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Marathi: महाराष्ट्र में कक्षा एक से दस तक मराठी हुई अनिवार्य, नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी सख्त कार्रवाई

Mon, 29 Jun 2026 03:40 PM IST
Shahin Praveen एएनआई, मुंबई
एएनआई, मुंबई Published by: Shahin Praveen Updated Mon, 29 Jun 2026 03:40 PM IST
सार

Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी भाषा को अनिवार्य करने का फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Maharashtra govt makes Marathi language compulsory from Classes 1 to 10 in all schools
महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे - फोटो : facebook.com/dadajibhuseofficial/

विस्तार

Maharashtra Govt: महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी भाषा अनिवार्य होगी। उन्होंने निर्देश का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि सरकार मराठी भाषा और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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मराठी पढ़ाने में लापरवाही पर स्कूलों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने घोषणा की कि राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं और नियम का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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यह मामला बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर द्वारा उठाए गए एक सवाल के दौरान सामने आया। उन्होंने चिंता जताई कि कई स्कूल अभी भी मराठी भाषा को अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ा रहे हैं। चर्चा के दौरान कई विधायकों ने कहा कि नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर लगाया जाने वाला जुर्माना बहुत कम है और मौजूदा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।

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मराठी भाषा के संरक्षण और शिवाजी महाराज के इतिहास पर सरकार का विशेष जोर

चिंताओं का जवाब देते हुए, भुसे ने कहा, "महाराष्ट्र सरकार मराठी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में एक विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें सभी स्कूलों में मराठी की अनिवार्य शिक्षा की समीक्षा की जाएगी।"

मंत्री ने कहा, "यदि निरीक्षण के दौरान कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित स्कूलों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

भुसे ने स्कूली किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को शामिल करने के बारे में भी बात की और बताया कि इसे काफी बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि जहां पहले दूसरे एजुकेशन बोर्ड की किताबों में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सिर्फ डेढ़ कॉलम ही होता था, वहीं अब केंद्र सरकार की मंजूरी से इसे बढ़ाकर 22 पेज का कर दिया गया है, जिससे छात्र मराठा शासक के जीवन और उनके योगदान को बेहतर ढंग से समझ सकें।

मंत्री ने फिर से कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा को मजबूत करने और यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि छात्र छत्रपति शिवाजी महाराज की शानदार विरासत के बारे में जानें।

CBSE की नई भाषा नीति के बीच महाराष्ट्र ने मराठी शिक्षा पर सख्ती बढ़ाई

भुसे ने कहा कि सभी स्कूलों को नए नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। यदि कोई स्कूल मराठी भाषा को अनिवार्य रूप से नहीं पढ़ाता है या नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब CBSE ने देशभर के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने की योजना की घोषणा की है। हालांकि, CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। वहीं, अभी 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।

CBSE के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, उन्हें अब इनके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। बोर्ड ने यह भी आश्वासन दिया है कि नई व्यवस्था के लिए जरूरी अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।

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