{"_id":"69675a6f6f846818f10ed36b","slug":"taskaree-the-smugglers-web-review-emraan-hashmi-and-sharad-kelkar-in-lead-role-in-neeraj-pandey-crime-show-2026-01-14","type":"wiki","status":"publish","title_hn":"Taskaree Review: सच्चाई के करीब जाती है क्राइम सीरीज, इमरान हाशमी की सधी हुई एक्टिंग बनी ताकत","category":{"title":"Movie Reviews","title_hn":"मूवी रिव्यूज","slug":"movie-review"}}
Taskaree Review: सच्चाई के करीब जाती है क्राइम सीरीज, इमरान हाशमी की सधी हुई एक्टिंग बनी ताकत
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: किरण जैन
Updated Wed, 14 Jan 2026 02:47 PM IST
विज्ञापन
सार
Taskaree The Smuggler’s Web Review: इमरान हाशमी और शरद केलकर स्टारर नई वेब सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ आज रिलीज हो गई है। सीरीज देखने से पहले यहां पढ़िए इसका रिव्यू और जानिए कैसी है नीरज पांडे की यह सीरीज…
तस्करी: द स्मगलर्स वेब रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
Movie Review
तस्करी: द स्मगलर्स वेब
कलाकार
इमरान हाशमी
,
शरद केलकर
,
अमृता खानविलकर
,
नंदीश सिंह संधू
,
फ्रेडी दारूवाला
और
और जमील खान
लेखक
नीरज पांडे
निर्देशक
नीरज पांडे
और
राघव एम जैरथ
निर्माता
नीरज पांडे
रिलीज
14 जनवरी 2026
रेटिंग
3.5/5
विस्तार
'तस्करी: द स्मगलर्स वेब' एक 7 एपिसोड की क्राइम ड्रामा वेब सीरीज है। इसे नीरज पांडे ने फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के बैनर में बनाया है। यह स्मगलिंग की उस दुनिया को दिखाती है, जो आम लोगों की नजरों से छुपी रहती है। कहानी कई देशों से जुडी हुई है। यह बताती है कि तस्करी सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ा इंटरनेशनल नेटवर्क है।
Trending Videos
तस्करी: द स्मगलर्स वेब
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
सीरीज की शुरुआत इस बात से होती है कि कैसे महंगी घड़ियां, ब्रांडेड बैग, सोना, विदेशी करेंसी और नशीले पदार्थ एयरपोर्ट के रास्ते एक देश से दूसरे देश पहुंचाए जाते हैं। इसमें दिखाया गया है कि स्मगलर कानून, कस्टम ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों का फायदा कैसे उठाते हैं। इसके बाद कहानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंच जाती है। यहां कस्टम्स विभाग की एक टीम इन गैरकानूनी कामों को रोकने की कोशिश करती है।
इस टीम को लीड अर्जुन मीणा (इमरान हाशमी) करता है। वह एक ईमानदार और मेहनती कस्टम्स अधिकारी है। वह नियमों से कोई समझौता नहीं करता। वह पूरे मन से अपना काम करता है। लेकिन जांच के दौरान उसे बार-बार यह एहसास होता है कि तस्कर बहुत चालाक हैं। वे हमेशा कानून से एक कदम आगे रहते हैं। फर्जी कागजात, गुप्त कोड और सिस्टम के अंदर मौजूद लोगों की मदद से वे खुद को बचा लेते हैं।
कहानी में बाबा चौधरी (शरद केलकर) नाम का एक बड़ा तस्कर भी है। वह इस पूरे नेटवर्क को चुपचाप चलाता है। वह ज्यादा सामने नहीं आता, लेकिन उसके फैसले पूरे धंधे को चलाते हैं। जब कस्टम्स टीम उसकी कमाई को नुकसान पहुंचाने लगती है, तब हालात और मुश्किल हो जाते हैं। इस टकराव के दौरान अफसरों पर काम का दबाव बढता है। उनकी निजी जिंदगी भी प्रभावित होने लगती है।
सीरीज की शुरुआत इस बात से होती है कि कैसे महंगी घड़ियां, ब्रांडेड बैग, सोना, विदेशी करेंसी और नशीले पदार्थ एयरपोर्ट के रास्ते एक देश से दूसरे देश पहुंचाए जाते हैं। इसमें दिखाया गया है कि स्मगलर कानून, कस्टम ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों का फायदा कैसे उठाते हैं। इसके बाद कहानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंच जाती है। यहां कस्टम्स विभाग की एक टीम इन गैरकानूनी कामों को रोकने की कोशिश करती है।
इस टीम को लीड अर्जुन मीणा (इमरान हाशमी) करता है। वह एक ईमानदार और मेहनती कस्टम्स अधिकारी है। वह नियमों से कोई समझौता नहीं करता। वह पूरे मन से अपना काम करता है। लेकिन जांच के दौरान उसे बार-बार यह एहसास होता है कि तस्कर बहुत चालाक हैं। वे हमेशा कानून से एक कदम आगे रहते हैं। फर्जी कागजात, गुप्त कोड और सिस्टम के अंदर मौजूद लोगों की मदद से वे खुद को बचा लेते हैं।
कहानी में बाबा चौधरी (शरद केलकर) नाम का एक बड़ा तस्कर भी है। वह इस पूरे नेटवर्क को चुपचाप चलाता है। वह ज्यादा सामने नहीं आता, लेकिन उसके फैसले पूरे धंधे को चलाते हैं। जब कस्टम्स टीम उसकी कमाई को नुकसान पहुंचाने लगती है, तब हालात और मुश्किल हो जाते हैं। इस टकराव के दौरान अफसरों पर काम का दबाव बढता है। उनकी निजी जिंदगी भी प्रभावित होने लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तस्करी: द स्मगलर्स वेब रिव्यू
- फोटो : यूट्यूब ग्रैब
अभिनय
इमरान हाशमी ने अर्जुन मीणा के रोल में संयमित और भरोसेमंद अभिनय किया है। वह शांत रहते हुए भी अपने किरदार का असर दिखाते हैं। शरद केलकर बाबा चौधरी के रोल में बिना ज्दाया शोर किए खतरनाक लगते हैं। सीरीज में मिताली कामत (अमृता खानविलकर) और रविंदर गुज्जर (नंदीश सिंह संधू) जैसे किरदार भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये किरदार जांच और ऑपरेशन के दौरान कहानी को आगे बढाते हैं। इनके अलावा फ्रेडी दारूवाला, जमील खान और अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को मजबूती दी है।
निर्देशन
सीरीज का निर्देशन नीरज पांडे और राघव एम जैरथ ने मिलकर किया है, जिसकी वजह से कहानी का टोन गंभीर और संतुलित बना रहता है। सीरीज में जरूरत से ज्यादा एक्शन या ड्रामा नहीं दिखाया गया है। जांच की प्रक्रिया को धीरे और साफ तरीके से पेश किया गया है। कुछ एपिसोड थोड़े धीमे जरूर लग सकते हैं। इसके बावजूद कहानी ज्यादा असली और भरोसेमंद महसूस होती है।
इमरान हाशमी ने अर्जुन मीणा के रोल में संयमित और भरोसेमंद अभिनय किया है। वह शांत रहते हुए भी अपने किरदार का असर दिखाते हैं। शरद केलकर बाबा चौधरी के रोल में बिना ज्दाया शोर किए खतरनाक लगते हैं। सीरीज में मिताली कामत (अमृता खानविलकर) और रविंदर गुज्जर (नंदीश सिंह संधू) जैसे किरदार भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये किरदार जांच और ऑपरेशन के दौरान कहानी को आगे बढाते हैं। इनके अलावा फ्रेडी दारूवाला, जमील खान और अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को मजबूती दी है।
निर्देशन
सीरीज का निर्देशन नीरज पांडे और राघव एम जैरथ ने मिलकर किया है, जिसकी वजह से कहानी का टोन गंभीर और संतुलित बना रहता है। सीरीज में जरूरत से ज्यादा एक्शन या ड्रामा नहीं दिखाया गया है। जांच की प्रक्रिया को धीरे और साफ तरीके से पेश किया गया है। कुछ एपिसोड थोड़े धीमे जरूर लग सकते हैं। इसके बावजूद कहानी ज्यादा असली और भरोसेमंद महसूस होती है।
तस्करी: द स्मगलर्स वेब रिव्यू
- फोटो : यूट्यूब
कमियां
कई जांच से जुड़े सीन एक जैसे लगते हैं, जिससे दोहराव महसूस होता है। इसी वजह से कुछ ऑडियंस को सीरीज खींची हुई लग सकती है, खासकर उन्हें जो तेज रफ्तार थ्रिलर पसंद करते हैं।
देखे या नहीं?
कुल मिलाकर तस्करी: द स्मगलर्स वेब एक गंभीर और वास्तविक क्राइम सीरीज है। इसमें बहुत बड़े ट्विस्ट नहीं हैं। इसके बावजूद कहानी, माहौल और अभिनय इसे देखने लायक बनाते हैं। अगर आपको सच्चाई के करीब रहने वाली, धीमी और समझदारी से बनी क्राइम कहानियां पसंद हैं, तो यह सीरीज आपको पसंद आ सकती है।
कई जांच से जुड़े सीन एक जैसे लगते हैं, जिससे दोहराव महसूस होता है। इसी वजह से कुछ ऑडियंस को सीरीज खींची हुई लग सकती है, खासकर उन्हें जो तेज रफ्तार थ्रिलर पसंद करते हैं।
देखे या नहीं?
कुल मिलाकर तस्करी: द स्मगलर्स वेब एक गंभीर और वास्तविक क्राइम सीरीज है। इसमें बहुत बड़े ट्विस्ट नहीं हैं। इसके बावजूद कहानी, माहौल और अभिनय इसे देखने लायक बनाते हैं। अगर आपको सच्चाई के करीब रहने वाली, धीमी और समझदारी से बनी क्राइम कहानियां पसंद हैं, तो यह सीरीज आपको पसंद आ सकती है।