EXCLUSIVE: ‘बंदर’ की ओटीटी रिलीज पर रोक की मांग, बॉम्बे HC पहुंचीं शिकायतकर्ता; अनुराग-बॉबी पर लगाए गंभीर आरोप
Bandar OTT Release In Trouble: थिएटर के बाद ओटीटी पर आने से पहले अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘बंदर’ कानूनी विवाद में फंस गई है। करण ओबेरॉय रेप की एक शिकायतकर्ता ने इस फिल्म के मेकर्स के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानिए, क्या है यह पूरा मामला?
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विस्तार
अनुराग कश्यप अक्सर अपने बयानों को लेकर विवाद में फंसते हैं, अब वह अपनी एक फिल्म ‘बंदर’ को लेकर मुश्किल में फंस गए हैं। दरअसल फिल्म ‘बंदर’ अब कानूनी विवाद में फंस गई है। करण ओबेरॉय रेप केस की शिकायतकर्ता ने फिल्म की ओटीटी रिलीज पर रोक लगाने और मुआवजे की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
शिकायतकर्ता की ओर से फिल्म के मेकर्स, लेखक-निर्देशक अनुराग कश्यप, निर्माता निखिल द्विवेदी, अभिनेता बॉबी देओल और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ मामला दायर किया गया है।
शिकायतकर्ता की वकील मंशा भाटिया ने अमर उजाला से खास बातचीत में इस मामले के बारे में बताया?
क्या है शिकायतकर्ता का आरोप?
शिकायतकर्ता की वकील मंशा भाटिया का आरोप है कि ‘बंदर’ की कहानी उनके मुवक्किल द्वारा करण ओबेरॉय के खिलाफ दर्ज कराए गए रेप केस से काफी मिलती-जुलती है। उनका दावा है कि फिल्म में केस से जुड़े कई ऐसे तथ्य और बचाव के तर्क दिखाए गए हैं, जो उनके मुताबिक उसी मामले से जुड़े हैं।
मंशा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, ‘हाल ही में हमने फिल्म ‘बंदर’ के बारे में जाना, जिसमें बॉबी देओल और कई दूसरे कलाकार हैं। फिल्म देखने के बाद हमें लगा कि यह काफी हद तक उस रेप केस से मिलती-जुलती है, जो मेरे क्लाइंट ने करण ओबेरॉय के खिलाफ फाइल किया था।’
उन्होंने आगे कहा, ‘फिल्म में जो भी तथ्य बताए गए हैं, वे हमारे केस की डिटेल्स से काफी मिलते हैं। ये ऐसी डिटेल्स हैं जिन्हें बहुत सीमित लोग जानते थे। इसलिए जाहिर तौर पर हमें लगा कि रेप केस का आरोपी भी किसी न किसी तरह से इसमें शामिल है।’
फिल्म ‘बंदर’ को लेकर क्या है आपत्ति?
वकील मंशा भाटिया का दावा है कि फिल्म में जिस तरह से कहानी और किरदारों को पेश किया गया है। वह भी उनके मुवक्किल के मामले से काफी मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘इसके बाद जब हमने और जानकारी जुटाई तो हमें पता चला कि ‘बंदर’ एक दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज सन्स’ से भी जुड़ी हुई है, जिसमें करण ओबेरॉय और पूजा बेदी भी नजर आए थे। फिल्म में किरदारों को जिस तरह से दिखाया गया है, वह भी काफी अहम है। यह वही बचाव हैं, जो करण ओबेरॉय ने मेरे क्लाइंट के मामले में लिए थे।’
क्यों की है ओटीटी रिलीज पर रोक की मांग?
वकील मंशा भाटिया की सबसे पहली मांग फिल्म की ऑनलाइन रिलीज पर रोक लगाने की है। इस बारे में उन्होंने कहा, ‘अभी हमारी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि ‘बंदर’ की ऑनलाइन रिलीज पर स्टे मिले। हमें पता ही नहीं था कि फिल्म कब थिएटर में रिलीज हुई और कब वहां से हट गई। लेकिन फिलहाल हम कम से कम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फिल्म की रिलीज रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसी वजह से हम हाईकोर्ट जा रहे हैं।’
वह आगे कहती हैं, ‘इसके साथ हम हर्जाना भी मांग रहे हैं, क्योंकि फिल्म देखने के बाद लोग मेरी क्लाइंट को पहचान पा रहे हैं।’
क्या शिकायतकर्ता महिला से अनुमति लिए बिना फिल्म बनी?
वकील का आरोप है कि फिल्म बनाने से पहले उनकी मुवक्किल से किसी तरह की अनुमति या सहमति नहीं ली गई। वह कहती हैं, ‘मेरी क्लाइंट से किसी ने बात नहीं की। न उनकी सहमति ली गई और न ही उन्हें अप्रोच किया गया। ऐसा नहीं है कि हम अपनी क्लाइंट की जिंदगी पर फिल्म बनाने की अनुमति देने वाले थे, लेकिन जिस तरह से उन्हें फिल्म में पेश किया गया है, वह बहुत खराब है। हमें इसके बारे में हाल ही में पता चला। उसके बाद हमने कानूनी नोटिस भेजे।’
शिकायककर्ता महिला की वकील मंशा ने बताया कि उनकी तरफ से फिल्म के मेकर्स और करण ओबेरॉय को कानूनी नोटिस भेजे गए थे। हालांकि, उनके मुताबिक नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
वह कहती हैं, ‘हमने कानूनी नोटिस भेजे थे। हमें उचित जवाब नहीं मिले। एक होल्डिंग लेटर मिला था। उसमें कहा गया था कि वे जवाब देंगे। कंपनी की तरफ से एक-दो लोगों ने जवाब दिया था, लेकिन उसके बाद हमारे नोटिस का कोई उचित जवाब नहीं आया।’
इस मामले पर अमर उजाला ने करण ओबेरॉय से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।