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दिल की सर्जरी में नई उम्मीद: आधुनिक तकनीक से तेजी से हो रही रिकवरी, कई मरीज मैराथन तक दौड़ने में सक्षम

अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Sun, 15 Mar 2026 05:56 PM IST
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सार

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों ने बताया कि नई तकनीकों के कारण हृदय सर्जरी के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। नियमित दवाएं और सही देखभाल से वे सामान्य जीवन जी सकते हैं। कई मामलों में मरीज तैराकी, साइक्लिंग और मैराथन जैसी गतिविधियों में भी हिस्सा ले पा रहे हैं।

cardiology experts gave information about new hope in heart surgery In program organized in Delhi
डॉ. चंदोला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नई तकनीक के साथ दिल के सर्जरी में आए सुधार के बाद मरीज मैराथन में हिस्सा ले सकता है। नियमित दवाएं ले तो सामान्य जीवन भी जी सकता है। दिल्ली में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों ने बताया कि बीते दस साल में काफी सुधार आया है। इस दौरान दिल के रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल चंदोला ने बताया कि आधुनिक हृदय सर्जरी के बाद कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा सक्रिय जीवन जी सकते हैं और कुछ मामलों में मैराथन जैसी कठिन दौड़ में भी हिस्सा ले सकते हैं।

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आज हृदय सर्जरी का उद्देश्य केवल मरीज की जान बचाना नहीं है, बल्कि उसे फिर से पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने लायक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि कई मरीजों का सामान्य रिकवरी के बाद तैराकी, साइक्लिंग और यहां तक कि मैराथन दौड़ना भी संभव हो जाता है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर नियमित हार्ट सर्जरी के बाद मरीज कुछ ही दिनों में हल्की शारीरिक गतिविधि और चलना शुरू कर देते हैं। सर्जरी के करीब एक से दो सप्ताह बाद मध्यम स्तर का व्यायाम शुरू किया जा सकता है और इसके बाद धीरे-धीरे नियमित शारीरिक प्रशिक्षण शुरू किया जाता है।
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डॉ. चंदोला के मुताबिक, लगभग 10 से 12 सप्ताह के भीतर कई मरीज अपनी रिकवरी और हृदय की कार्यक्षमता के आधार पर पूरी तरह से एथलेटिक गतिविधियों में लौट सकते हैं। इसमें दौड़ना, तैरना, साइक्लिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और मैराथन दौड़ना भी शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि रिकवरी की समयसीमा कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे सर्जरी का प्रकार, हृदय की स्थिति, मरीज की समग्र फिटनेस और चिकित्सकीय निगरानी में चलने वाला कार्डियक रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम।

वहीं अन्य डॉक्टरों ने बताया कि लोगों में यह गलत धारणा है कि हार्ट सर्जरी के बाद जीवन भर शारीरिक गतिविधि सीमित करनी पड़ती है। जबकि आधुनिक हृदय सर्जरी का लक्ष्य मरीज को पूरी तरह सक्रिय जीवन में वापस लाना है। उन्होंने बताया कि आज अधिकांश हार्ट सर्जरी कराने वाले मरीज 5 से 7 दिनों के भीतर अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं और कई युवा मरीज चौथे दिन ही घर लौट जाते हैं। अस्पताल से छुट्टी के समय तक वे स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने और दैनिक कार्य करने में सक्षम हो जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान में मरीजों की रिकवरी की निगरानी के लिए iLive Connect नामक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है, जो इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (IoT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स की मदद से मरीज के स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों की लगातार निगरानी करता है। इससे किसी भी संभावित समस्या का जल्दी पता लगाकर तुरंत चिकित्सकीय मदद दी जा सकती है। हृदय रोगों की रोकथाम के लिए समय-समय पर जांच जरूरी है। उनके अनुसार 30 वर्ष की उम्र के बाद बेसलाइन कार्डियोवैस्कुलर जोखिम जांच करानी चाहिए और 40 वर्ष के बाद नियमित हार्ट चेक-अप कराना बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान की आदत या परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें सामान्य लोगों की तुलना में अधिक नियमित अंतराल पर जांच करानी चाहिए।

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