Send Help Movie Review: एक द्वीप पर दो लोगों की जंग, सर्वाइवल से ज्यादा मनोवैज्ञानिक खेल पर फोकस करती है फिल्म
Send Help Movie Review: कई बॉलीवुड फिल्मों की रिलीज के बीच हॉलीवुड फिल्म ‘सेंड हेल्प’ भी रिलीज हो रही है। कैसी है यह फिल्म? पढ़िए, हॉलीवुड फिल्म ‘सेंड हेल्प’ का रिव्यू?
विस्तार
'सेंड हेल्प' पहली नजर में एक साधारण सर्वाइवल हॉलीवुड फिल्म लगती है। प्लेन क्रैश होता है, दो लोग बचते हैं और वे एक सुनसान द्वीप पर पहुंच जाते हैं लेकिन कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, साफ हो जाता है कि यह सिर्फ जंगल, भूख और मुश्किलों से जूझने की कहानी नहीं है। फिल्म असल में दो लोगों के बीच पुराने तनाव, ईगो और दबे हुए गुस्से की कहानी है। लिंडा (रैचल मैकएडम्स) और ब्रैडली (डायलन ओब्रायन) की आपसी तकरार और बदलते रिश्ते ही फिल्म का असली आकर्षण बन जाते हैं।
कहानी
फिल्म की शुरुआत एक विमान दुर्घटना से होती है जिसमें सिर्फ दो लोग बचते हैं, लिंडा (रैचल मैकएडम्स), जो मेहनती है लेकिन ऑफिस में अक्सर अनदेखी की जाती है। उसका बॉस ब्रैडली (डायलन ओब्रायन), जो अहंकारी है और हमेशा खुद को सही मानता है। दोनों एक सुनसान द्वीप पर फंस जाते हैं। यहां शुरुआत में उन्हें पानी, खाना और मौसम जैसी बुनियादी चीजों से जूझना पड़ता है।
समय के साथ उन्हें समझ आता है कि असली चुनौती प्रकृति से जुड़ी नहीं, बल्कि एक-दूसरे से निपटना भी है। ऑफिस में दबी हुई कड़वाहट इस नए माहौल में और तेज हो जाती है। दोनों को एक-दूसरे की मदद भी चाहिए और एक-दूसरे से दूरी भी। कहानी धीरे-धीरे सर्वाइवल से हटकर एक मनोवैज्ञानिक खींचतान में बदल जाती है, जिसमें दोनों खुद को भी बचाना चाहते हैं और सामने वाले पर भी नजर रखनी पड़ती है।
अभिनय
रैचल मैकएडम्स ने लिंडा का रोल बहुत सहजता से निभाया है। वह शांत, समझदार और हालात संभालने में सक्षम दिखती हैं। फिल्म में यह बताया जाता है कि वह हमेशा किसी सर्वाइवल रियलिटी शो में जाना चाहती थी, जिससे उसकी स्किल्स काफी हद तक वास्तविक लगती हैं। लेकिन उसके अंदर डर, गुस्सा और भावनात्मक टूटन भी दिखती है, जो उसे और मानवीय बनाती है।
डायलन ओब्रायन का किरदार ब्रैडली कई बार समझ नहीं आता। कभी अच्छा लगता है, कभी अचानक गुस्सा हो जाता है। उसका व्यवहार हर समय बदलता रहता है। उसके इस बदलते व्यवहार से कहानी में लगातार तनाव बना रहता है। दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री असहज है और यही फिल्म का सबसे जरूरी हिस्सा भी बन जाती है।
निर्देशन
फिल्म के निर्देशक सैम राइमी ने एक अच्छी फिल्म बनाई है। वह किसी बड़े डरावने सीन के बजाय माहौल और चुप्पी से तनाव पैदा करते हैं। कई बार दोनों किरदारों की साधारण बातचीत भी भारी लगने लगती है। कैमरा उन पलों पर टिक जाता है, जहां ऑडियंस खुद बेचैन हो जाते हैं। द्वीप का माहौल सादा है लेकिन दबाव से भरा हुआ, जो कहानी के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।
पटकथा
पटकथा का फोकस दोनों किरदारों के मनोवैज्ञानिक उतार-चढ़ाव पर है। कहानी धीमी गति से आगे बढ़ती है और डायलॉग भी आसान और सीधे हैं। लेकिन कुछ कमियां साफ तौर से महसूस होती हैं। पहली कमी यह है कि लिंडा की सर्वाइवल स्किल्स कई जगह जरूरत से ज्यादा दिखाई गई हैं, जिससे कुछ सीन्स कम रियल लगते हैं। दूसरी कमी यह है कि कुछ हिंसक सीन्स देखकर ऑडियंस को लगता है कि अब कुछ आगे बढ़ना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ हाेता नहीं है।
फिल्म ‘सेंड हेल्प’ सिर्फ एक सर्वाइवल फिल्म नहीं है। यह दो लोगों के टूटते हुए रिश्ते, उनके डर और उनके ईगो की कहानी है। फिल्म में अच्छा अभिनय है, अच्छा तनाव है और माहौल भी काफी खींचने वाला है। लेकिन इसकी कमियां भी ध्यान खींचती हैं। यही कारण है कि फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं लगती। फिर भी अगर आपको मनोवैज्ञानिक कहानियां, दो किरदारों के बीच तनाव और धीमी लेकिन असरदार फिल्मों का अंदाज पसंद है, तो 'सेंड हेल्प' वाकई में एक अच्छा अनुभव दे सकती है।