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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai

Ohh My Dog Review: पंकज त्रिपाठी की फिल्म में ऑस्कर ने बटोरीं सबसे ज्यादा तालियां; मगर कहानी लंबी पड़ जाती है

Fri, 07 Aug 2026 05:05 PM IST
Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Fri, 07 Aug 2026 05:05 PM IST
सार

Ohh My Dog Review: पंकज त्रिपाठी की फिल्म हो और थिएटर से निकलते वक्त सबसे ज्यादा चर्चा किसी और की हो... ऐसा कम ही होता है। लेकिन 'ओह माय डॉग' में ऐसा होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां पूरा दिल जीत लेता है ऑस्कर... एक कुत्ता।

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Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai
ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
ओह माय डॉग
कलाकार
पंकज त्रिपाठी , राजेश कुमार , पवन मल्होत्रा , माही राय , गीता अग्रवाल शर्मा , ऑस्कर और मोमो
लेखक
अमित राय
निर्देशक
अमित राय
निर्माता
अमित राय, राजेश भारद्वाज, सना वारसी
रेटिंग
3.5/5

विस्तार

'ओएमजी 2' के बाद अमित राय ने फिर एक सामाजिक मुद्दा चुना है। इस बार न कोर्टरूम है.. न बहसें। कहानी एक बेजुबान के साथ चलती है। वह अपने मालिक को ढूंढ़ रहा है, लेकिन रास्ते में जो दुनिया दिखती है, वह सिर्फ जानवरों के लिए नहीं, इंसानों के लिए भी उतनी ही बेरहम है।

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Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai
ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : साभार@imdb

कहानी: दो गुमशुदगियां... और एक सफर
फिल्म की शुरुआत पुलिस डॉग 'सेनापति' की विदाई से होती है। इसके बाद कहानी उसके दो बच्चों ऑस्कर और मोमो तक पहुंचती है। दोनों अलग-अलग घरों में पल रहे हैं। फिर एक दिन मोमो गायब हो जाता है। दूसरी तरफ ऑस्कर का मालिक प्रिंस भी लापता हो जाता है। यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। एक बच्चा अपने पालतू दोस्त को ढूंढ़ रहा है, जबकि एक कुत्ता अपने इंसान तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
तलाश का यह सफर धीरे-धीरे डॉग तस्करी, किडनी रैकेट, बाल मजदूरी और गरीब मजदूरों के शोषण जैसे मुद्दों तक पहुंचता है। अच्छी बात यह है कि फिल्म इन बातों को अलग से भाषण बनाकर नहीं परोसती। ये कहानी के साथ-साथ चलती रहती हैं।

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Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai
ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया

एक्टिंग: पंकज त्रिपाठी हमेशा की तरह सहज, ऑस्कर सबसे बड़ा सरप्राइज
पंकज त्रिपाठी गांव के मास्टर के किरदार में वही करते हैं, जो उनसे उम्मीद रहती है। बिना ज्यादा शोर किए वह अपने किरदार को भरोसेमंद बना देते हैं। राजेश कुमार बिहारी पुलिस अधिकारी के किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। वह अपने किरदार को बिना ओवरएक्टिंग के प्रभावी बनाते हैं। पवन मल्होत्रा का रोल बड़ा नहीं है..लेकिन RTO अधिकारी के किरदार में वह अपनी मौजूदगी महसूस करा जाते हैं।
निर्देशक अमित के बेटे माही राय बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट इस फिल्म से शुरुआत कर रहे हैं। पहली ही फिल्म में उनका आत्मविश्वास नजर आता है। कई भावुक दृश्यों में उनकी मौजूदगी असर छोड़ती है, हालांकि कुछ जगह उनका किरदार जरूरत से ज्यादा होशियार दिखता है।

लेकिन फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज ऑस्कर है। बिना एक भी डायलॉग बोले वह कई ऐसे सीन अपने नाम कर लेता है..जहां नजरें सिर्फ उसी पर टिक जाती हैं। कई बार तो लगता है कि कैमरा उसे फॉलो नहीं कर रहा, बल्कि वही कहानी को आगे बढ़ा रहा है।

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Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai
ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : यूट्यूब

निर्देशन: जब फिल्म ऑस्कर के साथ रहती है, सबसे ज्यादा असर करती है
अमित राय की कोशिश साफ दिखती है। वह सिर्फ डॉग लवर्स के लिए फिल्म नहीं बनाते। वह एक ऐसी कहानी कहते हैं, जिसमें जानवरों के बहाने इंसानों का चेहरा भी दिखता है।
फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि वह इमोशन को ओवरडोज नहीं बनाती। लेकिन यही फिल्म बीच-बीच में अपनी पकड़ भी छोड़ देती है। कुछ हिस्से लंबे लगते हैं और कहानी बार-बार दूसरे ट्रैक पर चली जाती है।

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ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : यूट्यूब

टेक्निकल पक्ष: लोकेशन असर छोड़ती हैं...
बिहार और असम की लोकेशन कहानी को असली जैसा एहसास देती हैं। छोटे शहर और गांव स्क्रीन पर बनावटी नहीं लगते। बैकग्राउंड म्यूजिक कई भावुक दृश्यों का असर बढ़ाता है। हालांकि, फिल्म का कोई भी गाना ऐसा नहीं है, जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए।

क्या खटकता है?
फिल्म सबसे ज्यादा असर तब करती है, जब ऑस्कर और उसके मालिक की कहानी चल रही होती है। लेकिन यह ट्रैक बार-बार टूटता है, जिससे इमोशन कमजोर पड़ जाता है। डॉग तस्करी, किडनी रैकेट और बाल मजदूरी... फिल्म एक साथ बहुत कुछ कहना चाहती है। नतीजा यह होता है कि कुछ मुद्दे सिर्फ छूकर निकल जाते हैं। अपू कई जगह अपनी उम्र से ज्यादा होशियार दिखता है। कुछ मौकों पर तो वह पुलिस से भी पहले हर सुराग तक पहुंच जाता है...ये थोड़ा ज्यादा फिल्मी लगता है। वहीं क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते जो रोमांच बनता है.... वह थोड़ा और दमदार हो सकता था।

Ohh My Dog Movie Review In Hindi Pankaj Tripathi Rajesh Kumar Geeta film Ratings Directed By Amit Rai
ओह माय डॉग रिव्यू - फोटो : यूट्यूब

देखें या नहीं?
'ओह माय डॉग' की सबसे बड़ी ताकत ऑस्कर है। फिल्म खत्म होने के बाद भी उसकी वफादारी और बात इस फिल्म को खास बनाती है। हां, फिल्म थोड़ी लंबी है। बीच-बीच में कहानी की रफ्तार भी धीमी पड़ती है। 
फिर भी...अगर परिवार के साथ ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं, जिसमें इमोशन हो, एक अच्छा मैसेज हो और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता भी दिखे...तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।

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