The Legend of Karna Review: महाभारत के महानायक से बच्चों से मिलाने की अच्छी कोशिश, बेहतर हो सकते थे डायलॉग
The Legend of Karna Review in Hindi: महाभारत के वीर योद्धा सूर्यपुत्र कर्ण को केंद्र में रखकर बनी वेब सीरीज ‘द लीजेंड ऑफ कर्ण’ के पांच एपिसोड हाल ही में रिलीज हुए हैं। यहां जानिए कैसी है यह सीरीज…
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विस्तार
भारतीय एनिमेशन वर्ल्ड में महाभारत और महाभारत से जुड़े कई युद्धाओं पर एनिमेटेड फिल्में और शोज बने हैं। कृष्णा, पांडव, छोटा भीम और अर्जुन के बाद अब इस फेहरिस्त में सूर्यपुत्र कर्ण का नाम भी जुड़ गया है। हाल ही में सोनी लिव पर पांच एपिसोड की सीरीज ‘द लीजेंड ऑफ कर्ण’ रिलीज हुई। कैसी है यह सीरीज यहां जानिए…
कहानी
यह सीरीज महाभारत के योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित है। कहानी कर्ण के युवा अवस्था से शुरू होती है जब वो हस्तिनापुर में होने वाले महाउत्सव और प्रतियोगिता के बारे में सुनते हैं। इस प्रतियोगिता में शामिल होकर कर्ण भी अपना कौशल दिखाना चाहते हैं। वो वहां पहुंचकर अर्जुन और पांडव को एक शेर से बचाते हैं। वहीं जब पांडव, कर्ण को नीचा दिखाते हैं तो वहां उनका साथ देना के लिए दुर्याेधन आ जाता है। कर्ण जब अर्जुन को चुनौती देता है तो दुर्याेधन को बेहद खुशी होती है। उसकी यह हिम्मत देखकर दुर्याेधन उससे मित्रता करने के लिए उसे अपना एक राज्य देकर कर्ण को अंग प्रदेश का राजा घोषित कर देता है। इसके बाद से कर्ण का जीवन पूरी तरह बदल जाता है और वह अपना सर्वस्व हमेशा-हमेशा के लिए दुर्याेधन को अर्पित कर देता है।
वॉइस ओवर
सीरीज के लिए ‘क्राइम पेट्रोल’ फेम अनूप सोनी ने कर्ण के किरदार को आवाज दी है। किरदार के लिए अनूप ने अपनी आवाज को काफी बदला है। आपको यहां एक बार में उनकी आवाज पहचान में नहीं आती। उन्होंने अपनी तरफ से बेस्ट दिया है पर शायद यहां कोई असल वॉइस आर्टिस्ट होता तो इस किरदार का मजा दोगुना हो जाता है। जिस तरह गुरू द्रोण को वॉइस आर्टिस्ट समय ठक्कर और भीष्म पितामाह को शक्ति सिंह जैसे अनुभवी कलाकारों ने डब किया है, वो सुनकर मजा आता है। शाहिद जाफर ने अपनी आवाज के जरिए दुर्याेधन के किरदार के साथ न्याय किया है। सीरीज में मयूर व्यास, अशोक लोखंडे और सुरुचि वर्मा समेत कई आर्टिस्ट ने अपनी आवाज दी।
निर्देशन
इस सीरीज का निर्देशन ‘द लीजेंड ऑफ हनुमान’ और ‘बाहुबली’ जैसी शानदार एनिमेटेड सीरीज का क्रिएशन कर चुके जीवन जे कांग ने किया है। यहां वो थोड़ा सा चूक गए। भले ही सीरीज में जबरदस्ती का हो-हल्ला नहीं है पर यह सीरीज तय नहीं कर पाती कि यह बच्चों के लिए बनाई गई है या बड़ों के लिए। एक्शन सीन कुछ जगह बेहद बचकाने और दैत्य सच से परे हैं। वहीं डायलॉग भी थोड़े बेहतर किए जा सकते थे। हालांकि, इसमें बिना बात का ड्रामा और इमोशंस नहीं डाले गए पर आपको बांध कर रखने वाला मसाल मिसिंग है।
देखें या नहीं?
महावीर कर्ण के जीवन से रूबरू होना चाहते हैं तो इसे देख सकते हैं। बच्चों को भी दिखाई जा सकती है। छोटे-छोटे पांच एपिसोड हैं इसलिए आप ज्यादा बोर नहीं होंगे।