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स्वच्छ भारत में क्या है यूपी की भूमिका: स्वच्छता सर्वेक्षण में लंबी छलांग, इन अभियानों का रहा बड़ा रोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Fri, 17 Apr 2026 07:07 PM IST
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सार
स्वच्छ भारत मिशन में उत्तर प्रदेश एक 'शक्तिशाली इंजन' बनकर उभरा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ ने देश के तीसरे सबसे स्वच्छ शहर का गौरव पाया, जबकि प्रयागराज सर्वश्रेष्ठ गंगा शहर बना। राज्य की इस सफलता का मुख्य कारण कचरा प्रसंस्करण में 85% तक की वृद्धि, 7-स्टार और वॉटर-प्लस रेटिंग्स, और 'कचरे से कंचन' जैसे अभिनव अभियान हैं। शीर्ष 20 शहरों में यूपी के सात शहरों का शामिल होना सुधरती स्थिति को दर्शाने वाला है।
यूपी के स्वच्छ शहर।
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में स्वच्छता को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। साल-दर-साल राज्य और इसके शहरों ने स्वच्छता में नए मुकाम हासिल किए हैं। 2024-25 के ही स्वच्छ सर्वेक्षण की बात कर लें तो न सिर्फ यूपी को इसमें शीर्ष स्थान मिला, बल्कि कई शहरों ने भी इसमें लंबी छलांग लगाते हुए अग्रिम रैंकिंग में जगह बनाई। इसके साथ ही यूपी ने स्वच्छता के नए मानक भी स्थापित किए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) में उत्तर प्रदेश एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभरा है।
आइये जानते हैं स्वच्छ भारत मिशन को आगे ले जाने में यूपी के शहरों और योजनाओं की क्या-क्या भूमिका रही है...
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आइये जानते हैं स्वच्छ भारत मिशन को आगे ले जाने में यूपी के शहरों और योजनाओं की क्या-क्या भूमिका रही है...
1. लखनऊ ने रचा इतिहास: बना देश का तीसरा सबसे स्वच्छ शहर
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के वर्ग में अहमबाबाद और भोपाल के बाद देश में तीसरा स्थान हासिल किया। लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसे कचरा मुक्त शहर के लिए 7-स्टार रेटिंग मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस उपलब्धि के लिए शहर को प्रेसीडेंशियल अवार्ड से सम्मानित किया।
2. प्रयागराज के महाकुंभ मॉडल को मिली सराहना
धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अहम प्रयागराज ने वाराणसी को पछाड़ते हुए भारत के सबसे स्वच्छ गंगा किनारे वाले शहर का खिताब अपने नाम किया। यूपी सरकार के महाकुंभ 2025 के मॉडल महाकुंभ के दौरान कचरा प्रबंधन के बेहतरीन मॉडल के लिए योगी सरकार और प्रयागराज मेला प्राधिकरण को विशेष राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।
3. नोएडा बना लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर
नोएडा ने 3 से 10 लाख की आबादी वाली श्रेणी में सुपर स्वच्छ लीग (एसएसएल) चार्ट में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यह नई कैटेगरी उन शहरों के लिए है जो लगातार उच्च प्रदर्शन कर रहे हैं।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के वर्ग में अहमबाबाद और भोपाल के बाद देश में तीसरा स्थान हासिल किया। लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसे कचरा मुक्त शहर के लिए 7-स्टार रेटिंग मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस उपलब्धि के लिए शहर को प्रेसीडेंशियल अवार्ड से सम्मानित किया।
2. प्रयागराज के महाकुंभ मॉडल को मिली सराहना
धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अहम प्रयागराज ने वाराणसी को पछाड़ते हुए भारत के सबसे स्वच्छ गंगा किनारे वाले शहर का खिताब अपने नाम किया। यूपी सरकार के महाकुंभ 2025 के मॉडल महाकुंभ के दौरान कचरा प्रबंधन के बेहतरीन मॉडल के लिए योगी सरकार और प्रयागराज मेला प्राधिकरण को विशेष राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।
3. नोएडा बना लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर
नोएडा ने 3 से 10 लाख की आबादी वाली श्रेणी में सुपर स्वच्छ लीग (एसएसएल) चार्ट में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। यह नई कैटेगरी उन शहरों के लिए है जो लगातार उच्च प्रदर्शन कर रहे हैं।
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4. अन्य अहम उपलब्धियां
टॉप 20 में यूपी का दबदबा: 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के शीर्ष 20 शहरों में यूपी के सात शहर (लखनऊ, आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज और नोएडा) शामिल हैं। इसके अलावा गोरखपुर को सफामित्र सुरक्षित शहर की श्रेणी में तीसरा स्थान मिला। उभरते शहरों में आगरा राष्ट्रीय स्तर पर 32वें स्थान पर रहा।
5. पांच स्टार रेटिंग और वॉटर-प्लस स्थिति
यूपी के प्रमुख शहर, जैसे- आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज और नोएडा पांच स्टार रेटिंग हासिल कर चुके हैं, जबकि बिजनौर और शमशाबाद सहित 16 शहरों ने वॉटर-प्लस स्टेटस हासिल किया। यानी वह जिले जहां दूषित पानी को पर्यावरण में पहुंचने से पहले ही संतोषजनक रूप से स्वच्छ कर छोड़ा गया हो।
नगर निगम: राज्य के 17 नगर निगमों में से 13 को वॉटर-प्लस दर्जा मिला (2023-24 यह सिर्फ दो था)।
टॉप 20 में यूपी का दबदबा: 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के शीर्ष 20 शहरों में यूपी के सात शहर (लखनऊ, आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज और नोएडा) शामिल हैं। इसके अलावा गोरखपुर को सफामित्र सुरक्षित शहर की श्रेणी में तीसरा स्थान मिला। उभरते शहरों में आगरा राष्ट्रीय स्तर पर 32वें स्थान पर रहा।
5. पांच स्टार रेटिंग और वॉटर-प्लस स्थिति
यूपी के प्रमुख शहर, जैसे- आगरा, गोरखपुर, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज और नोएडा पांच स्टार रेटिंग हासिल कर चुके हैं, जबकि बिजनौर और शमशाबाद सहित 16 शहरों ने वॉटर-प्लस स्टेटस हासिल किया। यानी वह जिले जहां दूषित पानी को पर्यावरण में पहुंचने से पहले ही संतोषजनक रूप से स्वच्छ कर छोड़ा गया हो।
नगर निगम: राज्य के 17 नगर निगमों में से 13 को वॉटर-प्लस दर्जा मिला (2023-24 यह सिर्फ दो था)।
कैसे यूपी ने हासिल की यह उपलब्धियां, क्या थे अभियान-योजनाएं?
1. अपशिष्ट प्रबंधन और सुधार
डोर-टू-डोर कचरा संग्रह: एक वर्ष में 48% से बढ़कर 62% हुआ।कचरा प्रसंस्करण: एक साल में 48 प्रतिशत से बढ़कर 85 फीसदी तक पहुंचा।
निकायों में सुधार: 83 शहरी स्थानीय निकायों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया।
ओडीएफ++ स्थिति: 337 निकायों को ओडीएफ++ (खुले में शौच मुक्त++) घोषित किया गया, जो पिछले वर्ष (129 निकाय) की तुलना में बड़ी वृद्धि है।
2. कचरे से कंचन: आगरा और वाराणसी के बड़े प्रयोग
आगरा का ट्रांसफॉर्मेशन: आगरा के कुबेरपुर डंपसाइट को पूरी तरह साफ कर इसे एक इको-हब और इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में बदल दिया गया है।वाराणसी का विश्व रिकॉर्ड: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक घंटे के अंदर ढाई लाख से अधिक पौधे लगाकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का नया रिकॉर्ड बनाया गया।

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