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Driving in Delhi : महिलाओं ने संभाली वाहन की कमान तो सड़क पर कम गई जान, दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में खुलासा

सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 04 Aug 2022 05:51 AM IST
सार

Driving in Delhi :दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं ने स्टीयरिंग संभाला तो उनसे होने वाली चूक पुरुषों की तुलना में नगण्य हैं। सड़कों पर 2021 में हुए हादसों में मौत के लिए पुरुषों की तुलना में महज एक फीसदी महिलाएं जिम्मेदार हैं। दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

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विस्तार

रसोई ही नहीं, ड्राइविंग में भी महिलाएं अपना हुनर साबित कर रही हैं। दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं ने स्टीयरिंग संभाला तो उनसे होने वाली चूक पुरुषों की तुलना में नगण्य हैं। सड़कों पर 2021 में हुए हादसों में मौत के लिए पुरुषों की तुलना में महज एक फीसदी महिलाएं जिम्मेदार हैं। सड़क दुर्घटनाओं में हुई मौत पर जारी दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।



राजधानी में पिछले साल दुर्घटनाओं में हुई मौतों के लिए महिलाओं की अपेक्षा पुरुष कई गुना अधिक जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन चलाते समय महिलाएं ज्यादा सतर्क होती हैं। अमूमन, वह देर रात ड्राइविंग सीट पर नहीं होती हैं। इसके अलावा वाहन चलाने के मामले में अभी भी लैंगिक असमानता है। इनका मिला-जुला असर रिपोर्ट में दिख रहा है।


पैदल चलते हुए सर्वाधिक महिलाओं की मौत
दिल्ली में 2021 में कुल 1,238 मौतें हुई। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब 98 फीसदी अधिक है। इस दौरान 420 पुरुष दोपहिया चालकों सहित आठ महिलाओं ने भी जान गंवा दी। सड़कों पर पैदल चलते हुए हादसों का शिकार होने पर 71 महिलाओं की मौत हुई। दोपहिया वाहनों की पिछली सीट की सवारी भी महिलाओं पर भारी पड़ी। इस वजह से 37 लोगों की मौत हो गई, जबकि ऑटो रिक्शा पर सवार छह महिलाओं की भी इस दौरान मौत हुई।

साइकिल सवार की मौत नहीं
साइकिल सवार किसी भी महिला की हादसों में जान नहीं गई। जानकारों का कहना है कि महिला चालकों की कम संख्या होने की वजह से सड़क दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हिस्से में कम है। महिलाएं दोपहिया, साइकिल, कार, ऑटो और बस चला रही हैं। उनकी एकाग्रता और ड्राइविंग में दक्षता को देखते हुए दिल्ली सरकार महिला चालकों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। 

सीट बेल्ट और हेलमेट 
आंकड़े बताते हैं कि 74 फीसदी मौतें भारी और हल्के वाहनों की वजह से हुई हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता, रफ्तार पर नियंत्रण और अधिक जोखिम वाले समय में प्रवर्तन, दोपहिया चालकों और पैदल चलने के लिए सुरक्षित सड़क डिजाइन को और बेहतर करने की विश्लेषकों ने आवश्यकता जताई है। इनमें सुधार होने से दुर्घटनाओं की संख्या कम होने से सड़कों पर सफर करना और सुरक्षित होगा।

हादसों में होने वाली मौत का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से अधिक
दिल्ली में 2021 में सड़क हादसों में कुल 1238 लोगों की मौत हुई। जान गंवाने वालों में 93 फीसदी लोग पैदल, साइकिल, बाइक, ऑटो और ई-रिक्शा सवार थे। यह आंकड़ा 57 फीसदी के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 89 फीसदी पुरुषों की मौत हुई, जबकि 11 फीसदी महिलाएं शामिल थीं। इनमें भी 20-39 वर्ष की आयु वर्ग के पुरुषों की सड़क हादसे में सर्वाधिक मौत हुई है।

परिवार की जिम्मेदारी हमेशा रहती है याद  मनोचिकित्सक डॉ. अनीता रेगो ने बताया कि महिलाएं कम रफ्तार में ड्राइविंग करती हैं। ब्रेक का अधिक इस्तेमाल करती हैं। महिलाओं के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी भी उन्हें बार-बार याद दिलाती है कि उन्हें सुरक्षित घर लौटना है। 

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