NEET UG: जब 101 सिफारिशें पहले से थीं तो फिर पेपर लीक क्यों हुआ? NTA के दावों पर FAIMA ने SC में उठाया सवाल
NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एनटीए के परीक्षा सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए हैं। फाइमा ने कहा कि गोपनीय सामग्री का दुरुपयोग करने वालों के लिए कानून में और कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
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NEET Paper Leak: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से दाखिल हलफनामे पर अपना जवाब दिया। इसमें संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए एनटीए की ओर से बताए गए उपायों की पर्याप्तता पर सवाल उठाया है। फाइमा की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने यह जवाब दाखिल किया।
संगठन का कहना है कि केवल सुरक्षा उपायों का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है। परीक्षा से जुड़ी बेहद गोपनीय सामग्री तक पहुंच रखने वाले लोगों के दुरुपयोग की स्थिति को भी कानून में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
पेपर सेट करने वालों के लिए कड़े प्रावधान की मांग क्यों?
फाइमा ने कहा कि पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 में ऐसी स्थिति के लिए विशेष प्रावधान होना चाहिए, जिसमें पेपर तैयार करने वाले, पेपर जांचने वाले या अन्य अधिकृत व्यक्ति अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करें। संगठन के अनुसार, यदि ऐसे लोग गोपनीय परीक्षा सामग्री को:
- कॉपी करते हैं,
- साझा करते हैं,
- किसी को भेजते हैं या
- अनधिकृत व्यक्ति के सामने उसका खुलासा करते हैं,
तो इसे गंभीर अपराध माना जाना चाहिए। फाइमा ने ऐसे मामलों में सामान्य अपराध की तुलना में और कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान करने की बात कही है।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर भी सवाल
फाइमा ने केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स को लेकर भी सवाल उठाया।
संगठन ने कहा कि सरकार ने यह पर्याप्त रूप से नहीं बताया है कि पहले बनाई गई डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स की सिफारिशों को पूरी तरह लागू क्यों नहीं किया गया। फाइमा का कहना है कि छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि पहले की समिति की सिफारिशों पर पूरी तरह अमल क्यों नहीं हुआ।
राधाकृष्णन समिति ने कितनी सिफारिशें दी थीं?
शिक्षा मंत्रालय ने नीट यूजी पेपर लीक के बाद सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति बनाई थी। समिति को परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा व्यवस्था और एनटीए की संरचना व कामकाज से जुड़े सुझाव देने थे।
फाइमा के अनुसार, समिति ने 2024 में अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें कुल 101 सिफारिशें थीं। इन सिफारिशों में परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल थे।
फाइमा ने सवाल उठाया कि जब ये सिफारिशें पहले से मौजूद थीं, तब 2026 में दोबारा पेपर लीक की स्थिति क्यों बनी और एक नई टास्क फोर्स की जरूरत क्यों पड़ी।
फाइमा ने छात्रों की परेशानी को लेकर क्या कहा?
फाइमा ने कहा कि छात्रों को बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं का सामना नहीं करना चाहिए। संगठन के मुताबिक, हर साल नई समिति बनना और पहले की समितियों की सिफारिशों को पूरी तरह लागू न करना छात्रों के हित में नहीं है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि पहले से मौजूद सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
NTA को बदलने की भी मांग
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें फाइमा की याचिका भी शामिल है।
- एक याचिका में एनटीए को बदलने या उसका पुनर्गठन करने की मांग की गई है।
- इसमें नीट यूजी जैसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने के लिए एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाने की बात कही गई है।
- नीट यूजी पेपर लीक से जुड़े आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहा है।
2024 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया था?
2024 में नीट यूजी के प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अदालत ने पेपर लीक से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए थे और सार्वजनिक परीक्षाओं को रद्द करने से जुड़ा एक मानदंड भी तय किया था।
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