Arunachal: 189 वर्षों के अंतराल के बाद अरुणाचल में खोजी गई दुर्लभ वनस्पति, वैज्ञानिकों ने की पुष्टि
Rare Plant Species: अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में 189 साल बाद दुर्लभ पौधे हेनकेलिया मोनोफिला की खोज हुई है। यह खोज पूर्वी हिमालय के वनस्पति अभिलेखों के लिए अहम मानी जा रही है।
विस्तार
Arunachal: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश में लगभग 189 वर्षों के बाद एक दुर्लभ पौधे की प्रजाति को फिर से खोजा है। अधिकारियों के अनुसार यह प्रजाति लोहित जिले में सर्वेक्षण के दौरान मिली।
इस दुर्लभ पौधे का नाम हेनकेलिया मोनोफिला है, जिसका 19वीं सदी की शुरुआत से कोई रिकॉर्ड नहीं था। यह खोज पूर्वी हिमालय के वनस्पति अभिलेखों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अरुणाचल प्रदेश में हेनकेलिया मोनोफिला की पुनः खोज
गेस्नेरिएसी कुल से संबंधित, हेनकेलिया मोनोफिला एक बारहमासी शाकीय पौधा है जो आमतौर पर आर्द्र वन वातावरण में पाया जाता है। हेनकेलिया वंश की प्रजातियों में आमतौर पर सीधे या थोड़े रेंगने वाले तने और सरल पत्तियां होती हैं जो अंडाकार या भाले के आकार की हो सकती हैं।
पौधे कक्षीय पुष्पक्रम उत्पन्न करते हैं जिनमें एक या अनेक नलिकाकार या कीप के आकार के फूल होते हैं, जो अक्सर सूक्ष्म रंग के होते हैं। इनके फल कई छोटे बीजों से युक्त लंबे कैप्सूल के रूप में विकसित होते हैं, जिससे ये उपयुक्त पारिस्थितिक क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से प्रजनन करने में सक्षम होते हैं।
वनस्पतिशास्त्रियों का कहना है कि इस तरह की खोजें अरुणाचल प्रदेश में निरंतर क्षेत्र सर्वेक्षण और संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं, जिसे भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता केंद्रों में से एक माना जाता है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वैज्ञानिकों को दी बधाई
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस पुनर्खोज पर वैज्ञानिकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने X पर एक पोस्ट में कहा, "लगभग 189 वर्षों के बाद अरुणाचल प्रदेश में पाई जाने वाली एक दुर्लभ पादप प्रजाति, हेन्केलिया मोनोफिला की उल्लेखनीय पुनर्खोज के बारे में जानकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की टीम को मेरी हार्दिक बधाई।"
उन्होंने कहा कि लोहित जिले से हुई यह पुनर्खोज राज्य की असाधारण जैव विविधता को उजागर करती है।
खांडू ने कहा, "इस तरह की खोजें न केवल वैश्विक वनस्पति ज्ञान में वृद्धि करती हैं, बल्कि हमें हमारे राज्य के पारिस्थितिक खजानों की याद भी दिलाती हैं।"
मुख्यमंत्री ने इस अनूठी प्रजाति के दस्तावेजीकरण और संरक्षण में लगे शोधकर्ताओं के समर्पित प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।
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