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Yang Shuang-zi: यांग शुआंग-जी, इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2026 जीतने वाले उपन्यास 'ताइवान ट्रैवलॉग' की लेखिका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Pavan Updated Mon, 25 May 2026 08:59 AM IST
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सार

Yang Shuang-zi Author of Taiwan Travelogue: यांग शुआंग-जी इन दिनों चर्चा में हैं। क्योंकि वे इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2026 जीतने वाले उपन्यास 'ताइवान ट्रैवलॉग' की लेखिका हैं। बता दें कि, इतिहास में पहली बार किसी मंदारिन भाषा के उपन्यास ने अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीता है। दुनिया उन्हें एक लेखिका के रूप में जानती है, पर उनकी एक पहचान ऐसी बहन की भी है, जिसने शोक को अपनी सबसे बड़ी रचनात्मक शक्ति बना लिया। यांग शुआंग-जी ने अपनी दिवंगत जुड़वां बहन की यादों को शब्दों में ढालकर ऐसा साहित्य गढ़ा, जिसने इतिहास रच दिया।

Yang Shuang-zi, author of the International Booker Prize 2026 winning novel 'Taiwan Travelogue'
यांग शुआंग-जी, 'ताइवान ट्रैवलॉग' की लेखिका - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

साल 2015 की एक धुंधली सुबह... ताइवान के ताइचुंग शहर का एक छोटा, शांत कमरा। हवा में एक भारी सन्नाटा था। एक युवा लेखिका अपनी जुड़वां बहन की मौत के कारण जिंदगी के सबसे गहरे सदमे से जूझ रही थी। उसका दर्द इतना गहरा था कि मानो शब्दों ने उसका साथ छोड़ दिया हो और उसकी कलम की स्याही हमेशा के लिए सूख गई हो। पर, शोक के गहरे समंदर में डूबने के बजाय, उसने अपनी दिवंगत बहन को एक अनूठी श्रद्धांजलि देने का फैसला किया। उसने तय किया कि वह अपनी बहन के अधूरे सपनों को अपनी कहानियों के जरिये जिंदा रखेगी। यहीं से उसके एक अनोखे साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इस सफर को एक नई पहचान देने के लिए ताइवान की युवा लेखिका यांग शुआंग-जी ने अपना असली नाम छोड़कर नया नाम अपनाया, जिसका मंदारिन में शाब्दिक अर्थ है-‘जुड़वां बच्चे’। बहन की यादों और भावनाओं को शब्दों में समेटते हुए उन्होंने एक ऐसा साहित्यिक सफर शुरू किया, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। मई 2026 में उनके उपन्यास ‘ताइवान ट्रैवलॉग’ ने इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीतकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब मूल रूप से मंदारिन भाषा में लिखे गए किसी उपन्यास को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला, जबकि इससे पहले यह कृति 2024 का ‘नेशनल बुक अवॉर्ड फॉर ट्रांसलेटेड लिटरेचर’ भी जीत चुकी है।


अनोखी बस्ती में जन्म
यांग शुआंग-जी का जन्म 10 जुलाई, 1984 को ताइवान के ताइचुंग शहर में एक 'सैनिक आश्रितों के गांव' में हुआ था। यह युद्ध के बाद बनी ताइवान की एक अनोखी बस्ती थी, जिसे चीनी सेना से जुड़े परिवारों के लिए बनाया गया था। बचपन में माता-पिता के अलग होने के बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया। उन्होंने नेशनल चुंग ह्सिंग यूनिवर्सिटी से चीनी साहित्य और ताइवानी साहित्य में पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने लेखन शुरू किया और 18 साल की उम्र में पहला उपन्यास प्रकाशित किया। उनका चर्चित उपन्यास ताइवान ट्रैवलॉग साल 1930 के दशक के जापानी-उपनिवेश काल के ताइवान की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
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साहित्य का ककहरा
आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकटों के बीच, दोनों बहनों ने बचपन से ही खुद को साहित्य की दुनिया में डुबो दिया था, जो उनके लिए वास्तविक जीवन के तनाव से बचने का जरिया बन गया। यांग श्वांग-जी ने 15 वर्ष की आयु से ही अपनी आजीविका चलाने के लिए बेकरी और फूड स्टॉल जैसी जगहों पर पार्ट-टाइम काम करना शुरू कर दिया था। अक्सर लोग यांग शुआंग-जी को उनके फिक्शन (कथा-साहित्य) रचनाओं के लिए ही जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने मांगा स्क्रिप्ट, निबंध, साहित्यिक आलोचना और यहां तक कि वीडियो गेम की स्क्रिप्ट भी लिखी है।
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‘ताइवान ट्रैवलॉग’ का रहस्य
ताइवान ट्रैवलॉग को इस तरह रचा गया है, मानो वह जापान के अतीत से मिली कोई भूली-बिसरी यात्रा-डायरी हो। जब यह किताब पहली बार ताइवान में प्रकाशित हुई, तो पाठकों ने सचमुच इसे 1930 के दशक के किसी जापानी यात्री की असली डायरी मान लिया, क्योंकि इसके मुख्य पेज पर 'आओयामा चिजुको द्वारा लिखित, यांग शुआंग-जी द्वारा अनुवादित' लिखा हुआ था। बाद में पाठकों को पता चला कि जिस जापानी लेखक का नाम किताब में दिया गया था, दरअसल ऐसा कोई व्यक्ति है ही नहीं। यह पूरी तरह से यांग की कल्पना थी। इस भ्रम को असली दिखाने के लिए किताब में नकली संपादकीय टिप्पणियां, अनुवादक के नोट्स और बेहद बारीकी से गढ़े गए ऐतिहासिक संदर्भ जोड़े गए थे।

बहन का अधूरा सपना
यांग शुआंग-जी की सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी जुड़वां बहन जो-हुई ही थीं। उनका सपना था कि उपन्यासों के लिए एक छोटा प्रकाशन संस्थान शुरू करें और यूरी संस्कृति को स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय बनाएं। असमय मौत के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। वह अब उनके सपने को पूरा करना चाहती हैं। शुआंग की साहित्यिक प्रेरणा यांग चियान-हे हैं, जो जापानी औपनिवेशिक काल (1921-2011) के दौरान ताइवान की पहली महिला पत्रकार थीं।

छात्र आंदोलन और यूरी शैली
शुआंग 2008 के 'वाइल्ड स्ट्राबेरी मूवमेंट' और 2014 के सनफ्लावर स्टूडेंट मूवमेंट से जुड़ी रहीं, जिनका उनकी राजनीतिक और सांस्कृतिक सोच पर गहरा प्रभाव पड़ा। इन आंदोलनों ने उन्हें ताइवान के नजरिये से इतिहास और समाज को समझने तथा उसे अपने लेखन में अभिव्यक्त करने की प्रेरणा दी। उन्हें पढ़ने-लिखने, यात्राएं करने और कला में काफी दिलचस्पी है। वे पॉप-संस्कृति की प्रशंसक हैं। वह यूरी शैली में खासी रुचि रखती हैं। उन्हें ताइवानी व्यंजन मुआ-इन्न भी बेहद पसंद है।
 
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