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Hindi News ›   Education ›   NTA Yet to Build 500 Exam Centres After Nine Years, Key Reform Decisions Still Pending

NTA: नौ साल में नहीं बना एनटीए का एक भी परीक्षा केंद्र, किराये के भरोसे व्यवस्था; कैबिनेट का फैसला अब भी अधूरा

Mon, 03 Aug 2026 04:12 AM IST
शिवम गर्ग सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 03 Aug 2026 04:12 AM IST
सार

देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी एनटीए सुधारों के दावे तो लगातार कर रही है, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है। नौ साल बाद भी अपने परीक्षा केंद्र नहीं बन पाए हैं और पूरी व्यवस्था अब भी किराये के भरोसे चल रही है।

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NTA Yet to Build 500 Exam Centres After Nine Years, Key Reform Decisions Still Pending
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नीट पेपर लीक के बाद प्रधानमंत्री के दबाव, छात्रों के प्रदर्शन और विपक्ष के सवालों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सुधारों के नए-नए दावे कर रही है, पर यह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनटीए ने हाल में टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन अधिकारी (जीएम-टीसीएनओ) का विज्ञापन निकाला है। इस अधिकारी का काम मानक परीक्षा केंद्र की तलाश करना होगा।

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चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्रीय कैबिनेट ने 2017 में एनटीए गठन की मंजूरी देते समय परीक्षार्थियों की संख्या के अनुरूप खुद के परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव पास किया था। तब 500 सेंटर की जरूरत महसूस की गई थी। करीब नौ साल बीतने के बाद भी एनटीए खुद का केंद्र नहीं बना सका और उन्हें किराये पर ले रहा है। शिक्षा मंत्रालय व एनटीए की लापरवाही इसी से समझी जा सकती है कि कैबिनेट के कई फैसले अभी लागू नहीं हो सके हैं।
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व्यवस्था किराये पर: एनटीए गठन के अधिकतर फैसले आज तक लागू नहीं
अमर उजाला के पास मौजूद सरकारी दस्तावेज  के मुताबिक, तहसील व जिला स्तर पर ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में कंप्यूटर आधारित एनटीए केंद्र बनने थे। यदि कैबिनेट के ये फैसले लागू होते, तो नीट-यूजी 2024 में गड़बड़ी और नीट 2026 में पेपर लीक शायद नहीं होता, क्योंकि पेपर परीक्षा केंद्र से ही खुलकर आगे बंटा था। इसके बाद इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन समिति ने भी केंद्रों के निर्माण की सिफारिश की थी, जो दो साल से फाइलों में है।
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अधूरेपन की लंबी फेहरिस्त
एनटीए डीजी की सहायता के लिए नौ वर्टिकल, एक शासी मंडल और शिक्षाविद अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान भी अधूरा पड़ा है। एनटीए को उम्मीदवारों की फीस से 250 छात्रों की क्षमता वाले अपने परीक्षा भवन या सरकारी स्कूल-कॉलेज तैयार करने थे, जिन्हें अन्य परीक्षाओं के लिए किराये पर देकर खर्च जुटाया जाना था। इसमें कंप्यूटर, सीसीटीवी, डेस्क, पानी, शौचालय  जैसी व्यवस्थाएं एनटीए को ही  करनी थीं। यह भी अधूरा है।

जेईई मेन के अलावा कोई परीक्षा दो बार नहीं
ग्रामीण छात्रों को राष्ट्रीय परीक्षाओं से पहले व्यावहारिक प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट दस्तावेजों तक सीमित रह गया है। हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर के लिए सिफारिश किए गए मोबाइल टेस्ट सेंटर भी अधर में लटके हैं। दस्तावेज के मुताबिक सभी परीक्षाएं साल में दो बार ऑनलाइन मोड में होनी थीं, ताकि छात्रों को तनाव से दूर रखा जा सके। 2018 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने लागू कर दिया, पर एनटीए स्तर पर यह व्यवस्था जेईई मेन में ही लागू हो पाई।

सीबीआई जांच का हाल
भर्ती परीक्षा से जुड़े 158 मामलों में सीबीआई अपनी जांच कब की पूरी कर चुकी है, पर देश की विभिन्न अदालतों में अब तक सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। इनमें से कुछ मामले दो दशक से भी ज्यादा पुराने हैं। जांच एजेंसी अब इन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने की तैयारी कर रही है। ये फास्ट ट्रैक कोर्ट नए पेपर लीक रोधी कानून के तहत अलग-अलग राज्यों में बनाए जा रहे हैं।

दिल्ली में 25, यूपी में 10 मामले

  • दिल्ली में वर्ष 2000 से अब तक 25 मामलों की सीबीआई जांच पूरी हो चुकी है। इनमें 2010-11 की एम्स पीजी भर्ती परीक्षा, दिल्ली यूनिवर्सिटी मेडिकल एवं डेंटल प्रवेश परीक्षा, 2004 में कैट और 2013 की एसएससी भर्ती व शिक्षकों की भर्ती से जुड़े मामले शामिल हैं।
  • यूपी व प. बंगाल में 10-10 मामले हैं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 3-3 मामले हैं। झारखंड-कर्नाटक में 5-5, महराष्ट्र में तीन, राजस्थान में 8, तमिलनाडु में 14 मामले लंबित हैं।
  • बिहार में नीट, 2024 से जुड़े तीन समेत पांच मामले अटके हैं।

बढ़ती ही जा रही एनटीए की कमाई
वर्ष 2018 में गठन के वक्त सरकार ने एनटीए को 25 करोड़ रुपये दिए थे। उसके बाद से एजेंसी परीक्षार्थियों से मिलने वाले आवेदन शुल्क से कमाई कर रही है। एनटीए की 2019-20 में आय 504 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1117 करोड़ हो गई।

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