Border 2 Movie Review: सनी-वरुण की मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस, इमोशन और देशभक्ति भरपूर पर निराश करते हैं वीएफएक्स
Border 2 Movie Review: फिल्म 'बॉर्डर 2' आज 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर' की सीक्वल है। 'बॉर्डर 2' कैसी है? पढ़िए पूरा रिव्यू
विस्तार
'बॉर्डर 2' एक बड़ी और इमोशंस से भरी वॉर फिल्म है, जिसमें सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे एक्टर्स नजर आते हैं। यह 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित है और पहली बॉर्डर की तरह इस फिल्म से भी लोगों को बहुत उम्मीदें थीं।
फिल्म बड़े पर्दे पर भव्य दिखाई देती है और इसकी कहानी ऑडियंस को धीरे-धीरे अपने साथ जोड़ लेती है। फिल्म के क्रेडिट्स में सनी देओल के नाम के साथ लिखकर आता है- 'धर्मेंद्र जी का बेटा'। यह लाइन पढ़ते ही आप भावुक हो जाते हैं। नवंबर 2025 में पिता के गुजरने के बाद यह सनी देओल की पहली फिल्म है।
कहानी
फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौर की है, जहां लड़ाई तीन मोर्चों जमीन, आसमान और समंदर पर एक साथ चल रही है। होशियार सिंह (वरुण धवन) आर्मी में है, निर्मलजीत सिंह (दिलजीत दोसांझ) एयरफोर्स का पायलट है और महेंद्र रावत (अहान शेट्टी) ने नौसेना की कमान संभालता है।
ये तीनों दोस्त हैं और एक ही अकादमी से ट्रेनिंग ले चुके हैं। इनके मेंटर फतेह सिंह (सनी देओल) इस समय बॉर्डर पर अपनी बटालियन का नेतृत्व कर रहे हैं।
फिल्म की शुरुआत सैनिकों और उनके परिवारों की शांत जिंदगी से होती है..लेकिन सीमा पर बढ़ते तनाव के साथ माहौल धीरे-धीरे गंभीर हो जाता है। अचानक हमलों के बाद जवानों की असली परीक्षा शुरू होती है।
जब दुश्मन भारत पर तीन दिशाओं से हमला करता है, तो हालात काफी मुश्किल हो जाते हैं और ऐसे समय में ये चारों अपने-अपने मोर्चों पर डटकर देश की रक्षा में जुट जाते हैं। कहानी इमोशंस से भरी है और ऑडियंस आखिर तक यही जानना चाहती है कि क्या ये सभी मिलकर देश को बचा पाएंगे?
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अभिनय
फिल्म की सबसे मजबूत बात इसका अभिनय है। सनी देओल जैसे ही स्क्रीन पर आते हैं, उनका गुस्सा, बोलने का अंदाज और एक्शन सब प्रभावी लगता है। उनकी उम्र ज्यादा होने के बावजूद भी उनका प्रदर्शन बेहद मजबूत दिखता है और ऑडियंस उससे तुरंत कनेक्ट कर लेती है।
फिल्म का ट्रेलर आते ही वरुण धवन को उनके एक्सप्रेशन्स को लेकर काफी ट्रोल किया गया था.. लेकिन फिल्म में उन्होंने खुद को पूरी तरह साबित कर दिया। उनका अभिनय काफी अच्छा है और इमोशन्स इस बार बहुत साफ, सच्चे और मासूम लगते हैं।
दिलजीत दोसांझ जब फाइटर जेट उड़ाते दिखते हैं, तो स्क्रीन पर अलग ही मजा आता है। उनके सीन्स बहुत ही स्टाइलिश बने हैं। अहान शेट्टी भी अच्छा असर छोड़ते हैं, खासकर वो सीन जहां वो अपने पापा सुनील शेट्टी वाले आइकॉनिक अंदाज की झलक दिखाते हैं।
फीमेल कलाकार जैसे मोना सिंह, मेधा राणा, सोनम बाजवा और अन्या सिंह...कम दिखाई देती हैं लेकिन हर सीन में असर छोड़ती हैं। बाकी सपोर्टिंग कास्ट ने भी ईमानदारी से अपना काम किया है।
निर्देशन
निर्देशन उतना मजबूत नहीं लगता जितनी उम्मीद थी। फिल्म बड़े स्केल पर बनी है उसके बाद भी देशभक्ति व स्टार पावर पर ज्यादा निर्भर दिखती है। कहानी को पेश करने में वह बारीकी और पकड़ नहीं दिखती, जो एक बेहतरीन वॉर फिल्म में होनी चाहिए।
कई सीन अच्छे बने हैं, लेकिन पूरी फिल्म में निर्देशन की क्वालिटी एक जैसी नहीं रहती। निर्देशन से ज्यादा यह फिल्म इमोशंस और स्टार पावर के दम पर चलेगी।
म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक कहानी के साथ काफी अच्छा चलता है। 'घर कब आओगे' दिल को छू जाता है और 'मिट्टी के बेटे' सुनकर आंखें भर आती हैं। 'जाते हुए लम्हों' कम देर के लिए है लेकिन फिल्म पर उसका असर साफ दिखता है। बैकग्राउंड म्यूजिक, खासकर 'हिंदुस्तान मेरी जान...' आते ही पूरा माहौल जोश से भर देता है।
निगेटिव प्वाइंट
तकनीकी रूप ये यह फिल्म उतनी असरदार नहीं लगी। ट्रेलर के वक्त वीएफएक्स को लेकर जो शिकायतें थीं, उनमें से कुछ फिल्म में भी महसूस होती हैं। कहीं-कहीं विजुअल्स उतने शार्प नहीं लगते। टेक्निकल लेवल पर फिल्म बहुत नया या कुछ इनोवेटिव नहीं करती।
देखें या नहीं
अगर आप ऐसी फिल्म ढूंढ रहे हैं, जिसमें कहानी बहुत बारीकी से बनी हो, स्क्रीनप्ले एकदम स्मूद हो और हर सीन तकनीकी तौर पर मजबूत लगे, तो 'बॉर्डर 2' आपको पूरी तरह खुश नहीं करेगी। लेकिन अगर आप इमोशन, स्टार्स के मजबूत पल और बड़े पैमाने पर बने युद्ध वाले सीन देखने के लिए जाते हैं, तो यह फिल्म आपको अच्छी लगेगी। नीयत साफ है, बस हर जगह उसका एक्जीक्यूशन उतना शानदार नहीं है।