सीट का समीकरण: बीते तीन चुनाव में दो बार सपा तो एक बार भाजपा को मिली जीत, ऐसा है आर्य नगर का चुनावी इतिहास
कानपुर नगर की आर्य नगर विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई। 2017 और 2022 में हुए पिछले चुनाव से इस सीट से सपा के अमिताभ बाजपेयी ने जीत हासिल की है। वहीं, 2012 में यहां से भाजपा को जीत मिली थी। आइये इस सीट के इतिहास के बारे में जानते हैं...
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विस्तार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। कहीं पुराने गढ़ बचाने की चुनौती है तो कहीं नए राजनीतिक विस्तार की कोशिश शुरु हो गई है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों के सहारे जनता के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहा है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं आर्य नगर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला कानपुर नगर है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, सीसामऊ, आर्य नगर, कानपुर कैंट (छावनी), गोविंदनगर, किदवई नगर, महाराजपुर और घाटमपुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम आर्य नगर विधानसभा सीट की बात करेंगे। कानपुर नगर की आर्य नगर विधानसभा सीट पहली बार साल 1967 में अस्तित्व में आई थी। उस समय यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट थी। 1967 के पहले चुनाव में कांग्रेस के जे. जाटव यहां से पहले विधायक चुने गए। 1969 में भी यह सीट SC आरक्षित रही और कांग्रेस के शिव लाल यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि 1974 के परिसीमन के बाद यह सीट सामान्य हो गई।
1974 के विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अब्दुल रहमान खान नश्तर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के सुरेन्द्र नाथ को 13,419 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अब्दुल रहमान खान नश्तर को 29,039 वोट मिले, जबकि सुरेन्द्र नाथ को 15,620 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
इस चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी (JNP) के बाबू बादरे विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अब्दुल रहमान खान नश्तर को 6,862 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बाबू बादरे को 26,641 वोट मिले, जबकि अब्दुल रहमान खान नश्तर को 19,779 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता के चलते लगातार हुए चुनाव
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980 के विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर इंडियन नेशनल कांग्रेस (आई) के अब्दुल रहमान खान नश्तर विजयी हुए। उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस (यू) के अख्तर हुसैन अख्तर को 10,796 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अब्दुल रहमान खान नश्तर को 21,517 वोट मिले, जबकि अख्तर हुसैन अख्तर को 10,721 वोट मिले।
1985 में कांग्रेस ने फिर जीता चुनाव
वहीं 1985 के विधानसभा चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के हाफिज मोहम्मद उमर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुरेन्द्र नाथ को 7,862 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1989 के विधानसभा चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट पर जनता दल (JD) की रेशमा आरिफ विजयी हुईं। उन्होंने मुस्लिम लीग (MUL) के मोहम्मद सुलेमान को महज 439 वोटों के अंतर से हराया।
1991 में पहली बार जीती भाजपा
इस विधानसभा चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के सत्यदेव पचौरी विजयी हुए। उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के मोहम्मद सुलेमान को 10,105 वोटों के अंतर से हराया।
1993: आर्य नगर में पहली बार जीती बसपा
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार आर्य नगर विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा महेश चंद्र विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सत्यदेव पचौरी को 5,068 वोटों के अंतर से हराया।
1996 के चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट से पहली बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने कब्जा किया। चुनाव में सपा के मुश्ताक सोलंकी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सत्यदेव पचौरी को 2,562 वोटों के अंतर से हराया।
सपा ने दोहराई जीत
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के हाजी मुश्ताक सोलंकी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अनंत मिश्रा उर्फ अंतू को 27,316 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी मुश्ताक सोलंकी को 46,448 वोट मिले, जबकि अनंत मिश्रा उर्फ अंतू मिश्रा को 19,132 वोट से संतोष करना पड़ा।
2007 में सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में आर्य नगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के इरफान सोलंकी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के हरीश मात्रेजा को 23,203 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इरफान सोलंकी को 36,376 वोट मिले, जबकि हरीश मात्रेजा को महज 13,173 वोट मिले।
वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने वापसी की। चुनाव में भाजपा के सलिल विश्नोई विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जितेंद्र बहादुर सिंह को 15,411 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सलिल विश्नोई को कुल 51,200 वोट मिले, जबकि सपा के जितेंद्र को 35,789 वोटों से संतोष करना पड़ा।
2017: भाजपा की लहर के बीच जीती सपा
इन चुनावों में राज्य में भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। हालांकि इसका असर कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर नहीं पड़ा, क्योंकि इस सीट से समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई को 5,723 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिताभ बाजपेयी को 70,993 वोट मिले, जबकि सलिल विश्नोई को 65,270 वोट मिले।
2022 में भी सपा ने जीती सीट
इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की आर्य नगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सुरेश अवस्थी को 7,924 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमिताभ बाजपेयी को 76,897 वोट मिले, जबकि सुरेश अवस्थी को 68,973 वोट मिले।