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UGC Regulations 2026: क्या बदलेंगे यूजीसी के इक्विटी नियम? केंद्र ने SC में कहा- दोबारा कर रहे विचार

Thu, 20 Aug 2026 01:32 PM IST
Akash Kumar एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Thu, 20 Aug 2026 01:32 PM IST
सार

UGC Equity Regulations 2026: यूजीसी के नए इक्विटी नियमों पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा अपडेट दिया है। सरकार ने कहा कि वह नियमों पर दोबारा विचार कर रही है। इस बीच कोर्ट ने यूजीसी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।
 

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Centre Reconsiders UGC Equity Regulations 2026 as Supreme Court Seeks Fresh Response
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

UGC Equity Regulations 2026: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि यूजीसी के इक्विटी नियमों, 2026 पर दोबारा विचार किया जा रहा है। ये नियम फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लागू नहीं हैं।

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केंद्र और यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन नियमों पर फिर से विचार कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि दोबारा विचार के बाद फैसला किस दिशा में जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को कितने समय में जवाब देने को कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को सभी याचिकाओं का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि यूजीसी को सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों को शामिल करते हुए एक व्यापक जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। इसके बाद:

  • यूजीसी को अपने हलफनामे की प्रतियां सभी याचिकाकर्ताओं को देनी होंगी।
  • याचिकाकर्ता इसके बाद अपना जवाब यानी रिजॉइंडर दाखिल कर सकेंगे।
  • रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ताओं को दो हफ्ते का समय मिलेगा।


मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।

किस नियम को लेकर विवाद है?

विवाद यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को लेकर है। ये नियम जनवरी 2026 में अधिसूचित किए गए थे।

इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाओं में नियमों में दी गई जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

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याचिकाकर्ताओं ने क्या आपत्ति जताई है?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा काफी सीमित रखी गई है। उनकी मुख्य आपत्तियां हैं:

  • नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
  • आरोप है कि सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के छात्रों को जाति आधारित भेदभाव या संस्थागत पक्षपात से सुरक्षा के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • नए नियमों के दायरे और उनके संभावित गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है।

अभी UGC Equity Regulations की स्थिति क्या है?

सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन नियमों को फिलहाल लागू नहीं करने यानी स्थगित रखने का आदेश दे चुका है। अब केंद्र ने कोर्ट को बताया है कि वह नियमों पर दोबारा विचार कर रहा है। ऐसे में आगे इन नियमों का क्या स्वरूप होगा, यह सरकार के पुनर्विचार और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली कार्यवाही से स्पष्ट होगा।

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