संजय गुप्ता का निधन: 2047 के लिए योजना बना रहे थे निर्माता, 'कांटे' के बाद जिंदगी को क्यों मानने लगे थे बोनस?
- Sanjay Gupta Death: निर्माता-निर्देशक संजय गुप्ता हमारे बीच नहीं रहे।
- कई चर्चित फिल्में बनाने वाले संजय गुप्ता का 57 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया है।
- सिनेमा के शौकीन संजय गुप्ता बेहद जिंदादिल इंसान थे। भविष्य के लिए योजनाएं बना रहे थे और जिंदगी ने धोखा दे दिया। जानिए उनके बारे में...
विस्तार
इंसान भविष्य के लिए तमाम योजनाएं बनाता है। बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें और सपने होते हैं। ऐसे ही सपने निर्माता-निर्देशक संजय गुप्ता बुन रहे थे और दुआ कर रहे थे कि सब ठीक रहे। उनके सपने साल 2047 के लिए थे, मगर दुआ कबूल नहीं हुई और जिंदगी ने धोखा दे दिया। संजय गुप्ता के निधन की दुखद सूचना से इंडस्ट्री में शोक है। सिनेमा में उनका मन रमता था। मगर, बाइक और कार उनके शौक थे या कहें उनके दिल की धड़कन थे। जब मौका मिलता वे दोस्तों के साथ सैर पर निकल जाया करते। मगर, बीती रात अचानक वे ऐसी यात्रा पर चले गए, जहां से कोई नहीं लौटता। पढ़िए संजय गुप्ता से जुड़े कुछ किस्से
मुंबई में हुआ था जन्म
फिल्ममेकर और FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर संजय गुप्ता के निधन की दुखद सूचना की पुष्टि की है। संजय गुप्ता का जन्म 23 अक्तूबर 1969 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने कई चर्चित फिल्में बनाई थीं। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में कांटे, शूटआउट एट वडाला, काबिल, आतिश, राम शास्त्र, जंग, जज्बा, जिंदा, हमेशा, मुसाफिर, दस कहानियां, मुंबई सागा और खौफ शामिल हैं। उन्होंने 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'प्लान', 'वुडस्टॉक विला', 'एसिड फैक्ट्री' और 'पंख' जैसी फिल्में प्रोड्यूस की थीं।
जिंदगी को बोनस क्यों मानते थे?
फिल्म 'कांटे' (2002) की रिलीज के वक्त संजय गुप्ता के साथ भीषण हादसा हुआ था। एक्सीडेंट में वे गंभीर रूप से घायल हुए थे और कई दिन आईसीयू में रहे थे। इस साल जून में उन्होंने उस हादसे की याद ताजा की थी। एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर कर उन्होंने मार्कस ऑरेलियस का कोट साझा किया था, 'खुद को मृत समझो। अब जो बचा है, उसे ठीक से जियो'। आगे लिखा था, 'फिल्म 'कांटे' रिलीज होने पर मेरा एक्सीडेंट हो गया था। लीलावती के डॉक्टरों ने कहा कि पहले 72 घंटे बहुत जरूरी थे। मैं बच गया। एक जिंदगी लगभग खत्म हो गई थी और उसके बाद सब कुछ एक बोनस है। मैं इसे एक जिंदगी की तरह मानता हूं'।
'ऊपर वाले से दुआ है, बस जिंदा रखना'
संजय गुप्ता ने एक पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें उन्होंने 2047 में अपनी योजनाओं को लेकर लिखा था। संजय ने लिखा था, 'साल 2047 के लिए बहुत कुछ वादा किया जा रहा है। बस ऊपर वाले से दुआ है कि तब तक हम सभी को जिंदा रखना। खासकर वो सब जो ये हसीन सपना दिखा रहे हैं।
संजय दत्त के साथ बनाईं कई फिल्में
संजय गुप्ता ने अभिनेता संजय दत्त के साथ कई चर्चित फिल्में बनाईं। दोनों ने पहली बार फिल्म 'आतिश- फील द फायर' (1994) में साथ काम किया था। यह फिल्म संजय गुप्ता की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थे। इसके बाद दोनों ने 'खौफ' (2000), 'जंग' (2000), 'कांटे' (2002), 'मुसाफिर' (2004) और 'जिंदा' (2006) जैसी फिल्मों में साथ काम किया।
अंडरवर्ल्ड से मिली थीं धमकियां, संजय दत्त से मांगी थी मदद
संजय गुप्ता को एक वक्त अंडरवर्ल्ड से धमकिया मिली थीं। इसका खुलासा निर्देशक ने हुसैन जैदी को दिए एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें साल 1992-93 के बीच अंडरवर्ल्ड की धमकियां मिली थीं। तब वे 'आतिश' बना रहे थे। इसमें संजय दत्त, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन अहम भूमिकाओं में थे। उन्होंने बताया कि एक सुबह उनके घर पर फोन आया। दूसरी तरफ से एक शख्स खुद को 'नाना' बताया। संजय गुप्ता को समझ नहीं आया कि कौन नाना है? बाद में उन्हें पता चला कि फोन छोटा राजन का था। फोन पर उन्हें गालियां दी गईं। निर्देशक ने तुरंत संजय दत्त को फोन किया और मदद मांगी। संजय दत्त ने एक्टर से कहा था कि वे घर से निकालने में उनकी मदद करें। तब अभिनेता ने अपने पिता सुनील दत्त की सरकारी गाड़ी उनके घर भेजी। संजय गुप्ता पीछे के रास्ते से उस गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए।
बाइक के थे शौकीन, दोस्तों संग करते थे सैर
संजय गुप्ता को फिल्मों और सिनेमा के अलावा बाइक का शौक था। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट में इसकी झलक देखने को मिलती है। अक्सर दोस्तों की टोली के साथ वे बाइक राइड पर निकल जाया करते थे। बीते साल अक्तूबर में वे नई मोटरसाइकिल भी लेकर आए थे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा था, 'एक सच्चे बाइकर के लिए घर में नई बाइक आना, घर में नए बच्चे के आने जैसा होता है। बेशुमार खुशी, दिल में जोश, आंखों में चमक और धड़कता हुआ दिल। सड़क पर निकलने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। अपने चेहरे पर हवा और दिल में एड्रेनालाईन का एहसास महसूस कर सकता हूं'।
पत्नी अनु लेखी से क्यों रचाई दो बार शादी?
संजय गुप्ता की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी शादी अनु लेखी से हुई। निर्माता-निर्देशक ने अनु से दो बार शादी की थी। दरअसल, पहली शादी के बाद दोनों करीब छह साल तक साथ रहे। फिर तलाक हो गया। मगर, एक-दूसरे के लिए मोहब्बत फिर इन्हें करीब ले आई और दोनों ने दोबारा शादी रचा ली। साल 2024 में सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक इंटरव्यू में अनु लेखी ने कहा था कि दोनों का अलग होना किसी एक की गलती नहीं थी। संजय गुप्ता दो बच्चों के पिता थे। संजय गुप्ता और अनु लेखी का एक बेटा और एक बेटी है। बेटे का नाम शिवांश गुप्ता है, जिनका जन्म साल 2011 में हुआ। बेटी का नाम दलाई गुप्ता है, जो साल 2013 में पैदा हुईं।
संजय दत्त से क्यों झगड़ा हुआ?
संजय गुप्ता और संजय दत्त की जोड़ी ने कई चर्चित फिल्में दीं। दोनों ने साथ में व्हाइट फेदर फिल्म्स नाम की प्रोडक्शन कंपनी बनाई थी। साल 2007 में फिल्म 'शूटआउट एट लोखंडवाला' के दौरान दोनों में विवाद हो गया। यह विवाद तकनीशियनों के भुगतान को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। संजय दत्त ने 2007 में संजय गुप्ता के साथ अपनी निजी और प्रोफेशनल पार्टनरशिप खत्म कर दी।
- साल 2024 में यूट्यूबर सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में संजय गुप्ता ने कहा कि उनके और संजय दत्त के बीच असल में कुछ गलत नहीं हुआ था, बल्कि दोनों के आसपास मौजूद लोगों ने गलतफहमियां पैदा की थीं।
- कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी थी कि संजय दत्त ने दूसरे लोगों को उनके साथ काम नहीं करने के लिए कहा है। संजय गुप्ता ने साफ किया कि संजय दत्त ने कभी ऐसा नहीं कहा था।
- इस विवाद के बाद वे करीब तीन साल तक बेरोजगार रहे। संजय दत्त से झगड़े की वजह से उन्हें काम मिलना लगभग बंद हो गया था।
- एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर खंडाला में होटल का काम संभालने के बारे में सोचना शुरू कर दिया था।
- चार साल उनकी और संजय दत्त की बातचीत बंद रही थी। फिर, 11 अक्तूबर 2012 को अमिताभ बच्चन की 70वीं बर्थडे पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई।
- दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और भावुक हो गए और फिर दोस्ती का सिलसिला शुरू हो गया।