशत बादल फटने की घटनाएं समुद्र तल से 1000-2000 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में होती हैं, जो आबादी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं।
तापमान में वृद्धि से बढ़ रहीं बादल फटने की घटनाएं
पोलर साइंस पत्रिका में प्रकाशित नवीनतम शोध के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हिमालयी क्षेत्र में नमी और संवहन यानी कन्वेक्शन (ऊष्मा से ऊपरी वायुमंडल में उठने वाली हवा) की प्रक्रिया तेज हो गई है। गर्म हवाएं जब समुद्र से भारी मात्रा में नमी लेकर हिमालय की तलहटी तक पहुंचती हैं, तो पहाड़ इन हवाओं को ऊपर की ओर ले जाते हैं। इस प्रक्रिया को ओरोग्राफिक लिफ्ट कहा जाता है। इससे विशाल क्यूम्यलोनिम्बस नामक बादल बनते हैं, जो बारिश की बड़ी बूंदों को धारण कर सकते हैं। इससे नमी से भरी हुई हवा का प्रवाह ऊपर उठता है और बादल बड़ा होता जाता है। बारिश की कोई संभावना न होने के कारण, यह इतना भारी हो जाता है कि एक बिंदु पर यह फटने लगता है। ऊपर उठते समय जब यह नमी ठंडी हवाओं से मिलती है, तो तीव्र संघनन (कंडंजेशन) होता है और भारी वर्षा के रूप में गिरता है।
जलवायु परिवर्तन की भूमिका
हिमालय में तापमान वृद्धि की दर वैश्विक औसत से अधिक है। इससे वाष्पीकरण बढ़ता है, वातावरण में नमी अधिक होती है व इससे भारी वर्षा की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से भी वायुमंडलीय नमी में वृद्धि होती है, जो स्थानीय स्तर पर अचानक बाढ़ की घटनाओं में योगदान देती है। पोलर साइंस के अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को अस्थिर कर रहा है, जिससे अल्ट्रा लोकलाइज्ड (अत्यधिक सीमित दायरे में होने वाली) वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिन पर पूर्व चेतावनी देना अत्यंत कठिन है।
क्या किया जा सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों में उच्च गुणवत्ता वाली मौसम निगरानी प्रणालियों का नेटवर्क खड़ा करना आवश्यक है। संवेदनशील इलाकों में रियल-टाइम रडार सिस्टम और पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए। मानसून के दौरान निकासी प्रोटोकॉल पहले से लागू किए जाने चाहिए। ढलान व तलहटी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उच्च जोखिम की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए प्रशासनिक योजनाएं पूर्व निर्धारित होनी चाहिए। स्थानीय समुदायों को जागरूक करने, निर्माण कार्यों पर नियंत्रण लगाने और पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियां बनाई जानी चाहिए। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि क्लाउड बर्स्ट जोन (सीबीजेड) की स्पष्ट पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा उपायों को लागू किया जाना चाहिए।
-----000
सरकारी नौकरी के बावजूद बेसहारा बताने वाली पत्नी पर चले मुकदमा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी के बावजूद खुद को बेसहारा गृहणी बता भरण पोषण की मांग करने वाली पत्नी के खिलाफ पारिवारिक न्यायालय को झूठा हलफनामा देने पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। साथ ही भरण पोषण पर रोक लगा दी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने कन्नौज के मसरूफ अली की याचिका पर दिया है। याची की पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय में अपने व दो बच्चों के भरण पोषण की मांग कर अर्जी दाखिल की थी। इस पर पारिवारिक न्यायालय ने याची की पत्नी के पक्ष में 14 हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण अदा करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। संवाद
70 हजार वेतन पा रही
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि याची की पत्नी फिरोजाबाद के एफएच मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी कर रही है। 70 हजार रुपये वेतन पा रही है। उसने अदालत में खुद को बेसहारा गृहणी बता झूठा हलफनामा दाखिल कर भरण पोषण पाने का आदेश हासिल किया है।
------------0000000
चावल फेंकने वाले डॉक्टर पर जज ने लगाया जुर्माना
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने हाल ही में मेडिकल सर्जन पर जुर्माना लगाया है, जो 2011 के हत्या के मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है। उसने अदालत कक्ष में डायस के सामने चावल फेंककर अदालती कार्यवाही में बाधा डाली थी।
अदालत में मौजूद वकील आरोपी की तरफ से काला जादू किए जाने के शक में अपनी दलीलें रखने के लिए आगे आने से हिचकिचा रहे थे। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने डॉ. चंदर विभास को अदालत के अगले दिन उठने तक की सजा सुनाई। उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जो उसने उसी दिन जमा कर दिया। अदालत ने हरि नगर में दर्ज हत्या के मामले में आरोपी विभास के मामले की सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की थी।
मामले पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि यह अदालत के लिए बेहद चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है कि आरोपी जो पेशे से सर्जन बताए जाते हैं और शिक्षित वर्ग से हैं। उन्होंने इस तरह अनुचित तरीके से काम किया है और अदालती कार्यवाही में बाधा उत्पन्न की है। अदालत की कार्यवाही लगभग 15-20 मिनट तक रुकी रही। संवाद
------000000
सरकारी नौकरी के बावजूद बेसहारा बताने वाली पत्नी पर चले मुकदमा
--------------------------kkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkkk
सीएम ने खतरनाक पेड़ों की तुरंत पहचान और छंटाई के दिए आदेश
नई दिल्ली। मूसलाधार बारिश के दौरान कालकाजी में पेड़ गिरने से बाइक सवार पिता की मृत्यु व बेटी के घायल होने की घटना पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शोक व्यक्त किया है। साथ ही, उन्होंने सभी सड़क स्वामित्व वाले विभागों को खतरनाक और जर्जर पेड़ों की तत्काल पहचान करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून में भारी बारिश और तेज हवा चलने के समय बड़े, असुरक्षित या कमजोर पेड़ लोगों की जान, संपत्ति व यातायात के लिए गंभीर खतरा बन जाते हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि ऐसे पेड़ों की नियमानुसार छंटाई, हटाने या प्रतिरोपण का काम तत्काल शुरू किया जाए। दिल्लीवासियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
हर विभाग में जिम्मेदार अधिकारी नामित किए जाएं जो इस कार्य की निगरानी करेंगे और समय पर रिपोर्ट देंगे। जिन इलाकों में पैदल यात्रियों और वाहनों की आवाजाही ज्यादा है वहां पेड़ों की छंटाई को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समय पर रखरखाव न केवल हादसों को रोकेगा बल्कि यातायात और बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं को भी नुकसान से बचाएगा। ब्यूरो
आप की राजनीति दुखद : वीरेंद्र सचदेवा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि मानसून के दौरान जलभराव और पेड़ गिरने से हुई मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आप नेताओं को राजनीति करते देखकर दुख होता है। भाजपा सरकार इन घटनाओं को संवेदनशीलता से लेती है और पीड़ित परिवारों के प्रति पूरी संवेदना रखती है। सचदेवा ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी की ओर से लोक निर्माण विभाग के मंत्री का इस्तीफा मांगने और सौरभ भारद्वाज की प्रेसवार्ता की आलोचना की।
----00000
जन्माष्टमी : राजधानी हुई श्रीकृष्णमय मंदिरों में भव्य उत्सवों की तैयारी पूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी भगवान श्रीकृष्णमय हो गई है। जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में तमाम मंदिरों में भव्य सजावट, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर शनिवार को पूरे दिन और रात नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, माखन चोर की जय और बांके बिहारी लाल की जय’ के जयघोष से गूंजते रहेंगे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों को देश-विदेश के फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रमुख मंदिरों में श्रीकृष्ण लीला, श्रीमद भागवत कथा, प्रवचन, भजन-कीर्तन और आकर्षक झांकियों की प्रस्तुति होगी। प्रसाद वितरण और भगवान का महाभिषेक भी विशेष आकर्षण रहेंगे।
लक्ष्मी नारायण (बिड़ला) मंदिर, इस्कॉन ईस्ट ऑफ कैलाश, इस्कॉन द्वारका, बद्री भगत झंडेवाला मंदिर, छतरपुर मंदिर, प्रीत विहार का गुफा वाला मंदिर, पंजाबी बाग, रोहिणी और आसफ अली रोड स्थित श्रीराम हनुमान वाटिका सहित तमाम मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक पाइप और बल्लियों से लाइन की व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रबंधन समितियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बड़े मंदिरों में सौ से अधिक सेवादार तैनात होंगे, जो आने-जाने वाले हर श्रद्धालु पर नजर रखेंगे। पुलिस की ओर से भी मंदिरों के अंदर और बाहर गहन जांच, सीसीटीवी निगरानी और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए गए हैं।
पहली आरती के साथ
जन्मोत्सव का आगाज होगा
राजधानी के मंदिरों में पहली आरती के साथ जन्मोत्सव का आगाज होगा। इसके बाद पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। कई मंदिरों में भगवान को झूला झुलाने की भी व्यवस्था है। रात को 108 कलशों से महाभिषेक और 108 दीपों की आरती होगी। इसके लिए सभी तैयारिियां पूरी कर ली गई हैं।
बिड़ला मंदिर की विशेष झांकियां होगी आकर्षण का केंद्र
बिड़ला मंदिर में इस बार की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र होंगी। मंदिर प्रबंधक वीके मिश्रा के अनुसार, झांकियों में वासुदेव-देवकी का कारागार दृश्य, शिशु कृष्ण को यमुनापार ले जाते वासुदेव, पूतना वध, यशोदा को मुख में ब्रह्मांड दर्शन, माखन चोरी और नरसिंह अवतार जैसी लीलाओं के दृश्य सजाए गए हैं। जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर मंदिर से एक विशाल झांकी यात्रा भी निकाली जाएगी।
इस्कॉन मंदिर ईस्ट ऑफ कैलाश को विदेशी फूलों से सजाया
इस्कॉन मंदिर, ईस्ट ऑफ कैलाश में 16 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिर को थाईलैंड, बेंगलुरु और पुणे से आए फूलों, मोगरा की खुशबू और वृंदावन के कारीगरों द्वारा बनाए गए वस्त्रों व आभूषणों से सजाया जाएगा। सुबह 4:30 बजे मंगल आरती, 7:15 बजे दर्शन आरती, रात 9:30 बजे गेट-5 के भव्य पंडाल में महाभिषेक और 11:30 बजे 1008 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगेगा। ठीक 12:30 बजे महाआरती होगी। पूरे दिन हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन होगा और ठंडाई-फल प्रसाद बांटे जाएंगे।\
इस्कॉन द्वारका में तीन दिवसीय भव्य उत्सव का आयोजन
इस्कॉन द्वारका में 15 से 17 अगस्त तक तीन दिवसीय जन्माष्टमी समारोह होगा। श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश मंदिर में यह उत्सव आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से भव्य होगा। रत्नों, मोती-सीपियों और कढ़ाईदार वस्त्रों से भगवान का श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर के प्रवेश द्वार से प्रांगण तक रंगोली सजाई जाएगी। बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, भक्ति-आधारित क्विज, नुक्कड़ नाटक और खेल आयोजित होंगे। लाखों भक्तों के लिए प्रसाद की विशेष थालियां तैयार की जा रही हैं, जो जन्माष्टमी की रात वितरित होंगी।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.