NEET: नीट अभ्यर्थियों के लिए राहत, जल्द मिल सकेंगे पुराने स्कोरकार्ड; डिजीलॉकर सिस्टम हुआ तैयार
DigiLocker Integration: नीट उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। डिजीलॉकर सिस्टम का एकीकरण पूरा होने के बाद अभ्यर्थी जल्द ही अपने पुराने नीट स्कोरकार्ड ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। इससे छात्रों को अपने परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर आसानी से डाउनलोड करने में मदद मिलेगी।
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NEET Scorecard: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को बताया है कि पुराने NEET स्कोरकार्ड को दोबारा प्राप्त करने के लिए डिजिलॉकर आधारित सिस्टम लगभग तैयार हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद छात्र अपने पुराने स्कोरकार्ड आसानी से ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे और उन्हें महत्वपूर्ण दस्तावेज खोने की चिंता नहीं रहेगी।
यह जानकारी एक NEET-UG 2020 उम्मीदवार की आरटीआई अपील की सुनवाई के दौरान सामने आई। उम्मीदवार ने अपने स्कोरकार्ड की प्रमाणित प्रति और योग्यता से जुड़ी जानकारी मांगी थी, ताकि वह इसे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) में जमा कर सके। इस मामले की सुनवाई के दौरान NTA ने डिजिलॉकर सिस्टम की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
एनटीए ने आयोग को बताया कि उसने इस मुद्दे की समीक्षा की है और "डिजिलॉकर के साथ एक तंत्र विकसित करने की प्रक्रिया में है ताकि उम्मीदवार पिछले वर्षों के स्कोरकार्ड प्राप्त कर सकें और उचित प्रमाणीकरण के बाद उन्हें उम्मीदवारों को उपलब्ध कराया जा सके"।
कितने दिनों तक रखें जाते हैं रिकोर्ड?
एनटीए ने बताया कि पुराने NEET स्कोरकार्ड को डिजिलॉकर के जरिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, एजेंसी ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में छात्रा का NEET-UG 2020 स्कोरकार्ड उपलब्ध नहीं करा सकती, क्योंकि नियमों के अनुसार परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड परिणाम घोषित होने के 90 दिन बाद तक ही सुरक्षित रखे जाते हैं।
एजेंसी ने कमीशन को बताया कि RTI एप्लीकेशन दाखिल होने से पहले ही उन रिकॉर्ड्स को हटा दिया गया था। इसलिए एजेंसी के पास छात्रा को स्कोरकार्ड की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।
रिकॉर्ड न होने पर नहीं दी जा सकती जानकारी
अपील करने वाली छात्रा का कहना था कि उसकी NEET योग्यता स्थिति एनटीए का स्थायी रिकॉर्ड है और FMGE पात्रता सत्यापन के लिए उसे इन दस्तावेजों की आवश्यकता है। उसने तर्क दिया कि जानकारी उपलब्ध न कराना आरटीआई कानून के तहत सरकारी संस्थाओं की रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी के खिलाफ है।
हालांकि, सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने एनटीए के पक्ष को सही माना। उन्होंने कहा कि CPIO केवल वही जानकारी दे सकता है जो उसके कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध हो। आरटीआई अधिनियम के तहत किसी संस्था को नई जानकारी तैयार करने या ऐसा रिकॉर्ड बनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जो उसके पास मौजूद ही न हो।