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एनसीईआरटी: स्कूल के बच्चे समझेंगे नई कर व्यवस्था, पहली बार 9वीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया व्यक्तिगत आयकर

Thu, 01 Oct 2026 05:22 PM IST
आकाश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 01 Oct 2026 05:22 PM IST
सार

NCERT: एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी' किताब में नई कर व्यवस्था के स्लैब और टैक्स गणना समझाई गई है। अध्याय में पुरानी कर व्यवस्था का उल्लेख नहीं है और कर भुगतान को नागरिक जिम्मेदारी बताया गया है।
 

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NCERT Class 9 Curriculum Adds Income Tax, New Tax Regime Explained With Slabs
Income Tax In NCERT Books - फोटो : AI Generated

विस्तार

Income Tax In NCERT: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है। नई किताब में विद्यार्थियों को आयकर की स्लैब आधारित गणना समझाई गई है। खास बात यह है कि अध्याय में केवल नई कर व्यवस्था के तहत आयकर की गणना बताई गई है। पुरानी कर व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है।

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किताब में बताया गया है कि टैक्स का ईमानदारी से और समय पर भुगतान करना हर नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल देश के विकास के लिए होता है।

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नई किताब में आयकर की स्लैब आधारित गणना

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब का नाम ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ है। इसे मंगलवार को जारी किया गया। यह नई शैक्षणिक सत्र शुरू होने के करीब छह महीने बाद जारी हुई है। किताब के पहले भाग को जून में जारी किया गया था।

एनसीईआरटी के प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, अब कक्षा 9 के विद्यार्थी नई कर व्यवस्था के तहत वास्तविक स्लैब के आधार पर आयकर की गणना कर सकेंगे। इस आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तक में इस तरह की गणना को शामिल करना पहली बार हुआ है।

किताब में कर भुगतान को केवल वित्तीय प्रक्रिया के तौर पर नहीं समझाया गया है। इसे नागरिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि करों का ‘ईमानदारी से और समय पर’ भुगतान करना हर नागरिक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
 

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‘व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन’ अध्याय में समझाया गया पैसा संभालना

आयकर से जुड़ी जानकारी ‘मैनेजिंग योर पर्सनल फाइनेंस’ अध्याय में दी गई है। अध्याय की शुरुआत इस बात से होती है कि पैसे का प्रबंधन करने की यात्रा बचपन से ही शुरू हो जाती है।

किताब में बताया गया है कि पैसे का सही प्रबंधन केवल अधिक कमाई करने तक सीमित नहीं है। इसमें जीवन के हर चरण में सोच-समझकर वित्तीय फैसले लेना भी शामिल है। इसमें खर्च करना, बचत, निवेश, जोखिम से सुरक्षा, जिम्मेदारी से कर्ज लेना और करों का भुगतान करना शामिल है।

किताब के अनुसार, व्यक्ति आज जो वित्तीय फैसले लेता है, उनका असर उसके भविष्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ये फैसले वित्तीय स्थिरता हासिल करने और आर्थिक अवसरों व चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी प्रभावित करते हैं।

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नई कर व्यवस्था के स्लैब और गणना के चरण

  • अध्याय में नई आयकर व्यवस्था के तहत कर स्लैब की एक तालिका दी गई है।
  • इसके बाद किताब में दिए गए स्लैब के आधार पर कर देयता की गणना करने के चरण भी समझाए गए हैं।
  • किताब में कहा गया है कि भारत में आयकर की गणना के लिए स्लैब व्यवस्था लागू है।
  • इसके बाद नई कर व्यवस्था के तहत आयकर स्लैब का चार्ट दिया गया है।
  • खास बात यह है कि इस अध्याय में पुरानी कर व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

कब आई थी नई कर व्यवस्था?

  • भारत में नई कर व्यवस्था पहली बार फरवरी 2020 के केंद्रीय बजट में पेश की गई थी। इसे वित्त वर्ष 2020-21 से लागू किया गया।
  • नई कर व्यवस्था में अपेक्षाकृत कम कर दरों का प्रावधान किया गया। इसके बदले करदाताओं को ज्यादातर छूट और कटौतियों का लाभ छोड़ना होता है।
  • 1 अप्रैल 2023 से नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट कर व्यवस्था बना दिया गया।
  • इसका मतलब है कि करदाता को स्वत: नई कर व्यवस्था में रखा जाता है, जब तक वह विशेष रूप से पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनता।

व्यक्तिगत वित्त के पांच प्रमुख आधार भी बताए

अध्याय में व्यक्तिगत वित्त के स्तंभों के बारे में भी जानकारी दी गई है। इनमें आय, बजट बनाना, बचत, निवेश तथा सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन शामिल हैं।

  • आय: कमाई
  • बजट बनाना: खर्च की योजना बनाना
  • बचत: भविष्य के लिए धन सुरक्षित रखना
  • निवेश: धन को बढ़ाना
  • सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन: वित्तीय जोखिमों से बचाव

कम उम्र में निवेश की अहमियत भी समझाई

  • किताब में कम उम्र में निवेश की ताकत के बारे में भी बताया गया है। निवेश के विकल्पों के तौर पर सावधि जमा, बॉन्ड, शेयर और म्यूचुअल फंड का उल्लेख किया गया है।
  • इस तरह कक्षा 9 के विद्यार्थियों को व्यक्तिगत वित्त के तहत कमाई से लेकर खर्च, बचत, निवेश, जोखिम प्रबंधन और कर भुगतान तक की बुनियादी जानकारी दी गई है।
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