मामा-भांजे जो तीन महीने तक करते रहे गैंगरेप
करीब तीन महीने पहले गांव में एक शादी के दौरान किशोरी की मुलाकात प्रदीप और उसके मामा सोनू से हुई थी। इस दौरान धोखे से सुनसान क्षेत्र में बुलाकर दोनों ने उससे गैंगरेप किया और वीडियो क्लिप बना ली।
इसके बाद एमएमएस फैलाने की धमकी देकर कई बार गैंगरेप किया गया। इस दौरान एमएमएस भी फैला दिया गया जो बाद में आरोपी लोकेंद्र के पास पहुंच गया।
उसने भी क्लिप को फैलाने का डर दिखा उससे रेप किया। हालांकि इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब आरोपियों ने रेप के बाद उसे जिंदा जला दिया तो 100 फीसदी जली छात्रा चौकी थाने के चक्कर काटने में दो घंटे तक तड़पती रही।
समय पर मिलता इलाज तो बच सकती थी जान
सुबह करीब साढ़े आठ बजे की घटना के बाद करीब नौ बजे तक लोग किशोरी को लेकर रमेरा चौकी पहुंचे, जहां पर दारोगा ने पीड़ित के बयान लिए। यहां भी पुलिस ने तेजी दिखाने की कोई कोशिश नहीं की।
आरोप है कि इसके बाद भी उसे अस्पताल भेजने की जगह जेवर थाने ले जाया गया, जहां से करीब 11 बजे कैलाश अस्पताल जेवर भेजा गया। यदि समय से किशोरी को इलाज मिल जाता तो जान बच सकती थी।
शुक्रवार की रात ही गांव में उसके शव का खामोशी से अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना 19 अप्रैल की है। वह शाम को जंगल से लौट रही थी। उसे दिनेश नामक युवक धोखे से गांव के बाहर बने एक मकान में ले गया।
कोसीकलां की रेप पीड़िता जिंदगी की जांग हार गई
जहां दिनेश, सुखबीर, विनय, विक्रम सहित पांच ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। पांचवां आरोपी नाबालिग बताया गया है। देर शाम मां उसे ढूंढते हुई पहुंची और घर ले आई।
गुनाह की सजा से बचने के लिए पांचों आरोपी 20 अप्रैल को तड़के उसके घर पहुंचे और मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी थी। परिवारीजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से गंभीर हालत के चलते उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
गैंगरेप के आरोपियों में से दो पीड़िता के रिश्तेदार भी लगते हैं। प्रकरण में पांचों आरोपी गिरफ्तार हैं। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव है और हर तरफ इसी की चर्चा है।