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इंटरव्यू: किस वजह से खुद पर शक करती हैं परिणीति चोपड़ा? तीन घंटे में ही पढ़ डाली सात एपिसोड की स्क्रिप्ट
सार
Parineeti Chopra Interview: वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ रिलीज हो चुकी है। सीरीज में परिणीति चोपड़ा मुख्य किरदार निभा रही हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में परिणीति ने फिल्म में अपने किरदार और अपने मां के तौर पर अपने व्यक्तिगत जीवन के विचारों पर बात की। जानें क्या कहा परिणीति ने…
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परिणीति चोपड़ा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परिणीति चोपड़ा की नई वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ में हर किरदार पर शक की गुंजाइश बनी रहती है। कहानी आगे बढ़ती है और असली सच आखिर में सामने आता है। मगर अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने असल जिंदगी में किसी पर शक करना या किसी रिश्ते को लेकर ज्यादा सोचने पर बात की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी के साथ उन्हें अच्छा महसूस नहीं होता, तो वह उससे दूरी बना लेती हैं।
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परिणीति चोपड़ा
- फोटो : इंस्टाग्राम- @parineetichopra
‘जिसके साथ खुश नहीं हूं, उसे जिंदगी से हटा देती हूं’
अमर उजाला से बातचीत में परिणीति कहती हैं, ‘अगर मुझे किसी इंसान के साथ वाइब नहीं करती और मैं उसके साथ समय नहीं बिताना चाहती, तो मैं नहीं बिताती। मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं बैठकर किसी चीज को लेकर सोचती रहूं और टेंशन लूं। अगर मैं किसी चीज में सिर्फ 50 प्रतिशत हूं और उससे खुश नहीं हूं, तो मैं उसका बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहती। मेरे लिए मन की शांति बहुत जरूरी है। लोगों के साथ भी मैं ऐसी ही हूं। अगर मुझे किसी के साथ समय नहीं बिताना है, तो मैं नहीं बिताऊंगी। मैं उन चीजों और लोगों को बहुत आसानी से अपनी जिंदगी से हटा देती हूं, जिन्हें मैं पसंद नहीं करती या जिनके साथ खुश नहीं हूं। मैं ज्यादा सोचती नहीं हूं। मैं बस खुश रहना चाहती हूं और हर वक्त मुस्कुराना चाहती हूं।’
अमर उजाला से बातचीत में परिणीति कहती हैं, ‘अगर मुझे किसी इंसान के साथ वाइब नहीं करती और मैं उसके साथ समय नहीं बिताना चाहती, तो मैं नहीं बिताती। मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं बैठकर किसी चीज को लेकर सोचती रहूं और टेंशन लूं। अगर मैं किसी चीज में सिर्फ 50 प्रतिशत हूं और उससे खुश नहीं हूं, तो मैं उसका बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहती। मेरे लिए मन की शांति बहुत जरूरी है। लोगों के साथ भी मैं ऐसी ही हूं। अगर मुझे किसी के साथ समय नहीं बिताना है, तो मैं नहीं बिताऊंगी। मैं उन चीजों और लोगों को बहुत आसानी से अपनी जिंदगी से हटा देती हूं, जिन्हें मैं पसंद नहीं करती या जिनके साथ खुश नहीं हूं। मैं ज्यादा सोचती नहीं हूं। मैं बस खुश रहना चाहती हूं और हर वक्त मुस्कुराना चाहती हूं।’
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परिणीति चोपड़ा
- फोटो : इंस्टाग्राम- @parineetichopra
‘मैं बहुत मुंहफट हूं, जो महसूस करती हूं बोल देती हूं’
परिणीति आगे कहती हैं कि वह अपने मन की बात छिपाकर नहीं रखतीं। जो महसूस करती हैं, सीधे कह देती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं खुली किताब की तरह हूं। मैं अपने दिल में कुछ रखती नहीं हूं। मैं बहुत मुंहफट हूं, जो महसूस करती हूं बोल देती हूं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मेरे आसपास के लोग कभी यह सोचते होंगे कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है या मैं क्या सोच रही हूं। मैं चाहती हूं कि रात को घर जाऊं तो लगे कि आज का दिन आराम से बीता। मेरी जिंदगी आसान, रिलैक्स और टेंशन फ्री रहे। अगर मेरी जिंदगी में हर वक्त शक और टेंशन रहेगी तो मैं पागल हो जाऊंगी। इसलिए मैं ऐसा होने ही नहीं देती।’
परिणीति आगे कहती हैं कि वह अपने मन की बात छिपाकर नहीं रखतीं। जो महसूस करती हैं, सीधे कह देती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं खुली किताब की तरह हूं। मैं अपने दिल में कुछ रखती नहीं हूं। मैं बहुत मुंहफट हूं, जो महसूस करती हूं बोल देती हूं। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मेरे आसपास के लोग कभी यह सोचते होंगे कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है या मैं क्या सोच रही हूं। मैं चाहती हूं कि रात को घर जाऊं तो लगे कि आज का दिन आराम से बीता। मेरी जिंदगी आसान, रिलैक्स और टेंशन फ्री रहे। अगर मेरी जिंदगी में हर वक्त शक और टेंशन रहेगी तो मैं पागल हो जाऊंगी। इसलिए मैं ऐसा होने ही नहीं देती।’
परिणीति चोपड़ा
- फोटो : इंस्टाग्राम- @parineetichopra
‘मां बनने के बाद हर चीज को लेकर सोचते हैं’
दूसरों पर शक करने से दूर रहने वाली परिणीति मानती हैं कि खुद पर शक होना अलग बात है। खासकर मां बनने के बाद। वह कहती हैं, ‘बेशक, आप खुद पर शक करते हैं। मां बनने के बाद तो आप अपने हर काम को लेकर सोचते हैं कि मैंने सही किया या नहीं। इतनी सारी चीजें होती हैं, इसलिए एक अच्छा सपोर्ट सिस्टम बहुत जरूरी है, ताकि आपको पता हो कि आप अकेले नहीं हैं। मां बनने के बाद आप हमेशा के लिए बदल जाते हैं। सब कुछ बहुत ज्यादा हो जाता है। खासकर अभी मेरे लिए, क्योंकि मैं नई मां हूं और मेरा बेबी है।'
दूसरों पर शक करने से दूर रहने वाली परिणीति मानती हैं कि खुद पर शक होना अलग बात है। खासकर मां बनने के बाद। वह कहती हैं, ‘बेशक, आप खुद पर शक करते हैं। मां बनने के बाद तो आप अपने हर काम को लेकर सोचते हैं कि मैंने सही किया या नहीं। इतनी सारी चीजें होती हैं, इसलिए एक अच्छा सपोर्ट सिस्टम बहुत जरूरी है, ताकि आपको पता हो कि आप अकेले नहीं हैं। मां बनने के बाद आप हमेशा के लिए बदल जाते हैं। सब कुछ बहुत ज्यादा हो जाता है। खासकर अभी मेरे लिए, क्योंकि मैं नई मां हूं और मेरा बेबी है।'
परिणीति चोपड़ा
- फोटो : इंस्टाग्राम- @parineetichopra
‘एक एपिसोड पढ़ने बैठी थीं, 2-3 घंटे में पूरी कहानी खत्म कर दी’
परिणीति आमतौर पर स्क्रिप्ट पढ़ने में काफी समय लेती हैं, लेकिन ‘शक’ की कहानी ने उन्हें ऐसा मौका ही नहीं दिया। अभिनेत्री के मुताबिक, ‘आजकल थ्रिलर में कई बार पहले ही पता चल जाता है कि आगे क्या होने वाला है। इसलिए मुझे लगा कि शायद यह भी कोई सामान्य कहानी होगी। मैं बहुत सारी किताबें पढ़ती हूं, तो मैंने सोचा कि चलो एक एपिसोड पढ़ते हैं। वैसे भी मुझे स्क्रिप्ट पढ़ने में काफी समय लगता है। मेरा धैर्य थोड़ा कम है और जिंदगी में बहुत सारी चीजें चल रही होती हैं। लेकिन इस बार मैं पढ़ती चली गई। यकीन मानिए, मैं रुक ही नहीं पाई, सो भी नहीं पाई। मुझे लगा जैसे मैं कोई फिक्शन नॉवेल पढ़ रही हूं। कहानी इतनी दिलचस्प थी कि मैंने सारे एपिसोड करीब 2-3 घंटे में खत्म कर दिए।’
परिणीति ने आगे बताया कि स्क्रिप्ट खत्म करने के बाद उन्होंने रात में ही अपने मैनेजर को फोन किया। वह बोलीं- ‘मैंने उनसे कहा- ‘ये तो मुझे करना ही पड़ेगा। यह शानदार है।’ मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। मैं इस प्रोजेक्ट से प्यार कर बैठी थी। मुझे लगा कि मुझे यह करना ही है। मुझे इसके बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ी।’
परिणीति आमतौर पर स्क्रिप्ट पढ़ने में काफी समय लेती हैं, लेकिन ‘शक’ की कहानी ने उन्हें ऐसा मौका ही नहीं दिया। अभिनेत्री के मुताबिक, ‘आजकल थ्रिलर में कई बार पहले ही पता चल जाता है कि आगे क्या होने वाला है। इसलिए मुझे लगा कि शायद यह भी कोई सामान्य कहानी होगी। मैं बहुत सारी किताबें पढ़ती हूं, तो मैंने सोचा कि चलो एक एपिसोड पढ़ते हैं। वैसे भी मुझे स्क्रिप्ट पढ़ने में काफी समय लगता है। मेरा धैर्य थोड़ा कम है और जिंदगी में बहुत सारी चीजें चल रही होती हैं। लेकिन इस बार मैं पढ़ती चली गई। यकीन मानिए, मैं रुक ही नहीं पाई, सो भी नहीं पाई। मुझे लगा जैसे मैं कोई फिक्शन नॉवेल पढ़ रही हूं। कहानी इतनी दिलचस्प थी कि मैंने सारे एपिसोड करीब 2-3 घंटे में खत्म कर दिए।’
परिणीति ने आगे बताया कि स्क्रिप्ट खत्म करने के बाद उन्होंने रात में ही अपने मैनेजर को फोन किया। वह बोलीं- ‘मैंने उनसे कहा- ‘ये तो मुझे करना ही पड़ेगा। यह शानदार है।’ मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। मैं इस प्रोजेक्ट से प्यार कर बैठी थी। मुझे लगा कि मुझे यह करना ही है। मुझे इसके बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ी।’
वेब सीरीज 'शक'
- फोटो : सोशल मीडिया
‘हर किरदार पर शक होना चाहिए’
परिणीति के मुताबिक इस सीरीज की कहानी सिर्फ बच्चे के गायब होने की कहानी नहीं है। हर किरदार की अपनी कहानी है और उसके व्यवहार के पीछे कोई वजह है। उन्होंने कहा, 'हमने ध्यान रखा कि हर किरदार हर सीन में अपने किरदार के मुताबिक सही लगे। अगर कोई दर्शक शो दोबारा देखे तो उसे समझ आए कि इसने उस वक्त ऐसा क्यों किया था। आखिर में सच एक ही सामने आना है, लेकिन उससे पहले हर किरदार पर शक होना चाहिए। हमारी कोशिश थी कि दर्शक अंत तक अंदाजा न लगा पाए कि असल में क्या होने वाला है।’
परिणीति के मुताबिक इस सीरीज की कहानी सिर्फ बच्चे के गायब होने की कहानी नहीं है। हर किरदार की अपनी कहानी है और उसके व्यवहार के पीछे कोई वजह है। उन्होंने कहा, 'हमने ध्यान रखा कि हर किरदार हर सीन में अपने किरदार के मुताबिक सही लगे। अगर कोई दर्शक शो दोबारा देखे तो उसे समझ आए कि इसने उस वक्त ऐसा क्यों किया था। आखिर में सच एक ही सामने आना है, लेकिन उससे पहले हर किरदार पर शक होना चाहिए। हमारी कोशिश थी कि दर्शक अंत तक अंदाजा न लगा पाए कि असल में क्या होने वाला है।’
वेब सीरीज 'शक'
- फोटो : सोशल मीडिया
‘आज के दर्शक को बांधकर रखना पड़ता है’
ओटीटी पर दर्शकों के पास अब चुनने के लिए बहुत कुछ है। ऐसे में परिणीति के मुताबिक, उन्हें कहानी से जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने आगे कहा, ‘आज की ऑडियंस के पास बिल्कुल धैर्य नहीं है। उसे बांधकर रखना पड़ता है। हम घर पर शो देख रहे होते हैं, किचन से कोई आवाज आई, बच्चे ने बुलाया, तो टीवी बंद कर सकते हैं। इसलिए कहानी इतनी ग्रिप्पिंग होनी चाहिए कि उसे बंद करने का मन ही न करे। ‘शक’ में हमने यही कोशिश की है कि हर किरदार पर शक बना रहे और दर्शक यह जानने के लिए आखिर तक देखता रहे कि सच क्या है।’
ओटीटी पर दर्शकों के पास अब चुनने के लिए बहुत कुछ है। ऐसे में परिणीति के मुताबिक, उन्हें कहानी से जोड़े रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने आगे कहा, ‘आज की ऑडियंस के पास बिल्कुल धैर्य नहीं है। उसे बांधकर रखना पड़ता है। हम घर पर शो देख रहे होते हैं, किचन से कोई आवाज आई, बच्चे ने बुलाया, तो टीवी बंद कर सकते हैं। इसलिए कहानी इतनी ग्रिप्पिंग होनी चाहिए कि उसे बंद करने का मन ही न करे। ‘शक’ में हमने यही कोशिश की है कि हर किरदार पर शक बना रहे और दर्शक यह जानने के लिए आखिर तक देखता रहे कि सच क्या है।’