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विश्व हिंदी दिवस: एआई और हिंदी की दोस्ती ने तकनीक की भाषा को बनाया सरल, डिजिटल दुनिया में भी बढ़ रही है पहचान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:23 AM IST
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सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में हिंदी की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है। नई तकनीक अंग्रेजी के प्रभुत्व को तोड़ते हुए हिंदी को डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ा रही है।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं
- फोटो : Amar ujala
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विस्तार
आज हिंदी सिर्फ बातचीत या साहित्य की भाषा नहीं रह गई है। अब यह धीरे-धीरे तकनीक की भाषा भी बनती जा रही है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में हिंदी की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है। नई तकनीक अंग्रेजी के प्रभुत्व को तोड़ते हुए हिंदी को डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ा रही है।
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एआई में हिंदी की बढ़ती भूमिका
एआई आधारित टूल्स जैसे वॉयस असिस्टेंट, चैटबॉट, अनुवाद एप और सर्च इंजन अब हिंदी को बेहतर तरीके से समझने लगे हैं। पहले जहां ये तकनीक केवल अंग्रेजी तक सीमित थीं, वहीं अब हिंदी में सवाल पूछने और जवाब पाने की सुविधा मिल रही है। लोग मोबाइल पर बोलकर हिंदी में मैसेज लिखवा रहे हैं, खबरें सुन रहे हैं और जानकारी खोज रहे हैं। डिजिटल इंडिया अभियान और राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन जैसी योजनाओं ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को तकनीक से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। सरकारी वेबसाइट, मोबाइल एप और ऑनलाइन सेवाएं अब हिंदी में भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे आम लोगों के लिए तकनीक का इस्तेमाल आसान हुआ है।
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हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा
हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। इसे करोड़ों लोग बोलते, पढ़ते और समझते हैं। हिंदी भारत की प्रमुख भाषा है और भारत के अलावा नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम जैसे कई देशों में भी बोली जाती है। हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, जो सीखने में सरल और स्पष्ट है। विद्वानों के मुताबिक हिंदी संस्कृति, परंपरा और सोच को दर्शाती है। इस भाषा के माध्यम से अपने विचार आसानी से दूसरों तक पहुंचा सकते हैं। हिंदी में कहानियां, कविताएं, गीत और फिल्में बहुत लोकप्रिय हैं। आज के समय में हिंदी का प्रयोग शिक्षा, मीडिया, इंटरनेट और सरकारी कार्यों में बढ़ रहा है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि लोगों को जोड़ने का माध्यम है। सरल होने के कारण इसे हर उम्र के लोग आसानी से सीख सकते हैं। इसलिए हिंदी का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में इंटरनेट का इस्तेमाल करना चाहते हैं। मोबाइल फोन सस्ते होने और डेटा आसानी से मिलने से गांव और कस्बों तक डिजिटल पहुंच बढ़ी है। ऐसे में तकनीक कंपनियों को भी समझ आ गया है कि अगर उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचना है, तो हिंदी जैसी भाषाओं को अपनाना जरूरी है। लगभग 100 करोड़ लोग हिंदी लिख, बोल और समझ सकते हैं।
हिंदी की ताकत उसकी सरलता और लोगों से जुड़ाव में है। जब तकनीक इस सरलता को अपनाती है, तो वह आम आदमी के और करीब पहुंच जाती है। एआई और हिंदी की यह बढ़ती दोस्ती न केवल भाषा को मजबूत कर रही है, बल्कि डिजिटल भारत के सपने को भी साकार कर रही है। हिंदी अब केवल भावना या पहचान की भाषा नहीं रही। यह ज्ञान, तकनीक और भविष्य की भाषा बनती जा रही है। विश्व हिंदी दिवस पर यह बदलाव हिंदी के उज्ज्वल डिजिटल भविष्य की कहानी कहता है।
शिक्षा और रोजगार में हिंदी तकनीक का असर (विद्वानों की राय)
ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल कोर्स अब हिंदी में भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे उन छात्रों को फायदा मिल रहा है, जो अंग्रेजी में कमजोर हैं लेकिन सीखने की इच्छा रखते हैं। यूट्यूब चैनल, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदी सबसे ज्यादा देखी और सुनी जाने वाली भाषा बन गई है।
-प्रो. राकेश उपाध्याय, हिंदी पत्रकारिता विभागाध्यक्ष, आईआईएमसी
तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय तक अंग्रेजी का दबदबा रहा, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। एआई और मशीन लर्निंग ने यह साबित कर दिया है कि हिंदी भी उतनी ही सक्षम भाषा है। जैसे-जैसे तकनीक हिंदी को समझना सीख रही है, वैसे ही लोगों का भरोसा भी बढ़ रहा है। सरकारी सेवाएं, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं हिंदी में पूरी तरह उपलब्ध होंगी।
-प्रो. शिवमंगल कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय