फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Yamuna's health deteriorates further; pollution levels rise.

Delhi NCR News: यमुना की सेहत और बिगड़ी, प्रदूषण का ग्राफ चढ़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 07:30 PM IST
विज्ञापन
डीपीसीसी रिपोर्ट में अधिकांश निगरानी स्थलों पर जल गुणवत्ता बिगड़ने का खुलासा
विज्ञापन




अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जून माह की जल गुणवत्ता रिपोर्ट ने यमुना नदी की बिगड़ती सेहत पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, मई की तुलना में जून में नदी के अधिकांश निगरानी स्थलों पर फीकल कोलीफॉर्म और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर बढ़ा है। यह नदी में बिना उपचारित सीवेज के अधिक मात्रा में मिलने का संकेत है और जलीय जीवन के लिए भी खतरे की घंटी माना जा रहा है।
डीपीसीसी दिल्ली में यमुना के आठ स्थानों पर नियमित रूप से जल गुणवत्ता की निगरानी करता है। जून में हिंडन कट को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख स्थलों पर जल गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की गई। ओखला बैराज पर फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 1.40 लाख से घटकर 1.10 लाख एमपीएन/100 मिलीलीटर हुआ, लेकिन यह तय मानक से कई गुना अधिक बना हुआ है। वहीं असगरपुर में यह बढ़कर 3.90 लाख एमपीएन/100 मिलीलीटर पहुंच गया। पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी ब्रिज, आईटीओ ब्रिज और निजामुद्दीन ब्रिज पर भी फीकल कोलीफॉर्म के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई। यहां एमपीएन का मतलब 'मोस्ट प्रोबेबल नंबर' यानी बैक्टीरिया की अतिसंभाव्य संख्या से है।
विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, जून में कई स्थानों पर बीओडी का स्तर निर्धारित अधिकतम सीमा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से काफी ऊपर रहा। सबसे अधिक बीओडी असगरपुर में 64 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया, जो नदी में बढ़ते जैविक प्रदूषण की ओर इशारा करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

छह एसटीपी पर्यावरणीय मानकों पर खरे नहीं उतरे
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जून के दौरान छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर्यावरणीय मानकों पर खरे नहीं उतरे। यमुना विहार फेज-थ्री, महरौली, घिटोरनी और वसंत कुंज के एसटीपी के आउटलेट में फीकल कोलीफॉर्म, बीओडी और टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया।

-यमुना विहार फेज-थ्री के उपचारित पानी में फीकल कोलीफॉर्म 7,900 एमपीएन/100 मिलीलीटर दर्ज किया गया, जबकि स्वीकृत सीमा 230 एमपीएन/100 मिलीलीटर है। महरौली, घिटोरनी और वसंत कुंज के संयंत्रों में भी यही स्थिति सामने आई, जिससे उपचारित पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed