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किसान परिवार से IPS और फिर राजनीति तक का सफर: के अन्नामलाई की संघर्ष और बदलाव की कहानी, जिसने सबको चौंका दिया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 08 Jun 2026 07:04 AM IST
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सार

पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई, जिन्हें ‘सिंघम आईपीएस’ कहा जाता है, अब राजनीति में एक मजबूत पहचान बना चुके हैं। जानिए उनकी पुलिस सेवा से लेकर राजनीति और जन आंदोलन तक की पूरी कहानी...

From Singham IPS to Political Firebrand: The Rise and Journey of K. Annamalai
कुप्पुसामी अन्नामलाई - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

30 जनवरी, 2019। मामला था दक्षिण बंगलूरू के कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन का। सोशल मीडिया पर एक वीडियो आग की तरह फैल रहा था, जिसमें थाने के पुलिसकर्मी एक महिला के साथ बदसलूकी करते नजर आ रहे थे। अमूमन ऐसे मामले जांच के बाद ठंडे पड़ जाते हैं। पर, इस बार कुछ और होने वाला था, क्योंकि यह थाना एक तेज-तर्रार, ईमानदार और निडर कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले युवा आईपीएस अधिकारी की जद में आता था। जब उसने मामले की गहन जांच कराई, तो एक-दो नहीं, बल्कि पूरे थाने की कार्यप्रणाली ही कटघरे में आ गई। तब, उस युवा आईपीएस ने बिना किसी दबाव के एक ही झटके में, थाने के 78 में से 71 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया। उनकी इसी छवि के कारण लोगों ने उन्हें 'सिंघम' कहकर बुलाना शुरू कर दिया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने आईपीएस की नौकरी छोड़ दी और राजनीति में प्रवेश किया। पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने चुनावी रणनीति को लेकर मतभेदों के कारण बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ‘अन्नामलाई मक्कल इयक्कम’ नाम से एक नया जन आंदोलन शुरू किया, जिससे लगभग 14 लाख लोग जुड़ चुके हैं।



अपना नाम खुद चुना
पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई का पूरा नाम कुप्पुसामी अन्नामलाई है। उनका जन्म तमिलनाडु के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और आईआईएम, लखनऊ से एमबीए किया, तथा 2011 में यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस अधिकारी बने। वर्ष 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एक सीनियर अधिकारी के निधन की घटना ने उन्हें जीवन के उद्देश्य पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी। 2019 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में प्रवेश किया। वह राजनीति में रजनीकांत के साथ शुरुआत करना चाहते थे, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल हुए और 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
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किताब भी लिखी
अन्नामलाई ने अपनी किताब 'स्टेपिंग बियॉन्ड खाकीरिवेलेशंस ऑफ ए रियल-लाइफ सिंघम' में न सिर्फ पुलिस सेवा के अपने अनुभवों को, बल्कि जीवन की गलतियों, दुविधाओं और उनसे मिली सीखों को भी बेहद ईमानदारी से साझा किया है। उनकी राजनीति का प्रमुख आधार वंशवाद और व्यक्तिपूजा का विरोध रहा है। यही कारण है कि युवा पीढ़ी उनकी जबर्दस्त फैन है। भाजपा छोड़ने के बाद शुरू किए गए नए आंदोलन में भी उन्होंने इसे केंद्रीय मुद्दा बनाया है और शायद यही वजह है कि उनके इस्तीफे के बाद भारी तादाद में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी छोड़ दी। उनकी आक्रामक शैली के कारण स्थानीय मीडिया में उन्हें 'उग्रम' भी कहा जाता था। उनके विरोधी उन्हें बेहद आक्रामक नेता मानते हैं।
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अपनी माटी से लगाव
आईपीएस की नौकरी छोड़ने के बाद अन्नामलाई का सपना राजनीति में आने का नहीं था, बल्कि वह अपने गांव जाकर जैविक और प्राकृतिक खेती करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने 2020 में बाकायदा 'वी द लीडर्स फाउंडेशन' नाम से एक गैर-सरकारी संगठन की शुरुआत भी की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास, जैविक खेती और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। इसके बाद, बड़े पैमाने पर समाज सेवा करने की इच्छा ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। राजनीति में सक्रिय रहते हुए ही उन्होंने 2024 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की चेविनिंग गुरुकुल फेलोशिप में भी भाग लिया था।

जलीकट्टू, फिल्म और साहित्य
अन्नामलाई को इतिहास, अध्यात्म, राजनीति और अर्थशास्त्र पर आधारित गंभीर पुस्तकें पढ़ने का शौक है। वह अपनी चर्चाओं में अक्सर तमिल के तिरुक्कुरल जैसे क्लासिक साहित्य का संदर्भ देते हैं। उन्हें प्रकृति के करीब रहना और ट्रैकिंग करना पसंद है, तो वह तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जलीकट्टू और पारंपरिक लोक कलाओं के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। अन्नामलाई 2024 में एक कन्नड़ फिल्म ‘अरब्बी’ में एक स्विमिंग कोच की भूमिका (कैमियो रोल) भी अदा कर चुके हैं।

हार के बाद की सक्रियता
भले ही अन्नामलाई 2024 में कोयंबटूर से चुनाव हार गए थे, लेकिन उन्हें लगभग 4.4 लाख वोट मिले। उनका वोट शेयर भी 30 फीसदी से ऊपर रहा, जो आम जनमानस में उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। यही वजह है कि भाजपा ने 2024 के चुनावी नतीजों का विश्लेषण करने के बाद कोयंबटूर की कई विधानसभा सीटों को भविष्य में जीत की संभावनाओं वाली सीटों के रूप में चिन्हित किया।

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