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Space Gen Chandrayaan Review: बड़ी कहानी, बड़ा शोर… लेकिन असर नहीं; जरूरत से ज्यादा इमोशन पर असली कहानी गायब
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सार
Space Gen- Chandrayaan Web Series Review: श्रिया सरन और नकुल मेहता की नई सीरीज स्पेस जेन चंद्रयान आज रिलीज हुई है। सीरीज देखने से पहले पढ़िए ये रिव्यू और जानिए कैसी है सीरीज…
स्पेस जेन चंद्रयान रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
स्पेस जेन: चंद्रयान
कलाकार
श्रिया सरन
,
नकुल मेहता
,
प्रकाश बेलवाड़ी
,
गोपाल दत्त
और
दानिश सैत
लेखक
शुभम शर्मा
और
प्रशांत कुमार
निर्देशक
अनंत सिंह
निर्माता
द वायरल फीवर (TVF)
रिलीज:
23 जनवरी 2026
रेटिंग
2/5
विस्तार
हम सबको वो रात आज भी याद है जब चंद्रयान–2 का लैंडर आखिरी पल में संपर्क खो बैठा था। कुछ सेकंड में पूरी उम्मीद टूट गई थी और माहौल एकदम शांत हो गया था। वेब सीरीज 'स्पेस जेन चंद्रयान' भी यही भावना पकड़कर शुरू होती है। पांच एपिसोड की यह सीरीज दिखाती है कि टीम ने उस झटके के बाद खुद को कैसे संभाला और चंद्रयान–3 की तैयारी में कैसे दोबारा जुट गई। शुरुआत काफी भावुक और अच्छी लगती है, लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते असर थोड़ा कमजोर सा होने लगता है।
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'स्पेस जेन : चन्द्रयान'
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
सीरीज में चंद्रयान–2 की असफलता, इसरो प्रमुख शंकरन नायर (उदय महेश) और वैज्ञानिक सलाहकार राकेश मोहंती (गोपाल दत्त) का डर-घबराहट। इसके बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर यामिनी मुदलियार (श्रिया सरन) व नेविगेशन एक्सपर्ट अर्जुन वर्मा (नकुल मेहता) पर आई जिम्मेदारी दिखाई गई है।
जांच कमेटी की बागडोर सुदर्शन रमैय्या (प्रकाश बेलवाड़ी) के हाथ में जाती है, जो बाकी लोगों की तरह गुस्से में नहीं पड़ते बल्कि शांति से गलती समझने की कोशिश करते हैं। बाद में शंकरन रिटायर होते हैं और रमैय्या मजबूरी में ही सही, पूरे स्पेस सेंटर के प्रमुख बन जाते हैं।
इसके बाद चंद्रयान–3 की तैयारी शुरू होती है, लेकिन कोविड–19, काम का बार-बार रुकना और रूस का लूना–25 लॉन्च करने का अचानक किया गया ऐलान .. सब मिलकर मिशन पर दबाव बढ़ा देते हैं। कहानी यह बताती है कि पहली नाकामी ने टीम को गिराया नहीं, बल्कि थोड़ा और मजबूत ही कर दिया।
सीरीज में दो ट्रैक चलते हैं। ISRO के वैज्ञानिकों की मेहनत वाला ट्रैक अच्छा लगता है, वहीं अर्जुन वर्मा की निजी फैमिली स्टोरी उतनी जमती नहीं और थोड़ा अलग-थलग सी लगती है। रमैय्या का बैकग्राउंड और उनके साथ हुई सामाजिक परेशानियां काफी अच्छे से दिखाई गई हैं और कहानी में गहराई भी लाती हैं।
हालांकि, सच्चाई ये है कि कि चंद्रयान–3 की असली चुनौतियों को और ज्यादा समय मिलता, तो कहानी ज्यादा असरदार होती।
सीरीज में चंद्रयान–2 की असफलता, इसरो प्रमुख शंकरन नायर (उदय महेश) और वैज्ञानिक सलाहकार राकेश मोहंती (गोपाल दत्त) का डर-घबराहट। इसके बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर यामिनी मुदलियार (श्रिया सरन) व नेविगेशन एक्सपर्ट अर्जुन वर्मा (नकुल मेहता) पर आई जिम्मेदारी दिखाई गई है।
जांच कमेटी की बागडोर सुदर्शन रमैय्या (प्रकाश बेलवाड़ी) के हाथ में जाती है, जो बाकी लोगों की तरह गुस्से में नहीं पड़ते बल्कि शांति से गलती समझने की कोशिश करते हैं। बाद में शंकरन रिटायर होते हैं और रमैय्या मजबूरी में ही सही, पूरे स्पेस सेंटर के प्रमुख बन जाते हैं।
इसके बाद चंद्रयान–3 की तैयारी शुरू होती है, लेकिन कोविड–19, काम का बार-बार रुकना और रूस का लूना–25 लॉन्च करने का अचानक किया गया ऐलान .. सब मिलकर मिशन पर दबाव बढ़ा देते हैं। कहानी यह बताती है कि पहली नाकामी ने टीम को गिराया नहीं, बल्कि थोड़ा और मजबूत ही कर दिया।
सीरीज में दो ट्रैक चलते हैं। ISRO के वैज्ञानिकों की मेहनत वाला ट्रैक अच्छा लगता है, वहीं अर्जुन वर्मा की निजी फैमिली स्टोरी उतनी जमती नहीं और थोड़ा अलग-थलग सी लगती है। रमैय्या का बैकग्राउंड और उनके साथ हुई सामाजिक परेशानियां काफी अच्छे से दिखाई गई हैं और कहानी में गहराई भी लाती हैं।
हालांकि, सच्चाई ये है कि कि चंद्रयान–3 की असली चुनौतियों को और ज्यादा समय मिलता, तो कहानी ज्यादा असरदार होती।
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स्पेस जेन चंद्रयान
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिनय
श्रिया सरन ने काफी बढ़िया काम किया है। उनका शांत और सधा हुआ अंदाज कहानी को संतुलित रखता है। नकुल मेहता कुछ सीन में ठीक हैं, पर कई जगह उनका अभिनय थोड़ा ज्यादा ही भारी लग जाता है, जैसे जबरदस्ती इमोशंस बढ़ाए गए हों। कई सीन में वे ओवर एक्टिंग करते नजर आते हैं।
दानिश सैत थोड़ी राहत देते हैं, लेकिन उनका रोल छोटा है। गोपाल दत्त का किरदार ज़रूरत से ज्यादा चिड़चिड़ा और सख्त दिखाया गया है, जो कहानी से थोड़ा बाहर सा लगता है। प्रकाश बेलवाड़ी अच्छे लगे, लेकिन उनका किरदार उतना खुलकर नहीं लिखा गया जितना लिखा जा सकता था।
सकारात्मक बातें
सीरीज के कुछ हिस्से वाकई अच्छे लगे- खासकर वो पल जब टीम असफलता के बाद दोबारा खड़े होने की हिम्मत दिखाती है। मिशन के दौरान का तनाव और मानवीय इमोशंस भी कुछ दृश्यों में अच्छी तरह सामने आती हैं। ISRO जैसे बड़े मिशन के पीछे कितने लोगों की मेहनत होती है, यह हिस्सा अच्छा समझ आता है।
श्रिया सरन ने काफी बढ़िया काम किया है। उनका शांत और सधा हुआ अंदाज कहानी को संतुलित रखता है। नकुल मेहता कुछ सीन में ठीक हैं, पर कई जगह उनका अभिनय थोड़ा ज्यादा ही भारी लग जाता है, जैसे जबरदस्ती इमोशंस बढ़ाए गए हों। कई सीन में वे ओवर एक्टिंग करते नजर आते हैं।
दानिश सैत थोड़ी राहत देते हैं, लेकिन उनका रोल छोटा है। गोपाल दत्त का किरदार ज़रूरत से ज्यादा चिड़चिड़ा और सख्त दिखाया गया है, जो कहानी से थोड़ा बाहर सा लगता है। प्रकाश बेलवाड़ी अच्छे लगे, लेकिन उनका किरदार उतना खुलकर नहीं लिखा गया जितना लिखा जा सकता था।
सकारात्मक बातें
सीरीज के कुछ हिस्से वाकई अच्छे लगे- खासकर वो पल जब टीम असफलता के बाद दोबारा खड़े होने की हिम्मत दिखाती है। मिशन के दौरान का तनाव और मानवीय इमोशंस भी कुछ दृश्यों में अच्छी तरह सामने आती हैं। ISRO जैसे बड़े मिशन के पीछे कितने लोगों की मेहनत होती है, यह हिस्सा अच्छा समझ आता है।
स्पेस जेन चंद्रयान
- फोटो : सोशल मीडिया
नकारात्मक बातें
ड्रामा काफी ज्यादा है। कई मीटिंग्स बहस में बदल जाती हैं, हर सीन में ऊंची आवाज, गुस्सा और इमोशंस इतना भरा हुआ है कि कई अच्छे पल भी भारी लगने लगते हैं। कई बार तो रोना धोना इतना ज्यादा दिखा दिया जाता है कि मामला असली की बजाय नाटकीय लगने लगता है।
कहानी में उतनी गहराई नहीं है जितनी इस विषय में होनी चाहिए और कुछ जगह लगता है कि चीजें जल्दी-जल्दी निपटा दी गई हैं।
देखें या नहीं
अगर आपको अंतरिक्ष मिशन और इसरो की मेहनत में दिलचस्पी है, तो यह सीरीज एक बार देखी जा सकती है। कुछ हिस्से अच्छे लगेगे और थोड़ी प्रेरणा भी मिलती है। लेकिन अगर आप बहुत ज्यादा रोमांच, गहराई या लगातार दिलचस्प चलने वाली कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह सीरीज आपको थोड़ा कमजोर लगेगी।
कई जगह कहानी धीमी पड़ जाती है। कई सीन्स ओवर ड्रामेटिक महसूस होता है। कुल मिलाकर, ये सीरीज बहुत उम्मीदें लगाकर देखेंगे तो थोड़ी निराशा हो सकती है।
ड्रामा काफी ज्यादा है। कई मीटिंग्स बहस में बदल जाती हैं, हर सीन में ऊंची आवाज, गुस्सा और इमोशंस इतना भरा हुआ है कि कई अच्छे पल भी भारी लगने लगते हैं। कई बार तो रोना धोना इतना ज्यादा दिखा दिया जाता है कि मामला असली की बजाय नाटकीय लगने लगता है।
कहानी में उतनी गहराई नहीं है जितनी इस विषय में होनी चाहिए और कुछ जगह लगता है कि चीजें जल्दी-जल्दी निपटा दी गई हैं।
देखें या नहीं
अगर आपको अंतरिक्ष मिशन और इसरो की मेहनत में दिलचस्पी है, तो यह सीरीज एक बार देखी जा सकती है। कुछ हिस्से अच्छे लगेगे और थोड़ी प्रेरणा भी मिलती है। लेकिन अगर आप बहुत ज्यादा रोमांच, गहराई या लगातार दिलचस्प चलने वाली कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह सीरीज आपको थोड़ा कमजोर लगेगी।
कई जगह कहानी धीमी पड़ जाती है। कई सीन्स ओवर ड्रामेटिक महसूस होता है। कुल मिलाकर, ये सीरीज बहुत उम्मीदें लगाकर देखेंगे तो थोड़ी निराशा हो सकती है।