DU Admission: स्नातक कोर्सेज में दाखिले के लिए पहले राउंड में 70% सीटें हुईं फुल, दूसरे राउंड में संभावनाएं कम
DU Admission 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक प्रवेश प्रक्रिया के पहले राउंड में ही करीब 70 फीसदी सीटें भर चुकी हैं। बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा सीटें स्वीकार किए जाने के बाद दूसरे राउंड में सीटों के विकल्प सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
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DU: दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्नातक कोर्सेज में दाखिले के पहले राउंड में आवंटित की गई 93, 033 सीटों में से करीब 70 फीसदी सीटें महज चौबीस घंटे में ही फुल हो गई हैं। कुछ कॉलेजों में कुल सीटों में से 60-70 फीसदी सीट को छात्रों ने स्वीकार किया है। कॉलेजों में बीकॉम, राजनीति शास्त्र व अंग्रेजी ऑनर्स, इतिहास ऑनर्स की ज्यादा सीट स्वीकार हुई हैं।
बृहस्पतिवार देर शाम जारी की गई स्नातक की पहली सीट आवंटन सूची के तहत कुल 93, 033 सीट आवंटित की गई थी। इनमें से चौबीस घंटे में ही कुल आवंटित सीटों पर 66, 251 ने अपनी सीट को स्वीकार कर लिया।
कॉलेजों में सबसे अधिक मांग बीकॉम, राजनीति विज्ञान
दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाने को लेकर शुक्रवार को एबीवीपी ने प्रदर्शन किया। उधर, क्रांतिकारी युवा संगठन ने डीन स्टूडेंट वैलफेयर से मुलाकात कर सीटें बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए कैंपस में पुलिस फोर्स तैनात रहा। एबीवीपी से जुड़े छात्र डीयू के कला संकाय के बाहर प्रदर्शन करते हुए बैरिकेड पर चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे।
प्रदर्शन के बाद एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने विवि के रजिस्ट्रार प्रो. विकास गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर सभी एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की। एबीवीपी के दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि सीटों की कमी छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने डीन एडमिशन के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है, जो 10 दिनों के भीतर इस विषय पर अपनी रिपोर्ट और सुझाव देगी।
दूसरी ओर इस मामलें पर क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर से मुलाकात की और उन्हें कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि डीयू में एक-साल के स्नातकोत्तर कोर्स की सीटों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए। डीयू में 46 विभागों में एक-साल के कोर्स के लिए सीटों की संख्या बहुत कम है।