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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026: 21वें स्थान पर दिल्ली, तीन अंक के सुधार के साथ गाजियाबाद नौवें, 14वें पर फरीदाबाद
Tue, 08 Sep 2026 05:30 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 08 Sep 2026 05:30 AM IST
सार
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने 11 अंकों की छलांग के साथ 21वां स्थान हासिल किया है। वहीं, शीर्ष पांच शहरों में यूपी की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में पहला स्थान हासिल किया है।
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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने 11 अंकों की छलांग के साथ 21वां स्थान हासिल किया है। वहीं, शीर्ष पांच शहरों में यूपी की राजधानी लखनऊ ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में पहला स्थान हासिल किया है। रैंकिंग में दूसरा स्थान देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा पाने वाले इंदौर और तीसरा स्थान जबलपुर को मिला है। वहीं, भोपाल और आगरा संयुक्त रूप से चौथे और सूरत पांचवें स्थान पर रहा।
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नई दिल्ली में सोमवार को सर्वेक्षण के परिणाम जारी किए गए। इसमें यूपी के 16 शहरों को स्थान मिला। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में गाजियाबाद 9वें और फरीदाबाद 14वें पायदान पर रहा। तीन लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में ओडिशा का राउरकेला पहले और एनसीआर का नोएडा 8वें स्थान पर है। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों में ओडिशा का कलिंग नगर पहले पायदान पर है।
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इन उपायों से आया सुधार
दिल्ली में भी सड़क धूल और निर्माण गतिविधियों की निगरानी, यांत्रिक सफाई, वायु गुणवत्ता निगरानी व स्वच्छ परिवहन पर जोर बढ़ाया गया है। केंद्र की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण की ऑनलाइन निगरानी और डस्ट कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सेल जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं। दिल्ली सरकार के 2026-27 के बजट में पर्यावरणीय स्थिरता और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों के लिए करीब 21,630 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है। इनमें 300 करोड़ रुपये प्रदूषण नियंत्रण एवं आपात उपायों के लिए रखे गए हैं। इस मद में मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन, एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों या कस्बों में कोटा, कोलकाता और मदुरै सबसे निचले पायदान पर रहे। वहीं, तीन लाख से 10 लाख की आबादी में गयाजी, गुलबर्ग और जालंधर सबसे निचले पायदान पर हैं।
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मानक और भी हैं
केंद्र के सर्वेक्षण में शहरों को सिर्फ यह देखकर अंक नहीं दिए जाते कि उनकी हवा कितनी साफ है। सड़क की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों व उद्योगों से होने वाला प्रदूषण, निर्माण एवं तोड़फोड़ के कचरे का प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे काम भी जांचे जाते हैं। प्रक्रिया में शहरों का स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तर पर मंजूरी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मूल्यांकन और स्वतंत्र टीमों का मैदानी सत्यापन शामिल रहता है।
दिल्ली का औसत पीएम10 स्तर अब भी मानक से बहुत ज्यादा
रैंकिंग में सुधार के बावजूद दिल्ली की हवा को साफ नहीं कहा जा सकता। 2025 में राजधानी का औसत पीएम10 स्तर 198 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम2.5 स्तर 97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। राष्ट्रीय वार्षिक मानक क्रमशः 60 व 40 माइक्रोग्राम हैं। यानी बेहतर प्रदर्शन के बावजूद प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से काफी ऊपर है। सर्दियों में स्थिति और बिगड़ती है और एक्यूआई गंभीर श्रेणी तक पहुंच जाता है।