CBSE: पश्चिम एशियाई देशों के प्राइवेट छात्रों के लिए मूल्यांकन फॉर्मूला तय, सुप्रीम कोर्ट ने निपटाई याचिका
Supreme Court: खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित सीबीएसई कक्षा 12 के प्राइवेट छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने नई मूल्यांकन नीति लागू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अब इन छात्रों के अंक तय करने के लिए अलग फॉर्मूला बनाया गया है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 जून) को उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित सीबीएसई कक्षा 12 के एक प्राइवेट अभ्यर्थी के परिणाम को लेकर शिकायत की गई थी। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय नीति अधिसूचित कर दी गई है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पश्चिम एशिया के देशों में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण रद्द हुई परीक्षाओं से प्रभावित छात्रों के लिए नई अखिल भारतीय नीति तैयार की गई है।
सऊदी अरब के छात्र ने दाखिल की थी याचिका
यह याचिका सऊदी अरब के अल जुबैल निवासी प्रांसु जिगरकुमार पटेल ने दायर की थी। वह सीबीएसई कक्षा 12 सुधार (Improvement) परीक्षा के प्राइवेट अभ्यर्थी थे।
याचिकाकर्ता का कहना था कि सीबीएसई ने 27 मार्च 2026 को खाड़ी देशों के प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाई थी, लेकिन उसमें नियमित छात्रों को शामिल किया गया था। प्राइवेट अभ्यर्थियों, विशेषकर सुधार परीक्षा देने वालों के बारे में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई थी। इसी कारण उनका परिणाम "Result Later (R.L.)" के रूप में रोका गया था।
याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा था कि इससे उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।
पहले भी सुनवाई कर चुका था सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 8 जून को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस समस्या का समाधान खोजने को कहा था। इसके बाद 13 जून को केंद्र ने अदालत को बताया था कि याचिकाकर्ता की शिकायत के समाधान के लिए एक नीति तैयार की जाएगी। उसी आधार पर मामले को 22 जून के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
प्राइवेट छात्रों के लिए क्या थी चुनौती?
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की दो श्रेणियां थीं- नियमित छात्र और प्राइवेट अभ्यर्थी। उन्होंने कहा कि नियमित छात्रों के लिए स्कूलों के पास आंतरिक मूल्यांकन, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक उपलब्ध थे, जिनके आधार पर 27 मार्च की मूल्यांकन योजना बनाई गई थी। लेकिन प्राइवेट अभ्यर्थियों के पास ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसी वजह से उनके लिए अलग व्यवस्था की जरूरत पड़ी।
नई नीति में क्या है फॉर्मूला?
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि 21 जून 2026 को अधिसूचित नई नीति के तहत प्राइवेट अभ्यर्थियों के लिए अलग मूल्यांकन फॉर्मूला तैयार किया गया है।
इस फॉर्मूले के अनुसार जिन विषयों की परीक्षा रद्द हुई थी, उनमें अंक इस आधार पर तय किए जाएंगे-
- कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 40 प्रतिशत
- कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 60 प्रतिशत
कक्षा 10 के प्रदर्शन के लिए छात्र के सर्वाधिक अंक वाले तीन विषयों का औसत लिया जाएगा और उसे संबंधित विषयों के अधिकतम अंकों के अनुसार सामान्यीकृत (Normalised) किया जाएगा।
याचिकाकर्ता के मामले में कैसे हुआ मूल्यांकन?
अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षाएं आयोजित हुई थीं, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस की परीक्षाएं रद्द हो गई थीं।
इसलिए फिजिक्स और केमिस्ट्री में वास्तविक प्राप्तांक (Actual Marks) लिए गए, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस के अंक नई मूल्यांकन नीति के तहत निर्धारित किए गए।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इस तरीके से तैयार किए गए परिणाम में याचिकाकर्ता के अंक उनके पहले के प्रदर्शन से अधिक आए हैं। यह परिणाम उन्हें ई-मेल के माध्यम से भेज दिया गया है और इसे डिजिलॉकर पर भी अपडेट किया जाएगा।
असंतुष्ट छात्र दोबारा परीक्षा दे सकेंगे
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि यदि कोई छात्र मूल्यांकन के आधार पर दिए गए अंकों से संतुष्ट नहीं है तो वह अगली नियमित परीक्षा में शामिल हो सकता है।
कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने परिणाम घोषित होने की बात स्वीकार करते हुए अदालत से अनुरोध किया कि उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने और सीबीएसई नियमों के अनुसार पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) कराने का अधिकार सुरक्षित रखा जाए। हालांकि पीठ ने कहा कि ऐसी राहतें मूल याचिका में नहीं मांगी गई थीं।
न्यायमूर्ति भट्टी ने टिप्पणी की कि अदालत आमतौर पर परीक्षा संबंधी मामलों में हस्तक्षेप करने में संयम बरतती है। उन्होंने कहा कि नई नीति और याचिकाकर्ता को परिणाम उपलब्ध कराए जाने के बाद उसकी मुख्य शिकायत का पर्याप्त समाधान हो गया है।
इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा 21 जून को अधिसूचित नीति और सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता की कोई अन्य शिकायत शेष रहती है तो वह कानून के अनुसार उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेने के लिए स्वतंत्र होगा।