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Delhi: जीवनदायिनी यमुना को मिलेंगी नई सांसें, 43 में से 17 ड्रेन ट्रेप, 22 नालों पर जारी है काम
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Fri, 22 May 2026 04:49 AM IST
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सार
यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने, उसका मार्ग बदलने और उपचार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। 43 चिन्हित नालों में से अब तक 17 नालों को बीच में रोककर उनका पानी सीवर नेटवर्क की ओर मोड़ दिया गया है, जिससे बिना उपचारित सीवेज सीधे नदी में जाने से रोका जा सके।
यमुना नदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने, उसका मार्ग बदलने और उपचार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। 43 चिन्हित नालों में से अब तक 17 नालों को बीच में रोककर उनका पानी सीवर नेटवर्क की ओर मोड़ दिया गया है, जिससे बिना उपचारित सीवेज सीधे नदी में जाने से रोका जा सके। यह खुलासा दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाला अवरोधन के अंतिम चरण में है, जबकि 22 नालों पर काम जारी है।
डीजेबी के मुख्य अभियंता (ड्रेनेज) पवन कुमार ने बताया कि इनमें से 6 नालों का काम 30 जून 2026 तक पूरा करने और बचे हुए 16 नालों का काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। एक नाला नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अधिकार क्षेत्र में है, जहां संबंधित विभाग के साथ समन्वय किया जा रहा है। वहीं, दो नालों के लिए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाने की प्रक्रिया चल रही है और फिलहाल उनकी टेंडर प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि कुछ जेजे क्लस्टर नालों को जमीन की बनावट कारणों से मौजूदा सीवर नेटवर्क से जोड़ना संभव नहीं है। ऐसे मामलों में मॉड्यूलर पोर्टेबल डीएसटीपी लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
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गंदे पानी को रोकने की राह में अटकीं परियोजनाएं
रिपोर्ट में अलग-अलग नालों की स्थिति भी बताई गई है। ड्रेन नंबर डी1 और डी2 पर काम जारी है और डी1 का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एडी2 पर करीब 30 प्रतिशत, एडी3 और एडी4 पर लगभग 10 प्रतिशत तथा एडी8 पर लगभग 20 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इन सभी कार्यों को 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, एडी9, एडी10 और एडी13 नालों का काम दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सड़क काटने की अनुमति नहीं मिलने के कारण रुका हुआ है। अब इनका काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना जताई गई है।
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नालों के लिए सूखे मौसम में पानी के बहाव का हो रहा अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, केडी1 नाले पर प्रस्तावित डीएसटीपी का मामला फिलहाल अवॉर्ड स्टेज पर है और तकनीकी कारणों से इसमें अतिरिक्त समय लग रहा है। केडी5, केडी6, केडी9, केडी11, केडी12, केडी14, केडी15 और केडी16 नालों के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के साथ समन्वय जरूरी बताया गया है, ताकि एकल डिस्चार्ज पॉइंट बनाया जा सके।
30 जून तक सभी नाले ट्रैप करने का है प्लान :
प्लान के अनुसार 30 जून तक सारे ड्रेन ट्रैप कर दिए जाएंगे। एनजीटी इस मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें निजामुद्दीन वेस्ट के निवासियों ने मानसून में जलभराव और नालियों की समस्या उठाई है।
कई परियोजनाओं में देरी के मुख्य कारण :
अधिकारी के अनुसार, ड्रेन नंबर बी पर भी काम चल रहा है और लगभग 10 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसे 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। डीजेबी ने कहा कि कई परियोजनाओं में देरी का मुख्य कारण सड़क काटने की अनुमति, बहाली शुल्क, डूसिब के साथ समन्वय और डीएसटीपी के लिए जमीन चिन्हित जैसी प्रक्रियाएं हैं। डीजेबी ने 1 अप्रैल की सुनवाई में कहा था कि यदि डूसिब जेजे क्लस्टर से एकल डिस्चार्ज पॉइंट उपलब्ध कराता है, तो सीवेज नेटवर्क से जोड़ देगा।