‘दहाड़’ के बाद विजय वर्मा ने क्यों ठुकराईं सीरियल किलर की भूमिकाएं? निगेटिव किरदारों को लेकर कही ये बात
Vijay Varma: विजय वर्मा ने आखिर क्यों सीरियल किलर की भूमिकाओं से दूरी बना ली? अभिनेता ने इसके पीछे की वजह बताई। साथ ही उन्होंने ग्रे शेड किरदारों को लेकर भी बात की। जानिए एक्टर ने क्या कुछ कहा…
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विजय वर्मा इन दिनों अपनी आगामी वेब सीरीज ‘मटका किंग’ के प्रमोशन में जुटे हैं। इसी दौरान विजय वर्मा ने बताया कि सस्पेंस-क्राइम सीरीज ‘दहाड़’ में सीरियल किलर की निगेटिव भूमिका निभाने के बाद, उन्हें कई इसी तरह के रोल ऑफर होने लगे थे। हालांकि, एक्टर ने इस तरह के किरदारों को इनकार कर दिया। अब उन्होंने बताया कि आखिर क्यों उन्होंने ‘दहाड़’ के सफल होने और अपने किरदार के लिए तारीफ मिलने के बावजूद इस तरह के किरदारों से दूरी बना ली?
दोहराव से बचने के लिए ठुकराईं सीरियल किलर की भूमिकाएं
इंडिया टुडे के साथ बातचीत के दौरान विजय वर्मा ने अपने किरदारों के चयन को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि ‘दहाड़’ के बाद मुझे कई सीरियल किलर की भूमिकाएं मिलीं, जिन्हें मैंने ठुकरा दिया। क्योंकि मैंने एक ऐसी भूमिका निभाई थी और मुझे लगा कि मैं उसमें अच्छा था। इसलिए मैं उसे दोहराना नहीं चाहता था। यह फैसला एक ही जैसे किरदारों से बचने और अलग-अलग तरह के किरदारों को तलाशने की उम्मीद से लिया था। भले ही इसके लिए मुझे उन किरदारों से दूरी बनानी पड़े, जिन्होंने मुझे सफलता और तारीफ दिलाई थी।
अलग-अलग तरह के किरदार निभाए
किरदारों को लेकर विजय वर्मा ने आगे कहा कि मुझे ऐसा लगा कि मैं कुछ समय के लिए बहुत ही गंभीर किरदारों से दूर रहना चाहता था। इसलिए मैंने 'जाने जान', 'आईसी 814: द कंधार हाईजैक' और अन्य प्रोजेक्ट किए। लेकिन हां, मैंने उनमें इतना भी मन नहीं लगाया कि यह जान सकूं कि वे इतने गंभीर हैं कि उन्हें ठुकरा दिया जाए। मैंने बस 'सीरियल किलर' सुना और कहा कि मैं यह नहीं करना चाहता। मैं पहले ही ऐसा किरदार निभा चुका हूं।
ग्रे शेड के प्रति दर्शकों का रहता है झुकाव
बातचीत के दौरान दर्शकों के निगेटिव और ग्रे शेड किरदारों के प्रति ज्यादा अट्रैक्ट होने पर विजय वर्मा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज की बात नहीं, यह हमेशा से ऐसा ही रहा है। देवदास को देखिए वह एक बेहद दोषपूर्ण किरदार है। दीवार को देखिए वह एक बेहद ग्रे शेड कैरेक्टर है, हीरो नहीं।
साहित्य ऐसे किरदारों से भरा पड़ा है जिनमें खामियां हैं। नाटक के आइडिया की उपज ही मानवीय खामियों से हुई है। वर्ना नाटक कहां है? विलियम शेक्सपियर से लेकर महाभारत तक, यही हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। इंसान की खामियों से ही हम जुड़ते हैं, यही वह प्रकाश है जो उस दरार से अंदर घुसती है।
वर्कफ्रंट की बात करें तो विजय वर्मा की ‘मटका किंग’ 17 अप्रैल से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम करेगी। यह सीरीज एक कपास व्यापारी के गैम्बलिंग का किंग बनने की कहानी है। इससे पहले विजय वर्मा आखिरी बार ‘गुस्ताख इश्क’ में नजर आए थे। इस फिल्म को क्रिटिक्स ने सराहा था। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म वो कमाल नहीं दिखा पाई थी।

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