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एक्सक्लूसिव: साथी कलाकारों के साथ कैसा व्यवहार करते थे नाना पाटेकर? मनीष वाधवा ने सुनाया किस्सा
Thu, 08 Oct 2026 11:11 AM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:11 AM IST
सार
Nana Patekar Death: आज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। उनके निधन से कई सितारे गमगीन हैं। इस बीच साथी कलाकार मनीष वाधवा ने उनसे जुड़ा एक किस्सा सुनाया है। उन्होंने उनके स्वभाव पर बात की है।
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मनीष वाधवा, नाना पाटेकर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बॉलीवुड के सबसे मशहूर अभिनेताओं में से एक नाना पाटेकर का गुरुवार को सुबह निधन हो गया है। उन्हें गोवा के अस्पताल ले जाया गया। बताया जाता है कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अभिनेता के अचानक निधन से इंडस्ट्री हैरान है। इस मौके पर अभिनेता मनीष वाधवा ने अमर उजाला के साथ नाना पाटेकर से जुड़ा एक किस्सा साझा किया है। मनीष वाधवा और नाना पाटेकर ने 2024 की फिल्म 'वनवास' में साथ काम किया था।
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मनीष वाधवा
- फोटो : इंस्टाग्राम @manishwadhwa.in
पढ़िए मनीष वाधवा की जुबानी...
नाना पाटेकर के साथ काम करना मेरे लिए सिर्फ अपना काम करना नहीं था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला।
मुझे याद है, शिमला में जब हम एक सीन कर रहे थे, उस दिन हमारा पैकअप भी साथ में हुआ। जिस लोकेशन पर हम शूट कर रहे थे, उसके पास ही एक रेस्टोरेंट था। हम दोनों वहां साथ में खाना खाने गए। टेबल पर बैठकर कई चीजों पर बातचीत हुई।
यह खबर भी पढ़ें: एक्सक्लूसिव: अधूरा रह गया नाना का आखिरी वादा, तीन दिन बाद इस शो पर जाने वाले थे; शेखर सुमन ने सुनाया किस्सा
नाना पाटेकर के साथ काम करना मेरे लिए सिर्फ अपना काम करना नहीं था। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला।
मुझे याद है, शिमला में जब हम एक सीन कर रहे थे, उस दिन हमारा पैकअप भी साथ में हुआ। जिस लोकेशन पर हम शूट कर रहे थे, उसके पास ही एक रेस्टोरेंट था। हम दोनों वहां साथ में खाना खाने गए। टेबल पर बैठकर कई चीजों पर बातचीत हुई।
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नाना पाटेकर
- फोटो : सोशल मीडिया
नाना जी को दूसरों को खाना खिलाने का बहुत शौक था। उन्हें खुद बहुत ज्यादा खाने का शौक नहीं था। वह अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखते थे। बाहर से वह काफी सख्त दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर से बहुत नरम हैं। वह कलाकारों को सिर्फ डांटने या सुधारने में नहीं, बल्कि उन्हें सिखाने में ज्यादा विश्वास रखते हैं।
उनके साथ काम करते हुए हमेशा लगता था कि वह आपको कुछ न कुछ सिखाना चाहते हैं। उनके साथ बिताए ऐसे कई पल मेरी यादों में हैं। वह जिस तरह से कलाकारों के साथ बात करते थे और उन्हें समझाते थे, उससे बहुत कुछ सीखने को मिलता था।
उनके साथ काम करते हुए हमेशा लगता था कि वह आपको कुछ न कुछ सिखाना चाहते हैं। उनके साथ बिताए ऐसे कई पल मेरी यादों में हैं। वह जिस तरह से कलाकारों के साथ बात करते थे और उन्हें समझाते थे, उससे बहुत कुछ सीखने को मिलता था।
नाना पाटेकर
- फोटो : इंस्टाग्राम
मुझे लगता है कि नाना जी के व्यक्तित्व का एक पहलू ऐसा है, जो बाहर से दिखाई नहीं देता। बाहर से वह सख्त लग सकते हैं, लेकिन अंदर से वह बहुत संवेदनशील और नरम इंसान हैं। उनके साथ काम करना और उन्हें इतने करीब से देखना मेरे लिए बहुत खास अनुभव रहा है। आज भी जब उन दिनों को याद करता हूं तो लगता है कि वह मेरे साथ मेरी कई यादें लेकर चल रहे हैं।