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Abhivyakti: सदियों पुराने सवाल पर 'अभिव्यक्ति' का प्रहार, गहराई से करती है इन सवालों की पड़ताल
Thu, 13 Aug 2026 10:01 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Thu, 13 Aug 2026 10:01 PM IST
सार
Abhivyakti Story: मैथिली में बनी फिल्म 'अभिव्यक्ति- फाइंडिंग देयर वॉइस' दिव्यांग बेटी को सामाजिक कलंक मानने वाले परिवार की कहानी है। बेटी के लिए मां का संघर्ष पूरी फिल्म की जान है।
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अभिव्यक्ति
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
फिल्म 'अभिव्यक्ति- फाइंडिंग देयर वॉइस' इसी साल फरवरी में रिलीज हुई है। इसके निर्देशक संजय झा हैं। इसमें मौसमी भारती, निकिता गुप्ता और मुरारी मोहन झा ने अहम किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी काफी चर्चा में हैं, जिसे संजय झा ने ही लिखी है।
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क्या है फिल्म की कहानी?
महज 74 मिनट की मैथिली फिल्म 'अभिव्यक्ति- फाइंडिंग देयर वॉइस' में नायिका कांति की संघर्ष और हिम्मत की कहानी दिखाई गई है। कांति हार नहीं मानती है। कांति पढ़ी-लिखी महिला है, लेकिन पहले बच्चे के जन्म के लिए उसे मायके आना पड़ता है। मिथिला के एक गांव में उसका मायका है। कांति एक सुंदर सी बच्ची छुटकी को जन्म देती है, लेकिन परिवार खुशी मनाने के बजाय निराश हो जाता है।
महज 74 मिनट की मैथिली फिल्म 'अभिव्यक्ति- फाइंडिंग देयर वॉइस' में नायिका कांति की संघर्ष और हिम्मत की कहानी दिखाई गई है। कांति हार नहीं मानती है। कांति पढ़ी-लिखी महिला है, लेकिन पहले बच्चे के जन्म के लिए उसे मायके आना पड़ता है। मिथिला के एक गांव में उसका मायका है। कांति एक सुंदर सी बच्ची छुटकी को जन्म देती है, लेकिन परिवार खुशी मनाने के बजाय निराश हो जाता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
बेटी को लेकर संघर्ष
हद तो तब होती है, जब कुछ दिन बाद यह पता चलता है कि छुटकी सुन नहीं सकती। परिवार इसे एक बीमारी के बजाय सामाजिक कलंक के रूप में देखने लगता है। यहां तक कि कांति का पति विकास भी दोनों से दूरी बना लेता है। यहीं से कांति का संघर्ष शुरू होता है, जो अंत तक जारी रहता है।
हद तो तब होती है, जब कुछ दिन बाद यह पता चलता है कि छुटकी सुन नहीं सकती। परिवार इसे एक बीमारी के बजाय सामाजिक कलंक के रूप में देखने लगता है। यहां तक कि कांति का पति विकास भी दोनों से दूरी बना लेता है। यहीं से कांति का संघर्ष शुरू होता है, जो अंत तक जारी रहता है।
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अभिव्यक्ति
- फोटो : सोशल मीडिया
लिंगभेद वाली सोच पर चोट
कौन है निर्देशक?
निर्देशक संजय झा की यह पहली फिल्म है और वह दर्शकों को अंत तक बांधने में सफल दिखाई देते हैं। स्थानीय कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।
- मिथिला माता सीता की भूमि है।
- जब वहीं से नारी के प्रति रूढ़िवादी सोच पर सवाल उठता है तो वह नए ढंग और अधिक मुखरता से सामने आता है।
- सवाल सदियों पुराना है, लिंगभेद। मगर मैथिली के क्षेत्रीय सिनेमा ने इसकी गहरी धंसी जड़ों पर प्रहार किया है।
- फिल्म इस सवाल की गहराई से पड़ताल करती है कि समाज में किसे अपनी बात कहने का अधिकार है और इसके लिए उसे क्या कीमत चुकानी पड़ती है।
कौन है निर्देशक?
निर्देशक संजय झा की यह पहली फिल्म है और वह दर्शकों को अंत तक बांधने में सफल दिखाई देते हैं। स्थानीय कलाकारों ने बढ़िया अभिनय किया है।