Delhi University: अब UG के बाद सीधे PhD, मास्टर डिग्री जरूरी नहीं; डीयू ने खोला नया रास्ता, कौन ले सकेगा लाभ?
Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय यूजी कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों के लिए सीधे पीएचडी में प्रवेश का रास्ता खोल दिया है। इसके लिए मास्टर डिग्री जरूरी नहीं होगी। वहीं, 2026-27 में 46 एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में 5,857 सीटें जोड़ी गई हैं। इनके लिए 12,111 छात्रों ने आवेदन किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) पूरा करने वाले छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का नया रास्ता खोला है। अब निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले छात्र मास्टर डिग्री किए बिना सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इसके लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को कम से कम 7.5 सीजीपीए, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को 7.0 सीजीपीए या उससे अधिक होना जरूरी होगा।
विश्वविद्यालय के अध्यादेश-6 में संशोधन के तहत यह व्यवस्था लाई गई है। इसे अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद से मंजूरी मिल चुकी है।
2026-27 में क्यों खास है यह व्यवस्था?
डीयू में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत पढ़ने वाले छात्रों का पहला बैच अब स्नातक शिक्षा पूरी कर रहा है। ऐसे में 2026-27 के लिए सीधे पीएचडी में जाने का यह प्रावधान पहली बार इन छात्रों के लिए लागू होगा।
इसका मतलब है कि पात्र छात्र पीजी की पढ़ाई किए बिना डॉक्टरेट कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए विश्वविद्यालय की निर्धारित पात्रता पूरी करना जरूरी होगा।
FYUP में कितने छात्रों ने चौथा साल चुना था?
डीयू ने 2022-23 के शैक्षणिक सत्र से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किया था। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के आधार पर तैयार स्नातक पाठ्यचर्या ढांचे के तहत लागू किया गया था।
2022-23 में डीयू में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग समेत कुल 75,948 छात्रों ने दाखिला लिया था। इनमें से 40,005 छात्र तीन साल की स्नातक पढ़ाई पूरी करने के बाद 2025 में बाहर हो गए, जबकि करीब 35,943 छात्रों ने चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखी। इनमें से 12,111 छात्रों ने 2026-27 में एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया है।
एक वर्षीय पीजी में कितनी सीटें हैं?
डीयू ने 2026-27 के लिए 46 विषयों के एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में कुल 5,857 सीटें उपलब्ध कराई हैं। इनमें 2,807 सीटें नियमित मोड में हैं। यानी औसतन हर कार्यक्रम में करीब 127 सीटें हैं।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम | 46 |
| कुल सीटें | 5,857 |
| नियमित मोड की सीटें | 2,807 |
| एक वर्षीय पीजी के लिए आवेदन | 12,111 |
| चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखने वाले छात्र | 35,943 |
5,857 सीटों के लिए 12,111 आवेदन, कितना बड़ा है अंतर?
एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में उपलब्ध 5,857 सीटों के मुकाबले 12,111 छात्रों ने आवेदन किया है। इस हिसाब से उपलब्ध सीटें आवेदकों की संख्या का करीब 48.36 प्रतिशत हैं। वहीं, चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखने वाले 35,943 छात्रों में से करीब 33.7 प्रतिशत ने एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों के लिए आवेदन किया है।
क्या तीन साल बाद पीजी का विकल्प भी रहेगा?
हां। डीयू ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के साथ दो वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में सीटों की संख्या बरकरार रखी है।
ये कार्यक्रम खास तौर पर उन छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे, जो FYUP में तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक शिक्षा से बाहर हो गए हैं। यानी छात्रों के पास उनकी स्नातक पढ़ाई के आधार पर आगे बढ़ने के अलग-अलग विकल्प मौजूद रहेंगे।
बढ़ी सीटों के लिए डीयू ने क्या तैयारी की?
एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में सीटें बढ़ने के साथ विश्वविद्यालय के सामने कक्षाओं और शिक्षकों की व्यवस्था की चुनौती भी है। इस पर डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय ने अतिरिक्त जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी की है।
इसके लिए कुछ ऐसे कमरों का आवंटन किया गया है, जहां पहले अन्य कार्यक्रम चल रहे थे। विश्वविद्यालय अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति भी करेगा। इसके अलावा कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को विश्वविद्यालय में पढ़ाने का अवसर देने और उन्हें मानदेय देने की भी व्यवस्था की गई है।
दूसरे विश्वविद्यालयों के मुकाबले डीयू में कितनी ज्यादा सीटें?
एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों के मामले में डीयू का विस्तार अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में काफी बड़ा है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने 4 कार्यक्रमों में 71 सीटें, जबकि अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली (AUD) ने 7 कार्यक्रमों में 210 सीटें उपलब्ध कराई हैं। इसके मुकाबले डीयू 46 एक वर्षीय पीजी कार्यक्रमों में 5,857 सीटें दे रहा है।
डीयू ने चार वर्षीय यूजी कार्यक्रम कब शुरू किया था?
दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2022-23 के शैक्षणिक सत्र से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम लागू किया था। इसे स्नातक पाठ्यचर्या ढांचा (UGCF) 2022 के तहत लागू किया गया, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित है।
FYUP का उद्देश्य छात्रों को स्नातक स्तर पर शोध और उद्यमिता का अधिक अनुभव देना और भारतीय डिग्री कार्यक्रमों को वैश्विक शैक्षणिक मानकों के अनुरूप बनाना था।
अब इसी कार्यक्रम का पहला बैच चार साल की पढ़ाई पूरी कर चुका है। इसके साथ डीयू ने छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी और पात्र छात्रों के लिए सीधे पीएचडी जैसे नए शैक्षणिक विकल्प सामने रखे हैं।
कमेंट
कमेंट X