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नई रिसर्च फेलोशिप PMRC-2026 लॉन्च: यंग से लेकर सीनियर रिसर्चर्स तक को मिलेगा मौका; जानें आवेदन के लिए योग्यता
सुनंदा राव, कॅरिअर एक्सपर्ट
Published by: Shahin Praveen
Updated Thu, 25 Jun 2026 03:02 PM IST
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सार
PMRC -2026: भारत सरकार ने प्रधानमंत्री रिसर्च चेयर फेलोशिप लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य देश और विदेश में कार्यरत भारतीय मूल के शोधकर्ताओं को बेहतर अवसर देना है। इस योजना के तहत यंग, सीनियर और रिसर्च चेयर श्रेणी के वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा।
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विस्तार
Researchers Fellowship: शोध और नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं के लिए भारत सरकार एक बड़ा अवसर लेकर आई है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर (पीएमआरसी) स्कीम 2026 का उद्देश्य देश और विदेश में कार्यरत भारतीय मूल के उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को भारत के अग्रणी विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय शोध संस्थानों से जोड़ना है। चयनित शोधकर्ताओं को आकर्षक वित्तीय सहायता, अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं, शोध के लिए आवश्यक संसाधन और अकादमिक स्वतंत्रता प्रदान की जाएगी।
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दूसरी श्रेणी सीनियर फेलो की है, जिसके लिए ऐसे उम्मीदवार पात्र हैं, जिनके पास पीएचडी डिग्री प्राप्त करने के बाद पांच वर्ष या उससे अधिक, लेकिन दस वर्ष से कम का अनुभव है। वहीं, तीसरी और सबसे वरिष्ठ श्रेणी रिसर्च चेयर की है, जिसमें वे शोधकर्ता आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास पीएचडी के बाद दस वर्ष से अधिक का अनुभव है।
इनोवेशन के क्षेत्र
इस स्कीम के तहत रिसर्च और इनोवेशन के कई प्रमुख क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनमें साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हेल्थ, इंजीनियरिंग, सोशल साइंस और अन्य इनोवेशन आधारित क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में चयनित शोधकर्ताओं को उन्नत शोध करने और नए समाधान विकसित करने का मौका मिलेगा।
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कौन कर सकता है अप्लाई?
इस फेलोशिप के तहत शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को उनके अनुभव के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में आवेदन करने का अवसर दिया गया है। पहली श्रेणी यंग रिसर्चर फेलो की है, जिसमें वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने पीएचडी पूरी कर ली है और उसके बाद उनका शोध, शिक्षण या संबंधित क्षेत्र में अनुभव पांच वर्ष से कम है।दूसरी श्रेणी सीनियर फेलो की है, जिसके लिए ऐसे उम्मीदवार पात्र हैं, जिनके पास पीएचडी डिग्री प्राप्त करने के बाद पांच वर्ष या उससे अधिक, लेकिन दस वर्ष से कम का अनुभव है। वहीं, तीसरी और सबसे वरिष्ठ श्रेणी रिसर्च चेयर की है, जिसमें वे शोधकर्ता आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास पीएचडी के बाद दस वर्ष से अधिक का अनुभव है।
मिलने वाले लाभ
यह फेलोशिप लगभग पांच वर्षों की अवधि के लिए होती है, जिससे शोधकर्ता बिना किसी रुकावट के अपने प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। चयनित वैज्ञानिकों को आईआईटी, आईआईएससी और सीएसआईआर जैसी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही उन्हें फेलोशिप, रिसर्च ग्रांट, रीलोकेशन सपोर्ट और आवास जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।- इस योजना का उद्देश्य देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना और उच्च स्तरीय शोध को मजबूत करना है।
- चयनित उम्मीदवारों को शोध के लिए फंडिंग, लैब सुविधाएं और अकादमिक स्वतंत्रता मिलेगी।
- प्रमुख संस्थानों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में काम करने का अवसर मिलेगा।
- फेलोशिप के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का मौका मिलेगा।